{"_id":"6ac25da985ff78252f0daaf9","slug":"70-year-old-grandmother-becomes-an-examinee-for-the-first-time-says-now-i-will-write-my-own-name-dausa-creates-history-in-the-ullas-exam-dausa-news-c-1-1-noi1437-4797458-2026-10-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"70 साल की दादी ने पहली बार पकड़ी कलम: अंगूठे की जगह लिखेंगी अपना नाम; दौसा बना प्रदेश में अव्वल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
70 साल की दादी ने पहली बार पकड़ी कलम: अंगूठे की जगह लिखेंगी अपना नाम; दौसा बना प्रदेश में अव्वल
Sun, 04 Oct 2026 08:35 PM IST
दौसा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
Published by: दौसा ब्यूरो
Updated Sun, 04 Oct 2026 08:35 PM IST
सार
दौसा में उल्लास-नव भारत साक्षरता अभियान के तहत आयोजित परीक्षा में 35,118 नवसाक्षरों ने भाग लिया। जिले को 35 हजार नवसाक्षरों को परीक्षा में शामिल कराने का लक्ष्य दिया गया था, जिसे दौसा ने 118 अधिक परीक्षार्थियों के साथ हासिल किया। परीक्षा केंद्रों पर बुजुर्ग महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
विज्ञापन
दौसा सेंटर पर परीक्षा देती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रविवार को जब जिले में उल्लास-नव भारत साक्षरता अभियान के तहत परीक्षा हुई तो परीक्षा केंद्रों पर नजारा अलग ही था। बेंचों पर स्कूल के बच्चे नहीं, बल्कि 60 से 70 साल की दादियां बैठी थीं। हाथ कांप रहे थे, लेकिन आंखों में अपना नाम लिखने का जज्बा था। कई बुजुर्ग महिलाओं ने पहली बार परीक्षा में बैठकर पढ़ने-लिखने की अपनी इच्छा को पूरा किया।
70 साल की रामप्यारी ने पहली बार पकड़ी कलम
पांचोली परीक्षा केंद्र पर 70 साल की रामप्यारी देवी पहली बार परीक्षार्थी बनीं। पर्चा हाथ में लेते ही उन्होंने कहा कि आज तक अंगूठा लगाती थीं, लेकिन आज पहली बार कलम पकड़ी है। अब वह खुद अपना नाम और अपने पोते का नाम भी लिखेंगी। रामप्यारी जैसी कई महिलाओं के लिए यह परीक्षा सिर्फ पढ़ाई का हिस्सा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम रही।
लक्ष्य से आगे निकला दौसा
जिला साक्षरता विभाग को 35,000 नवसाक्षरों को परीक्षा में शामिल कराने का लक्ष्य दिया गया था। दौसा ने 35,118 नवसाक्षरों को परीक्षा दिलाकर लक्ष्य से 118 अधिक की भागीदारी दर्ज की। विभाग के अनुसार, इस उपलब्धि ने जिले को प्रदेश में अव्वल स्थान दिलाया है।
विज्ञापन
राज्य स्तरीय दल ने कई केंद्रों का किया निरीक्षण
परीक्षा के पारदर्शी आयोजन के लिए निदेशालय साक्षरता एवं सतत शिक्षा के कार्यक्रम अधिकारी आशीष गोस्वामी और जिला साक्षरता अधिकारी हरिओम गुर्जर ने पांचोली, टुडियाना, पीपलखेड़ा और समलेटी सहित कई केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बैठने की व्यवस्था, प्रश्न-पत्र वितरण और गोपनीयता की जांच की गई। केंद्रों पर बुजुर्गों और महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया।
'यह आंकड़ा नहीं, सामाजिक बदलाव है'
जिला साक्षरता अधिकारी हरिओम गुर्जर ने कहा कि 35,118 नवसाक्षरों का परीक्षा में बैठना सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव है। यह टीम के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है। उन्होंने बताया कि इस सफलता में प्रशासनिक अधिकारियों, ब्लॉक समन्वयकों, संस्था प्रधानों और स्वयंसेवी शिक्षकों की बड़ी भूमिका रही। अब जिले को पूर्ण साक्षरता की ओर ले जाने का अभियान जारी रहेगा।
विज्ञापन
70 साल की रामप्यारी ने पहली बार पकड़ी कलम
पांचोली परीक्षा केंद्र पर 70 साल की रामप्यारी देवी पहली बार परीक्षार्थी बनीं। पर्चा हाथ में लेते ही उन्होंने कहा कि आज तक अंगूठा लगाती थीं, लेकिन आज पहली बार कलम पकड़ी है। अब वह खुद अपना नाम और अपने पोते का नाम भी लिखेंगी। रामप्यारी जैसी कई महिलाओं के लिए यह परीक्षा सिर्फ पढ़ाई का हिस्सा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम रही।
विज्ञापन
लक्ष्य से आगे निकला दौसा
जिला साक्षरता विभाग को 35,000 नवसाक्षरों को परीक्षा में शामिल कराने का लक्ष्य दिया गया था। दौसा ने 35,118 नवसाक्षरों को परीक्षा दिलाकर लक्ष्य से 118 अधिक की भागीदारी दर्ज की। विभाग के अनुसार, इस उपलब्धि ने जिले को प्रदेश में अव्वल स्थान दिलाया है।
विज्ञापन
राज्य स्तरीय दल ने कई केंद्रों का किया निरीक्षण
परीक्षा के पारदर्शी आयोजन के लिए निदेशालय साक्षरता एवं सतत शिक्षा के कार्यक्रम अधिकारी आशीष गोस्वामी और जिला साक्षरता अधिकारी हरिओम गुर्जर ने पांचोली, टुडियाना, पीपलखेड़ा और समलेटी सहित कई केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बैठने की व्यवस्था, प्रश्न-पत्र वितरण और गोपनीयता की जांच की गई। केंद्रों पर बुजुर्गों और महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया।
'यह आंकड़ा नहीं, सामाजिक बदलाव है'
जिला साक्षरता अधिकारी हरिओम गुर्जर ने कहा कि 35,118 नवसाक्षरों का परीक्षा में बैठना सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव है। यह टीम के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है। उन्होंने बताया कि इस सफलता में प्रशासनिक अधिकारियों, ब्लॉक समन्वयकों, संस्था प्रधानों और स्वयंसेवी शिक्षकों की बड़ी भूमिका रही। अब जिले को पूर्ण साक्षरता की ओर ले जाने का अभियान जारी रहेगा।