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Dhinga Gavar Puja : सड़कों पर होता है महिलाओं का राज, जानिए क्यों कुंवारे बेंत से मार खाने के लिए रहते हैं बेताब

Wed, 20 Apr 2022 02:49 PM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: रोमा रागिनी Updated Wed, 20 Apr 2022 02:49 PM IST
सार

धींगा गवर पूजा के 16वें दिन सड़कों पर भारी भीड़ जुटती है। महिलाएं तरह-तरह का स्वांग रचाती है। पूजन की यह परंपरा 500 से अधिक साल पुरानी है। 

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Dhinga Gavar Puja in Jodhpur women beat bachelor youths with stick
धींगा गवर की अनोखी पूजा - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

राजस्थान अपने इतिहास, संस्कृति और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। इसके साथ ही यहां के त्योहार का अपना अलग ही रंग है। ऐसे ही जोधपुर में होने वाला धींग गवर पूजन खासा लोकप्रिय होता जा रहा है। पूजन की सबसे खास बात यह है कि पूजन के अंतिम दिन सड़कों पर महिलाओं का राज तो होता है ही, उनके हाथ में एक बेंत भी होती है। महिलाओं से मार खाने के लिए कुंवारे युवक मनुहार करते हैं। कहा जाता है कि धींगा गवर पूजा के दिन महिलाओं से बेंत से मार खाने से जल्दी शादी हो जाती है। 

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Dhinga Gavar Puja in Jodhpur women beat bachelor youths with stick
स्वांग रचाई महिलाएं - फोटो : Amar Ujala Digital
महिलाओं ने रचा स्वांग

जोधपुर की सड़कों पर मंगलवार की रात सिर्फ महिलाएं दिखीं। जिन्होंने तरह-तरह का स्वांग रचा रखा था। काली, पार्वती सहित महिलाओं ने अलग-अलग स्वांग रचाकर रखा था। पूजा के अवसर में शहर की सड़कों पर लाइट से आकर्षक सजावट की गई। वहीं पूरी सड़कों पर सजी-धजी महिलाएं नजर आईं। सड़कों पर कुछ कुंवारे युवक महिलाओं से बेंत से मार खाने के लिए मनुहार करते नजर आए। 

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500 साल से अधिक पुरानी है ये परंपरा

जोधपुर में धींगा गवर की परंपरा करीब 563 साल पुरानी है। इस परंपरा की शुरुआत राव जोधा राज परिवार से शुरू हुई थी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। कहा जाता है कि मां पार्वती ने सती होने के बाद दूसरा जन्म धींगा गवर के रूप में लिया था। इसलिए पार्वती के रूप में धींगा गवर की पूजा होती है। एक मान्यता ये भी है कि पुराने जमाने में भाभियां देवर को छड़ी से मारकर कुंवारा बताती थी। जिसके बाद अन्य भाभियां भी देवर को छड़ी से मारकर कहती थी कि अब इसकी जल्दी शादी हो जाएगी। 



 
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Dhinga Gavar Puja in Jodhpur women beat bachelor youths with stick
नृत्य करती महिलाएं - फोटो : Amar Ujala Digital
16 दिन तक होती है धींगा गवर की पूजा

धींगा गवर की 16 दिनों तक पूजा होती है। 16वें दिन पूरी रात महिलाएं घर से बाहर रहती हैं। महिलाएं पूजन के बाद बेंत लेकर बाहर निकलती हैं। इस दौरान जो पुरुष सामने आता है, उसे बेंत से मार पड़ती है। कहा जाता है कि जिस युवक की शादी नहीं हुई है, धींगा गवर के पूजन के बाद मार खाने के बाद शादी जल्दी हो जाती है। 

Dhinga Gavar Puja in Jodhpur women beat bachelor youths with stick
बेंत से मार खाने के लिए जुटी युवाओं की भीड़ - फोटो : Amar Ujala Digital
पूजा के हैं कठोर नियम

इस पूजा को करने के कठोर नियम होते हैं। पूजा करने वाली महिलाएं दिन में 12 घंटे निर्जला रहती हैं। नमक भी नहीं खाती। महिलाएं दिन में एक ही समय खाना खाती हैं। 15वें दिन वे कुंए और तालाब से पानी भरकर घर लाती हैं। पूजन करने वाली महिलाएं हाथ पर बंधे डोरे पर कुमकुम से 16 टीके लगाती हैं। पूजा करने के बाद डोरे कुमकुम से रंगे जाते हैं। उसके बाद आरती होती है। फिर कहानी सुनी जाती है। कहानी सुनने के बाद गवर माता को भोग लगाया जाता है। 


जोधपुर का धींगा गवर पूजा लोकप्रिय होता जा रहा है। अलग-अलग वेशभूषा में सजे महिलाओं को देखने के लिए न सिर्फ राजस्थान बल्कि देश के कोने-कोने से भी सैलानी जोधपुर पहुंचते हैं। 


 
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