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Dausa: अपहरण, मारपीट और चोरी की धाराओं में दर्ज हुआ था मामला, उधर कोतवाली पुलिस ने धारा-151 में की कार्रवाई

Thu, 21 Mar 2024 07:37 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 21 Mar 2024 07:37 PM IST
सार

दौसा जिले में अपहरण, मारपीट और चोरी की धाराओं में मामला दर्ज हुआ था। उधर, दौसा कोतवाली पुलिस ने धारा-151 के तहत कार्रवाई कर दी।

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Dausa Case was registered under sections of kidnapping assault and theft action taken under section 151
एसपी कार्यालय, दौसा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में बीजेपी ने सत्ता में आने से पहले जनता से अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने के वादे के साथ सत्ता में आई थी। अब जीरो टॉलरेंस पर काम करने का का दंभ तो भरती है, लेकिन जिन लोगों के कंधों पर कानून की पालना करने की जिम्मेदारी है। वे लोग ही राजस्थान सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की बखिया उधेड़ते नजर आने लगे हैं। हम बात कर रहे हैं राजस्थान पुलिस की, जहां दौसा कोतवाली पुलिस ने पता नहीं क्यों, लेकिन अपहरण और चोरी वाले मामले में राजीनामा तक करवा डाला।

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दौसा कोतवाली पुलिस पर आए दिन आरोप-प्रत्यारोप तो लगते ही आए हैं। लेकिन विगत 15 मार्च को लालसोट रोड बिजोरी पुलिया के पास से ट्रैक्टर चालक दीपक उर्फ शानू मीना के अपहरण के मामले में कोतवाली पुलिस ने मामला तो अपहरण मारपीट चोरी सहित कई धाराओं में मामला दर्ज हुआ था। लेकिन अपराधियों से मिलकर सांठ-गांठ करते हुए मामले को नया मोड देकर नए विवाद को जन्म दे दिया।
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क्या है मामला?
दरअसल, ट्रैक्टर चालक दीपक उर्फ शानू मीना के चाचा कृष्ण अवतार पुत्र रामजीलाल मीना निवासी चांवण्ड ने 15 तारीख को ही थाने पर रिपोर्ट पेश कर दी थी। इस पर 16 मार्च को सुबह 10 बजे प्रकरण संख्या 134/2024 धारा-143, 341, 323, 365 और 379 आईपीसी में दर्ज करते हुए जांच एएसआई हेतराम को सुपुर्द कर दी। सूत्रों से पता चला कि अपहरण के मामले में कोतवाली पुलिस द्वारा बिजोरी पुलिया के पास से दो बोलेरो जिनके नंबर RJ-29 UA-7900 एवं RJ-29 UA-5196 के साथ चार बिना नंबरों की मोटर साइकिलें जब्त करते हुए सात युवकों को कोतवाली में लाया गया था।
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इनमें सुभाष पुत्र शंभू दयाल शर्मा, विकास पुत्र रमेश चंद शर्मा निवासी डीडवाना लालसोट, विनोद कुमार पुत्र गोपाल लाल मीणा निवासी झूंपड़िया, विकास पुत्र प्रभु दयाल मीणा निवासी मलवास, लोकेश कुमार पुत्र श्रीनारायण मीणा निवासी रामसिंहपुरा, राजेंद्र मीणा पुत्र कालूराम मीणा निवासी चांदपुर राहुवास, सौरव कुमार पुत्र प्रहलाद नारायण मीणा निवासी गोपालपुरा को कोतवाल हीरालाल सैनी मय टीम के गिरफ्तार करके कोतवाली लेकर गई। साथ ही बनवारी उर्फ पायलट मीणा निवासी गोपालपुरा घटना के बाद अपने 30 से 40 साथियों के साथ फरार हो गया।

उधर, शहर में इस बात की भी चर्चा आम है। बताया तो यह भी जा रहा है कि पुलिस द्वारा जब्त की गई एक बोलेरो से तलवार बरामद हुई है। वहीं, घटना में शामिल गिरफ्तार युवकों में एक युवक राजस्थान पुलिस पाली जिले में एएसआई पद पर तैनात पुलिसकर्मी का बेटा था। दूसरा वर्तमान सरपंच का बेटा होने के चलते कोतवाली पुलिस ने राजस्थान पुलिस के स्लोगन आम जनता विश्वास अपराधियों में डर को उल्टा करके अपराधियों में विश्वास आमजन में भय वाली स्थिति साबित कर दी।

बताते चलें, 16 मार्च को जिले की पुलिस अधीक्षक रंजीता शर्मा सुबह 10:30 बजे से 12:30 बजे तक एसपी ऑफिस में क्राइम मीटिंग ले रही थी और शहर में बढ़ते हुए अपराधों पर रोकथाम के साथ लगाम के लिए जिले की पुलिस से उम्मीद लगाए निर्देश दे रही थी। उन्हीं के आदेशों को इस कान से सुनकर उस कान से निकाल कर अपहरण जैसी गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज होने के बाद भी परिवादी पक्ष के घायल चालक दीपक उर्फ शानू मीना को ट्रैक्टर का इंश्योरेंस नहीं होने व चालक का वैध लाइसेंस नहीं होने का दबाव बनाकर ट्रैक्टर चालक को 5000 दिलवाते हुए पूरे मामले को रफा-दफा करते हुए प्रकरण में राजीनामा करवा दिया गया। मामले में मजे की बात तो यह भी है कि पुलिस की करतूत उजागर न हो जाए, इसके लिए कवरेज करने के लिए गए मीडियाकर्मी को कोतवाली पुलिस के कांस्टेबल ब्रजराज सिंह, राजेश गुर्जर, एएसआई हेतराम, चालक हरिसिंह के द्वारा अभद्रता करते हुए जबरन मोबाइल छीनकर मोबाइल से फोटो-वीडियो डिलीट कर अपने साथ ले गए। 

पत्रकार के साथ पुलिस ने की अभद्रता
पत्रकार द्वारा पुलिस अधीक्षक रंजीता शर्मा को भी सूचना के आधार पर मोबाइल तो लौटा दिया, लेकिन मोबाइल कवर में रखे 2000 और आई कार्ड जो कि पुलिस कर्मियों ने निकाल लिए और लौटाए भी नहीं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या दौसा कोतवाली पुलिस अपराधियों से साठ-गाठ के चलते सरकार के बनाए गए नियमों से ऊपर जाकर अपहरण जैसे संगीन मामलों में पुलिस ऐसे कर पाई।

बताया तो यह भी जा रहा है कि इस प्रकरण में गिरफ्तार हुए अपराधी बिजोरी बाइपास के पास गांव गौशाला की खाली पड़ी जमीन में अपने 40-50 साथियों के साथ डीडवाना गांव लालसोट में किसी जमीन के कब्जे के लिए यहां बैठकर कोई खास प्लानिंग कर रहे थे। इसी बीच कुछ लोग बोलेरो में सवार होकर शहर की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान पुलिया के पास ट्रैक्टर से तेज गति में लहराती हुई बोलेरो टकरा गई, जिसको लेकर बातों ही बातों में अपहरण जैसी घटना को अंजाम दिया गया।


उधर, अब इस सारे मामले मे देखने वाली बात यह है कि राजस्थान पुलिस की संजीदा और तेज तर्रार माने जाने वाली दौसा ऑफिसर पुलिस की रंजीता शर्मा सहित रेंज के अधिकारियों को भी शायद इस घटना का अंदाजा न हो। लेकिन दौसा कोतवाली पुलिस ने एक बार फिर यह सिद्ध करने की कोशिश तो कर दी डाली कि पुलिस के किए को कोई मिटा नहीं सकता। लेकिन पुलिस वर्दी की एकड़ में चूर दौसा कोतवाली के वो जवान यह भूल गए कि पत्रकार का काम भी सच्चाई उजागर करना होता है।

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