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पढ़िए, IAS टॉपर गौरव का पहला इंटरव्यू

Thu, 12 Jun 2014 11:28 PM IST
Updated Thu, 12 Jun 2014 11:28 PM IST
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first interview of gaurav agarwal

देश की सबसे चुनौतिपूर्व सिविल सेवा परीक्षा में अव्वल दर्जा पाकर जयपुर के गौरव अग्रवाल ने राजस्थान का मान बढ़ा दिया। वे फिलहाल हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में भारतीय पुलिस सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी हैं।

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साल 2012 में पहली बार इन्होंने 244 वां स्थान पाया था और भारतीय पुलिस सेवा में इनका चयन हुआ था। पिछले चार वर्षों से इस परीक्षा में शीर्ष स्थान पर महिलाओं का वर्चस्व बना हुआ था, जिसे गौरव ने तोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है।
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अहमदाबाद आईआईएम से गोल्ड मेडिलिस्ट गौरव अग्रवाल ने  जयपुर के सेंट एंसलेम से स्कूलिंग की। एमबीएस से पहले उन्होंने आईआईटी कानपुर से बीटेक किया था। पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश....
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- देश की सबसे कठिन परीक्षा में पहला स्थान पाने की पहली सूचना पाकर आपको कैसा लगा?

सच कहूं, तो पहले साथियों ने सूचना दी, तो भरोसा नहीं हुआ कि मैने टॉप किया है, तो जाहिर है कि अच्छा ही महसूस कर रहा हूं। यहां ट्रेनिंग सेंटर में साथियों के साथ जश्न का सा माहौल है। मेरे माता-पिता व पत्नी शुक्रवार को हैदराबाद पहुंच रहे हैं। उनसे मिलते ही यह आनन्द दोगुना हो जाएगा।

आप इस बेहतरीन सफलता का श्रेय किसे देंगे?

first interview of gaurav agarwal

आप इस बेहतरीन सफलता का श्रेय किसे देंगे?
पहले तो परिवार को ही दूंगा। मेरे पिता सुरेश गुप्ता जयपुर डेयरी में प्रबंधक हैं, उन्होंने मेरे अध्ययन में हमेशा मेरा खास ख्याल रखा। पिछली बार इस परीक्षा में जब कुछ कमी रह गई थी, तो मेरे पिताजी ने ही खामियों को गिनाया और दूर करने में मेरी मदद की। इसी कारण इस बार मैं मनचाही सेवा पाने में सफल रहा। मेरी माताजी सुमन गुप्ता गृहणी हैं, उनका भी कोई कम योगदान नहीं है।

मेहनत और किस्मत को किस तरह से आंकते हैं?
भाग्य से पहले तो मेहनत ही है। भाग्य का काम तो बाद का है। लेकिन इन दोनों के कारण ही सफलता मिलती है।

आईएएस की परीक्षा के लिए आपने किस तरह से तैयारी की थी?
पहली बार जब मेरा आपीएस में सलेक्शन हुआ था, तब मैने 10 से 12 घंटे पढ़ाई की थी। लेकिन इस बार 8 से 10 घंटे ही पढ़ा था। पिताजी ने कहा था कि पढऩे के घंटों से ज्यादा, पढऩे के तरीके पर ध्यान दिया जाना चाहिए। मैने इसी बात का अनुसरण करते हुए पढऩे के तरीके में थोड़े बदलाव किए और परिणाम सामने है।

परीक्षा में कोचिंग का क्या महत्व?

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आप इस परीक्षा में कोचिंग का क्या महत्व मानते हैं?
हां, मैं कोचिंग के लिए दिल्ली गया था, लेकिन मुझे कुछ कमी नजर आई और मैं जयपुर लौट आया। इसके बाद मैने घर पर ही रहकर तैयारी की।

आपका परीक्षा का माध्यम और विषय क्या था?
मैने अंग्रेजी माध्यम में परीक्षा दी थी और मैने वैकल्पिक विषय के रूप में अर्थशास्‍त्र लिया था।

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