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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा: अदालतों को उन मामलों को लेकर अधिक सावधान रहना चाहिए जिन्हें वे उठाती हैं
Fri, 11 Mar 2022 06:48 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 11 Mar 2022 06:48 PM IST
सार
जयपुर लिटरेरी फेस्टिवल में आयोजित द डेमोक्रेसी इंडेक्स को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी लोकुर ने संबोधित किया। यहां उन्होंने देश की अदालतों को सुझाव दिया कि उन्हें गैर जरूरी मामले उठाने से बचना चाहिए और इसे लेकर अधिक सतर्क रहना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन लोकुर
- फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी लोकुर ने शुक्रवार को कहा कि साल 2019 से लंबित इलेक्टोरल बॉन्ड्स जैसे बड़े मुद्दों पर न्यायिक फैसले के साथ अदालतों को उन मामलों में और अधिक सावधान रहना चाहिए, जिन्हें वे उठाती हैं और उन्हें तुच्छ बातों के फेर में नहीं फंसना चाहिए।
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पूर्व न्यायाधीश लोकुर जयपुक लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के मामले पर पर दिए गए फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में इतना अधिक समय नहीं लगना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि अदालतों के पास इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण कार्य हैं। इनमें नागरिक अधिकारों, मानवाधिकारों और चुनाव से संबंधित मामले हैं जिन्हें अदालतों के ध्यान की आवश्यकता है। जेएलएफ में आयोजित 'द डेमोक्रेसी इंडेक्स' सत्र को संबोधित करते हुए लोकिन ने यह टिप्पणी की।
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लोकुर ने कहा, न्याय व्यवस्था बहुत तुच्छ बातों में फंस गई है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर कुछ फैसला दिया था, अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया है। यह बताया जा रहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला सही नहीं है।
पूर्व न्यायाधीश ने कहा, 'ये ऐसी बातें हैं जिन्हें अदालतों का इतना समय नहीं लेना चाहिए। मैं समझता हूं कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट को उन मामलों को लेकर और अधिक गंभीर होना चाहिए जिन्हें वह उठाती हैं और इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए कि मामले समय से पूरे कर लिए जाएं।'