सत्ता का संग्राम: बेरोजगारी से परेशान युवा; बोले- प्राइवेट नौकरी हैं नहीं, सरकारी के पेपर लीक हो जाते हैं
Rajasthan Election 2023: अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' आज यानी 05 नवंबर को राजस्थान के झालावाड़ पहुंचा है। यहां युवाओं से बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। चर्चा के दौरान युवाओं अपनी समस्याओं पर खुलकर बातचीत की।
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साल में एक या दो भर्ती युवाओं के लिए बड़ी चुनौती
अमर उजाला की चर्चा के दौरान युवाओं से यहां की शिक्षा की स्थिति पर सवाल किया गया तो युवाओं ने रोजगार का दुखड़ा रोया। युवाओं ने कहा कि रोजगार के नाम पर यहां कुछ है नहीं। भर्ती आती है वो भी साल एक या दो। सरकार जो भर्ती निकालती है तो पेपर लीक हो जाते हैं। यहां का युवा तो सरकारी नौकरी पर ही निर्भर है, प्राइवेट सेक्टर तो यहां है ही नहीं। प्राइवेट सेक्टर के नाम पर बस फाइनेंस लाइन बची है तो उसमें भी तनख्वाह ही नहीं है। पढ़ाई की बात तो यहां है ही नहीं तैयारी के नाम पर बस आर्मी की तैयारी ही कर रहे युवा।
सबको नहीं मिल सकती सरकारी नौकरी, प्राइवेट में मिलता है दूसरा मौका
युवाओं ने कहा कि सरकारी नौकरी में तो कुछ लोगों का ही चयन होता है, बाकी तो खाल रह जाते हैं। अगर यहां भी प्राइवेट सेक्टर की नौकरी हों तो युवाओं को एक दूसरा मौका मिल सकता है। हर कोई तो सरकारी नौकरी नहीं पा सकता। यहां की महिला विधायक ही दो बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं हैं अगर वो चाहतीं तो यहां के लिए कुछ कर सकती थीं। वैसे तो सभी सरकारें एक जैसी ही हैं। किसी एक को क्या कहें।
शिक्षा के क्षेत्र में झालावाड़ पीछे क्यों?
यहां MLA चाहे बीजेपी का हो या कांग्रेस का हो आम लोगों के लिए कोई नहीं सोचता। यहां पिछली सरकार में पीजी कॉलेज खुला था। कहने को तो युवाओं के लिए अच्छी बात थी, क्योंकि लोगों को उम्मीद थी कि बेहतर शिक्षा मिलेगी, लेकिन वहां तो टीचर ही नहीं हैं। यहां के बीएड कॉलेज की बात करें तो वो भी प्राइवेट हैं सरकारी एक भी नहीं हैं। यहां मध्यमवर्गीय लोग ज्यादा हैं और उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं हैं। मजबूरन यहां के लोगों को बाहर जाना पड़ता है। कोट में दूर दूर से लोग आते हैं, जबकि मैडम मुख्यमंत्री रहीं हैं फिर भी यहां का विकास नहीं हुआ।
मिलीभगत का लगाया आरोप
युवाओं ने आरोप लगाया कि गहलोत और वसुंधरा में मिलीभगत है। अशोक गहलोत यहां आते ही नहीं हैं। यहां जो भी तय करना होता है वो मैडम ही तय करती हैं। यहां किस पार्टी से कौन आएगा ये मैडम ही तय करतीं हैं। मुख्यमंत्री गहलोत पांच साल में शायद एक बार ही यहां आए हैं और वो भी तब जब राहुल गांधी की रैली थी। उस दिन भी मुख्यमंत्री कब आए और कब निकल गए पता ही नहीं चला। शायद ही कोई युवा होगा जिसने उस दिन उनका चेहरा देखा होगा।