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जयपुर का दिव्यांग बच्चा राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित, किया ये कमाल
Fri, 22 Nov 2019 09:45 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Trainee Trainee
Updated Fri, 22 Nov 2019 09:45 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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गंभीर बीमारी से पीड़ित जयपुर के एक दिव्यांग बच्चे ने खास उपलब्धि हासिल की है। उन्हें भारत सरकार की ओर से बाल श्रेणी में उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए चुना गया है। व्हील चेयर के जरिए चलने को मजबूर 17 साल के हृदयेश्वर सिंह भाटी ने सात आविष्कार के साथ तीन पेटेंट अपने नाम करने के साथ-साथ कई पुरस्कार जीते हैं। वह ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नामक बीमारी से पीड़ित हैं।
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से जारी एक पत्र के अनुसार हृदयेश्वर को बाल श्रेणी के अंतर्गत- उत्कृष्ट रचनात्मक बाल (पुरुष) -2019 सशक्त दिव्यांगता के राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। दिल्ली में दो दिसंबर को होने वाले समारोह में उन्हें यह पुरस्कार दिया जाएगा।
उनके पिता सरोवर सिंह भाटी ने बताया कि गंभीर बीमारी के बावजूद ह्रदयेश्वर ने शतरंज के क्षेत्र में आविष्कार कर उसने दुनिया में देश का नाम ऊंचा किया है। उन्होंने पहली बार 2013 में 9 साल की उम्र में छह खिलाड़ियों की गोल शतरंज का आविष्कार किया और देश के सबसे कम उम्र के दिव्यांग पेटेंट धारक बन गए और दुनिया के सबसे कम उम्र के अलग-अलग पेटेंट धारक बन गए।
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केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से जारी एक पत्र के अनुसार हृदयेश्वर को बाल श्रेणी के अंतर्गत- उत्कृष्ट रचनात्मक बाल (पुरुष) -2019 सशक्त दिव्यांगता के राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। दिल्ली में दो दिसंबर को होने वाले समारोह में उन्हें यह पुरस्कार दिया जाएगा।
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उनके पिता सरोवर सिंह भाटी ने बताया कि गंभीर बीमारी के बावजूद ह्रदयेश्वर ने शतरंज के क्षेत्र में आविष्कार कर उसने दुनिया में देश का नाम ऊंचा किया है। उन्होंने पहली बार 2013 में 9 साल की उम्र में छह खिलाड़ियों की गोल शतरंज का आविष्कार किया और देश के सबसे कम उम्र के दिव्यांग पेटेंट धारक बन गए और दुनिया के सबसे कम उम्र के अलग-अलग पेटेंट धारक बन गए।
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