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Hindi News ›   Rajasthan ›   Decision on Ajmer Dargah bomb blast case today;

अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट केस में फैसला आज, छावनी में तब्दील हुआ कोर्ट

Wed, 08 Mar 2017 12:56 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर  Updated Wed, 08 Mar 2017 12:56 PM IST
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Decision on Ajmer Dargah bomb blast case today;
अजमेर ब्लास्ट फाइल
अजमेर स्थित दरगाह में एनआईए मामलों की विशेष अदालत सीबीआई के विशेष न्यायाधीश दिनेश गुप्ता अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर में आहता— ए— नूर पेड़ के पास 11 अक्टूबर 2007 को हुए बम विस्फोट मामले का फैसला बुधवार को सुनाएंगे। यह फैसला लंच के बाद आने की संभावना है।
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इससे पहले एनआईए की टीम बम ब्लास्ट के आरोपी स्वामी असीमानंद व अन्य आरोपियों को लेकर कोर्ट पहुंची। जहां भारी पुलिस बल को तैनात किया गया। इससे कोर्ट परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
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अदालत 25 फरवरी को इस मामले में फैसला सुनाने वाली थी। मगर, दस्तावेजों और बयानों को पढ़ने और फैसला लंबा होने के कारण लिखने में समय लगने की वजह से अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 8 मार्च की तारीख तय की थी।11 अक्टूबर 2007 को दरगाह परिसर में हुए बम विस्फोट में तीन जायरीन मारे गए थे और पंद्रह जायरीन घायल हो गए थे। विस्फोट के बाद पुलिस को तलाशी के दौरान एक लावारिस बैग मिला थाए जिसमे टाइमर डिवाइस लगा जिंदा बम रखा था।
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एनआईए ने तेरह आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। इनमें से आठ आरोपी साल 2010 से न्यायिक हिरासत में बंद हैं। न्यायिक हिरासत में बंद आठ आरोपी स्वामी असीमानंद,हर्षद सोलंकी, मुकेश वासाणी, लोकेश शर्मा, भावेश पटेल, मेहुल कुमार,भरत भाई, देवेन्द्र गुप्ता हैं। एक आरोपी चन्द्र शेखर लेवे जमानत पर है।

मामले में एक आरोपी सुनील जोशी की हत्या हो चुकी है और तीन आरोपी संदीप डांगे, रामजी कलसांगरा और सुरेश नायर फरार चल रहा है। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 149 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए, लेकिन अदालत में गवाही के दौरान कई गवाह अपने बयान से मुकर गए। राज्य सरकार ने मई 2010 में मामले की जांच राजस्थान पुलिस की एटीएस शाखा को सौंपी थी। बाद में एक अप्रैल 2011 को भारत सरकार ने मामले की जांच एनआईए को सौप दी थी।


 
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