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कांग्रेस प्रदर्शन: गहलोत बोले- आयोग के दो सदस्यों ने 14 बार दर्ज कराई आपत्ति, फिर भी नहीं हुई सुनवाई

Mon, 28 Sep 2026 03:51 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Mon, 28 Sep 2026 03:51 PM IST
सार

चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया गया। थाने में धरने के दौरान पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की सुनवाई नहीं हुई।

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Gehlot: Two Election Commissioners Raised 14 Objections, But Were Ignored
अशोक गहलोत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोमवार को कांग्रेस के प्रदर्शन में शामिल होने से पहले मीडिया से बातचीत में गहलोत ने कहा कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने करीब 10 महीने में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। ऐसी आपत्तियां दर्ज किए जाने की रिपोर्ट पहले भी सामने आ चुकी है।

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गहलोत ने कहा कि यह लड़ाई केवल कांग्रेस की नहीं है, बल्कि जनता के वोट के अधिकार और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों चुनाव आयुक्तों को कई बैठकों का एजेंडा और बैठक की कार्यवाही की जानकारी तक नहीं मिलती थी।

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पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब आयोग के दो सदस्यों को अपनी आपत्तियों के समाधान के लिए कैबिनेट सचिव को पत्र लिखना पड़ा, तो इससे स्थिति की गंभीरता समझी जा सकती है। हालांकि, सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आयुक्तों का कैबिनेट सचिव को पत्र एक प्रशासनिक अधिकारी से जुड़े मामले को लेकर था, न कि आयोग की चुनाव नीति या आईटी व्यवस्था को लेकर।

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बैठक के एजेंडे और मिनट्स को लेकर सवाल

गहलोत ने कहा कि हाल में हुई बैठक में एजेंडा और मिनट्स जारी करने की व्यवस्था पर फैसला हुआ है। उनका सवाल था कि यदि यह व्यवस्था पहले से लागू होती तो आयोग के सदस्यों को शिकायत करने की जरूरत क्यों पड़ती।

उन्होंने कहा कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस लंबे समय से सवाल उठाती रही है। गहलोत ने राहुल गांधी के पुराने आरोपों का भी जिक्र किया और कहा कि मतदाताओं के अधिकार से जुड़ा यह मुद्दा किसी एक चुनाव तक सीमित नहीं है।

बंगाल में वोट कटने का दावा

गहलोत ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का दावा भी किया। उन्होंने कहा कि करीब 29 लाख नाम हटाए गए और इनमें से 87 हजार मामलों की जांच हुई, जिनमें बड़ी संख्या में मतदाता सही पाए गए।

हालांकि, गहलोत के इन आंकड़ों और उनकी व्याख्या को चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड से अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है। आयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और आपत्ति दर्ज कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध कराता है।

भाजपा पर भी साधा निशाना

गहलोत ने भाजपा पर चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त का बचाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सवाल चुनाव आयुक्त पर उठ रहे हैं, लेकिन जवाब भाजपा के नेता दे रहे हैं। गहलोत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्हें इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि देश में लोकतंत्र और वोट का अधिकार सुरक्षित रहना जरूरी है।

महाभियोग को लेकर भी बोले

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग के सवाल पर गहलोत ने कहा कि पहले भी इस तरह की प्रक्रिया सामने आ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को संसद में अपने संख्याबल का भरोसा है और विपक्ष कुछ नहीं कर पाएगा, लेकिन जनता इसका जवाब देगी। गहलोत ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।

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