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Didwana Dolchi Holi: अनूठी है डीडवाना की डोलची होली, ब्रिटिश काल से चली आ रही परंपरा, देखें वीडियो
Fri, 14 Mar 2025 09:03 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डीडवाना-कुचामन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डीडवाना-कुचामन
Published by: अरविंद कुमार
Updated Fri, 14 Mar 2025 09:03 PM IST
सार
Dolchi Holi News: राजस्थान में डीडवाना-कुचामन जिले की डोचली होली अनूठी है। इसकी परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है। यहां अधिकारी के साथ लोग होली खेलते हैं।
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होली त्योहार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
डीडवाना में भी होली का त्योहार बेहद खास और अहम है। यहां धुलंडी के दिन "हाकम के संग" खेली जाने वाली "डोलची होली" पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है। इस खास होली का आकर्षण और उल्लास इतना खास होता है कि पूरा डीडवाना शहर डोलची होली खेलने उमड़ पड़ता है। इस अवसर पर डोलची होली खेलने का भी लोगों ने भरपूर आनंद लिया।
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डीडवाना में ‘हाकम’ यानी अतिरिक्त जिला कलेक्टर के संग डोलची होली की परंपरा सदियों पुरानी है। दरअसल, यह परंपरा आमजन के प्रशासन से आत्मीय जुड़ाव को दर्शाती है। इस अनूठी परम्परा के तहत शहरवासी एकत्रित होकर पुराना कोर्ट परिसर पहुंचे, जहां सभी लोगों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर महेंद्र मीणा को रंग-गुलाल लगाया। इसके बाद लोगों ने डोलची के पानी का हाकम की पीठ पर प्रहार किया। बाद में हाकम ने भी लोगों की पीठ पर डोलची से पानी डालकर डोलची होली खेली। इसके बाद डोलची गैर नगर की ओर रवाना हुई। यह गैर डीडवाना शहर के विभिन्न मोहल्लों में पहुंची, जहां सैकड़ो लोगों ने मिलकर डोलची होली खेली।
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बता दें कि धुलंडी वाले दिन खेली जाने वाली "डोलची होली" को "राजकीय गैर" भी कहा जाता है। क्योंकि डोलची होली हाकम यानी उपखंड अधिकारी या एडीएम के संग खेली जाती है। माना जाता है कि ब्रिटिश काल से भी पूर्व डोलची होली की शुरुआत हुई थी। इसका उद्देश्य था कि होली जैसे पर्व पर शासन और जनता के बीच सामंजस्य ओर सौहार्द्ध कायम किया जा सके।
डोलची होली खेलने के लिए धुलण्डी के दिन शहर के लोग गैर यानी जुलूस के रूप में एकत्रित होकर कचहरी परिसर जाते हैं। जहां वे हाकिम यानी उपखंड अधिकारी के साथ जमकर डोलची होली खेलने का आनन्द लेते है। इसके तहत गैरिए सबसे पहले हाकम की पीठ पर डोलची से पानी की बौछार मारकर गैर का शुभारम्भ करते हैं। इसके बाद एक-दूसरे की पीठ पर वार करते हुए गैरिए शहर का भ्रमण करते हैं। इसके बाद यह गैर डीडवाना शहर के विभिन्न मोहल्लों में जाती है, जहां सैकड़ों लोग मिलकर डोलची होली खेलते हैं। डोलची होली में बच्चे, बूढ़े, जवान हर जाति और धर्म के लोग शामिल होते हैं और होली का आनंद उठाते हैं। होली के रसिए साल भर इस डोलची मार होली का इंतजार करते हैं और जमकर खेलते हैं।
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डोलची होली के लिए बड़े-बड़े कडाव (बर्तन) को पानी से भरा जाता है। इस खेल में काफी पानी लगता है, उसके लिए पहले से तैयारियां की जाती है और अगर पानी कम पड़ जाए तो पानी के टैंकर मंगवाएं जाते हैं। सैकड़ों की संख्या में लोग इस होली में एक दूसरे की पीठ पर डोलची से पानी मारते हैं और होली खेलते हैं। इस खेल में मुख्यतः दो लोग आपस में खेलते हैं, लोहे से बनी इस डोलची में खेलने वाला डोलची में पानी भरता है और सामने खड़े अपने साथी की पीठ पर जोर से डोलची में भरे पानी से वार करता है और फिर उसे भी जवाब देने का मौका मिलता है। डोलची के वार की जितनी तेज आवाज होती है उतना ही खेल का मजा आता है और जोश बढ़ता है। डोलची की मार असहनीय होते हुए भी लोग इसका आनंद लेते हैं।