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टिकट के लिए बागियों के 'शतक' से परेशान पार्टियां
अमर उजाला,जयपुर
Updated Fri, 15 Nov 2013 03:49 PM IST
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राजस्थान विधानसभा चुनाव में बागियों के शतक ने पार्टियों को परेशान किया हुआ है। प्रदेश का ही नहीं राष्ट्रीय स्तर का नेतृत्व इन बागियों को मनाने में जुटा हुआ है। टिकट नहीं मिलने से नाराज कांग्रेस के करीब 60 बागी तथा भाजपा के 40 से अधिक बागी चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं।
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सम्पर्कों के दौर चल रहे हैं। नामांकन वापस लेने के लिए बागियों को राजी करने को नेता घर तक पहुंच रहे हैं। बागियों की बड़ी संख्या ने दोनों ही पार्टियों की नींद उड़ाई हुई हैं। बागियों को चुनाव मैदान से दूर करने के लिए कई ऑफर्स का सहारा भी लिया जा रहा है।
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कांग्रेस और भाजपा के लिए बागियों ने सियासी समीकरण बिगाड़कर रख दिए हैं। इस कारण भाजपा और कांग्रेस के लिए चुनौती बने बागियों को मनाने की कोशिशें तेजी से चल रही हैं।
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राजस्थान विधानसभा चुनाव में शनिवार को नामांकन वापस लिए जा सकते हैं। पार्टियों की चिंता इस कदर है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चुनाव अभियान समिति की बैठकों में हिस्सा लेने के बजाय बागियों को माने में जुटे हुए हैं और भाजपा में मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार वसुंधरा राजे भी बागियों से मुलाकातों में व्यस्त हैं।
तनाव में हैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
कांग्रेस ने मंडावा सीट से वर्तमान विधायक रीटा चौधरी का टिकट काटकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चन्द्रभान को दे दिया। इससे नाराज रीटा ने निर्दलीय के रूप में पर्चा भर दिया है।
विधायक होने के नाते रीटा, चन्द्रभान को अच्छी चुनौती दे रही हैं। रीटा को केन्द्रीय मंत्री शीश राम ओला, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई नेता मनाने के प्रयास कर रहे हैं। इधर, पिछला चुनाव बासपा की टिकट से जीतकर कांग्रेस में शामिल हुए चिकित्सा राज्य मंत्री राजकुमार शर्मा का नवलगढ़ से टिकट काट दिया, वे भी कांग्रेस प्रत्याशी के सामने निर्दलीय लड़ रहे हैं।
भाजपा को दोनों ही सीटों से अच्छी उम्मीद जगी हुई है। साथ ही, नागौर में हरेन्द्र मिर्धा सहित कई बागी कांग्रेस के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।
गोली मार दो, लेकिन पर्चा वापस नहीं लूंगी
भाजपा की बागियों से त्रस्त चल रही है। सीकर से भजपा की बागी राजकुमारी शर्मा निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रही है, जब भाजपा के आला नेतृत्व ने उनसे सम्पर्क साधा तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया कि गोली मार दो, लेकिन पर्चा वापस नहीं लेंगी।
सूत्रों के अनुसार कुछ बागी मान गए हैं, लेकिन अधिकतर अभी तक अड़े हुए हैं। तीखे तेवर वाले बागियों में आमेर से नवीन पिलानियां, झुंझुनूं से सुमित्रा सिंह, मंडावा से नरेंद्र चौधरी जैसे कई नाम शामिल हैं।