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Rajasthan: पूर्व भाजपा विधायक राजपुरोहित रेप का दोषी, 86 साल की उम्र में जाएगा जेल, जानें 20 साल पुराना मामला
Tue, 21 Feb 2023 09:30 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Tue, 21 Feb 2023 09:30 PM IST
सार
पूर्व विधायक भंवरलाल राजपुरोहित को 20 साल बाद एडीजे कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में दोषी मानते हुए 10 साल की सजा और 1 लाख का जुर्माना लगाया है। कोर्ट फैसले के बाद पुलिस ने राजपुरोहित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
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पूर्व विधायक भंवरलाल राजपुरोहित
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान के नागौर जिले के मकराना की एडीजे कोर्ट ने पूर्व विधायक भंवरलाल राजपुरोहित को दस साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने मंगलवार पूर्व विधायक को 22 साल की महिला से दुष्कर्म का दोषी पाया और फिर उनकी सजा का फैसाला सुनाया।
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अब 86 साल की उम्र में पूर्व विधायक भंवरलाल राजपुरोहित जेल जाएगा। हाालांकि, वह राजनीति में सक्रिय नहीं है। पांच साल पहले उसने राजनीति से संन्यास ले लिया था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान भवरलाल शर्मा व्हील चेयर पर कोर्ट पहुंचा था। इस दौरान कोर्ट ने उसे दस साल की सजा सुनाई और एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट के आदेश के अनुसार यह रकम पीड़िता को दी जाएगी।
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दरअसल, मनाना गांव की रहने वाली 22 साल की एक महिला ने 1 मई 2002 को पूर्व विधायक भवरलाल शर्मा के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। अपनी शिकायत में उसने पुलिस को बताया था कि 29 अप्रैल दोपहर करीब तीन बजे भंवरलाल राजपुरोहित के कुएं पर गई थी। उस दिन भंवरलाल की पत्नी घर पर नहीं थी। कुएं पर पहुंचने के बाद भंवरलाल ने उसे कमरे के अंदर बुलाया।
उसने कहा कि मैं तुम्हारे पति से मुंबई बात करवा देता हूं। पीड़िता के अंदर जाने के बाद भंवरलाल ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि दुष्कर्म के बाद भंवरलाल ने उसे पांच सौ रुपए देकर चुप रहने को कहा, लेकिन वह पैसे फेंककर आ गई। घर पहुंचने पर उसने पिता को अपने साथ हुई दरिंदगी की जानकारी दी।
इसके बाद दोनों ने भंवरलाल के खिलाफ रिपोर्ट दी, लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ। जिसके बाद कोर्ट में इस्तगासा देकर केस दर्ज कराया गया। जांच के बाद पुलिस ने भंवरलाल के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। दुष्कर्म के बाद महिला गर्भवती भी हो गई थी, जिस कारण उसका गर्भपात कराया गया।
मामले की जांच कर रहे तत्कालीन पुलिस निरीक्षक तेजपाल सिंह ने चार महीने में जांच कर केस को झूठा बताया और 16 अगस्त 2002 को कोर्ट में एफआर पेश कर दी थी। बाद में मामले ने तूल पकड़ा, तो एक बार फिर जांच शुरू हुई।
बीस साल से यह केस मकराना के अपर सेशन न्यायालय (एडीजे कोर्ट) में चल रहा था। सात गवाहों ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया। पीड़िता की ओर से कोर्ट में अपर लोक अभियोजक राममनोहर डूडी ने पैरवी की। मंगलवार को एडीजे कुमकुम ने पूर्व विधायक भंवरलाल राजपुरोहित को महिला से दुष्कर्म का दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
2002 में भंवरलाल पर दुष्कर्म का केस दर्ज हुआ तब वह किसी पद पर नहीं था। लेकिन, इससे पहले वह प्रधान रह चुका था। इसके करीब डेढ़ साल बाद अक्टूबर 2003 में राजस्थान में विधानसभा चुनाव हुए तो भाजपा ने भंवरलाल को मकराना से प्रत्याशी बनाया। चुनाव जीतकर भंवरलाल राजपुरोहित विधायक बन गया। इस दौरान कोर्ट में इस मामले की सुनवाई भी चलती रही। हालांकि, पुलिस ने मामला बंद कर दिया, लेकिन कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए जांच दोबारा कराने के आदेश दिए थे।
भंवरलाल मकराना पंचायत समिति में चार बार प्रधान रह चुका है। पहली बार वह 20 मई 1971, दूसरी बार 30 जनवरी 1975, तीसरी बार 27 नवंबर 1981 और फिर 18 अक्टूबर 1985 में प्रधान बना।