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सरकार का दोहरा रवैया: आम आदमी को भवन निर्माण के लिए बजरी के लाले, सरकारी कार्य स्थलों पर लगे ढेर

Thu, 08 Feb 2024 08:39 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धौलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धौलपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 08 Feb 2024 08:39 PM IST
सार

इलाके में चल रहे जल जीवन मिशन सहित विभिन्न विभागों के निर्माण स्थल पर चंबल बजरी के ढेर लगे हुए हैं। जो सरकार के अवैध खनन को रोकने के प्रयासों को धक्का साबित हो रहे हैं।

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Dholpur Common man needs gravel for building construction piles at government work sites
सरकारी कार्य स्थलों पर लगे ढेर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धौलपुर में पिछले एक महीने से प्रदेश सरकार के निर्देश पर अवैध खनन को रोकने को लेकर पुलिस एवं प्रशासन की सख्ती से आम आदमी को मकान बनाने के लिए बजरी से लेकर खंडा-पत्थर आदि सामग्री का संकट पैदा हो गया है। हालत यह है कि लोगों को बड़ी मुश्किल से चोरी छिपे दोगुने दाम चुका कर बजरी एवं अन्य भवन सामग्री मंगानी पड़ रही है। ऊपर से कार्रवाई होने का जोखिम है वह अलग से लोगों को परेशान किए हुए है। ऐसे में इलाके में घर मकान एवं अन्य तरह के निर्माण कार्य बजरी संकट पैदा होने से बंद पड़े हुए हैं। दूसरी ओर इलाके में चल रहे विभिन्न सरकारी कार्यों में धड़ल्ले से अवैध और सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित चंबल बजरी का उपयोग किया जा रहा है।

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इलाके में चल रहे जल जीवन मिशन सहित विभिन्न विभागों के निर्माण स्थल पर चंबल बजरी के ढेर लगे हुए हैं। जो सरकार के अवैध खनन को रोकने के प्रयासों को धक्का साबित हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि आम आदमी को भवन एवं अन्य निर्माण के लिए आसानी से बजरी नहीं मिलने से निर्माण कार्य रुके पड़े हैं, जबकि सरकारी कार्यों के निर्माण स्थल पर बजरी के बड़े-बड़े स्टॉक पड़े हैं, जो सरकार और प्रशासन के द्वारा चलाए जा रहे अवैध खनन रोकने के प्रयासों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। 
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लोगों ने बताया कि पिछले एक महीने से ज्यादा समय से पूरे प्रदेश में अवैध खनन रोके जाने को लेकर प्रदेश की भजनलाल सरकार के द्वारा अभियान चला रखा है। अभियान के दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा की गई सख्ती के चलते चंबल बजरी का संकट खड़ा हो गया है। पूर्व में इलाके में चोरी छुपे अवैध चंबल बजरी का परिवहन होने की वजह से इलाके के लोगों को भवन एवं मकान निर्माण के लिए चंबल बजरी आसानी से और बहुतायत में बाजिव दर पर उपलब्ध हो रही थी, लेकिन पिछले एक महीने से राज्य सरकार के द्वारा की गई सख्ती के चलते बजरी की निकासी और परिवहन कार्य करीब-करीब बंद होने से इलाके में तमाम तरह के निर्माण कार्यों की गति धीमी पड़ गई है। स्थिति यह है कि लोगों को महंगे दामों पर चंबल बजरी खरीदनी पड़ रही है। उधर, अवैध चंबल बजरी को लेकर पुलिस प्रशासन एवं माइनिंग विभाग की तमाम सख्ती के बाद विभिन्न सरकारी कार्यों के निर्माण स्थल पर चंबल बजरी के ढेर पड़े हुए हैं। 
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पुराने स्टॉक में पार्वती नदी का मिट्टी मिला हुआ लाल रेत खफा रहे बजरी माफिया
चंबल से अवैध बजरी निकासी को लेकर पुलिस प्रशासन के द्वारा कढ़ाई किए जाने के बाद बजरी व्यापार में लगे लोग एवं माफिया बजरी का संकट होने के बाद लोकल नदी का मिट्टी मिला हुआ सेंड डाल रहे हैं। लोगों ने बताया कि बजरी खनन एवं परिवहन में संलिप्त लोगों ने पूर्व में चंबल बजरी के स्टॉक कर रखे हैं। ऐसे में खनन कार्य पर रोक लगने के दौरान इलाके की लोकल नदियों की मिट्टी मिली हुई बजरी मिक्स कर सप्लाई कर रहे हैं। बजरी की घटिया क्वॉलिटी की जानकारी जरूरतमंदों को तब पता चलती है, जब बजरी धंधे से जुड़े लोग ट्रॉली खाली कर रफू चक्कर हो जाते हैं। लोगों ने बताया कि बजरी की ट्राली खाली करने से पहले बजरी माफिया फोन पे और गूगल पे से ऑनलाइन पैसे डलवा लेते हैं। बाद में जरूरतमंद लोग बजरी की क्वॉलिटी देखकर माथा-पीटते रहते हैं।

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