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लो जी, अब मां का दूध भी मिलेगा बैंक में
उदयपुर/एजेंसी
Updated Thu, 25 Apr 2013 07:25 AM IST
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अब जो मां अपने बच्चे को स्तनपान कराने में असमर्थ है, उनके लिए राजस्थान के उदयपुर में दूध बैंक खुल गया है। इस दूध बैंक में मां का दूध मिलेगा, जिससे दुनिया में आए नवजात बच्चे को मां के दूध की कमी नहीं खलेगी।
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‘दिव्या मदर मिल्क बैंक’ के नाम से खुले इस अनोखे बैंक ने शुरुआत में ही मां का 62 यूनिट यानी लगभग दो लीटर दूध जमा कर लिया है।
मां का ये दूध कुछ धाय माताओं ने बैंक को उपलब्ध कराया है।
पच्चीस दिन की एक नन्ही गुड़िया वो पहली नवजात है जिसे एक मां के आंचल से निकले इस दूध ने अपनी खुराक से नवाजा है।
एक गैर -सरकारी संगठन ‘माँ भगवती विकास संस्थान’ के मुताबिक ये बैंक राजस्थान और उत्तर भारत का पहला ऐसा बैंक है जहां मां का दूध संकलित किया जाता है और फिर उसे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को उपलब्ध करवाया जाता है।
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कई बच्चे समय से पहले पैदा हो जाते है और दुनिया में आते ही कोई न कोई बीमारी अपने उन्हें अपने आगोश में ले लेती है। बैंक की संयोजक अर्चना शक्तावत ने बताया कि भारत में शिशु मृत्यु की हालत चिंताजनक है।
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आंकड़ों के मुताबिक पैदा होने वाले एक हजार बच्चों में से 46 बच्चे असमय दम तोड़ देते है। उनके लिए ये दूध राम बाण औषधि है।
बैंक के आयोजकों का कहना है कि अभी उनकी नजर उदयपुर सरकारी अस्पतालों के गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती बच्चों पर है। इन बच्चों को ऐसे दूध की बहुत जरूरत रहती है।
बैंक की अर्चना शक्तावत के अनुसार बहुत से बच्चे और माताएं कुपोषण की शिकार होती हैं और उनको ऐसे दूध से बड़ी मदद मिलती है।
बैंक अधिकारियों के अनुसार एचआईवी पीड़ित महिलाएं जब मां बनती हैं तो उनके नवजात बच्चों के लिए ये दूध बड़ा मददगार हो सकता है।
बैंक अधिकारियों का कहना है कि मां के दूध और उसे दूसरों के लिए उपलब्ध करने की अवधारणा भारत में नई है, लिहाजा लोगों को समझाना भी पड़ रहा है।
किसके लिए सबसे जरूरी
प्री-मेच्योर डिलीवरी वाले नवजात शिशु के लिए।
नवजात की मां की मृत्यु हो गई हो या बीमार हो।
जिनकी मां स्तन पान करा सकने में किसी अन्य कारण से सक्षम न हो।
जुड़वां या तीन बच्चों के एकसाथ जन्म पर।
अनाथाश्रम में आए नवजात शिशुओं के लिए।