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Rajasthan: दलित छात्र की मौत से कांग्रेस विधायक पानाचंद मेघवाल आहत, सीएम गहलोत को भेजा इस्तीफा
Mon, 15 Aug 2022 04:08 PM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजस्थान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजस्थान
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Mon, 15 Aug 2022 04:08 PM IST
सार
पानाचंद मेघवाल ने इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भेजे पत्र में लिखा कि कई बार विधानसभा में मेरे द्वारा दलित और वंचित वर्ग के लिए सवाल उठाए गए लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है।
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कांग्रेस विधायक पानाचंद मेघवाल ने दिया इस्तीफा
- फोटो : social media
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विस्तार
बारां अटरू से कांग्रेस के विधायक पानाचंद मेघवाल ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। विधायक ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिए इस्तीफे में जालोर में अध्यापक द्वारा दलित छात्र की पिटाई से हुई मौत से खुद को आहत बताया है। जिस दलित और वंचित वर्ग के लिए बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने संविधान में समानता का अधिकार का प्रावधान किया था आज उसकी रक्षा करने वाला कोई नहीं है।
पत्र में ऐसा लिखकर पानाचंद मेघवाल ने कांग्रेस सरकार को विवादो के घेरे में खड़ा किया है। पानाचंद ने दिए इस्तीफे में लिखा कि पार्टी की जिस विचार धारा के साथ जुट कर काम किया उसी से मेरे समाज के लोग दुखी और बेबस है। आजादी के 75 साल भी एक बच्चे को मटका छूने पर अध्यापक द्वारा पीट पीट कर मार दिया जाता है, तो कहीं घोड़ी चढ़ने पर दुत्कारा जाता है। न्याय के नाम पर फाइलों को इधर से उधर कर दिया जाता है और बाद में अंत में एफआर तक लगा दी जाती है।
पत्र में यह भी लिखा
पानाचंद मेघवाल ने इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भेजे पत्र में लिखा कि कई बार विधानसभा में मेरे द्वारा दलित और वंचित वर्ग के लिए सवाल उठाए गए लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है। आज भी छुआछूत समाज में इस कदर हावी है कि दलित वर्ग को लगता है उसने इस समाज में पैदा होकर ही गलती कर दी है। अगर हम इतना सब देखने के बाद भी हमारे दलित और वंचित वर्ग के लिए कुछ नही कर पाते तो हमें पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है।
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पत्र में ऐसा लिखकर पानाचंद मेघवाल ने कांग्रेस सरकार को विवादो के घेरे में खड़ा किया है। पानाचंद ने दिए इस्तीफे में लिखा कि पार्टी की जिस विचार धारा के साथ जुट कर काम किया उसी से मेरे समाज के लोग दुखी और बेबस है। आजादी के 75 साल भी एक बच्चे को मटका छूने पर अध्यापक द्वारा पीट पीट कर मार दिया जाता है, तो कहीं घोड़ी चढ़ने पर दुत्कारा जाता है। न्याय के नाम पर फाइलों को इधर से उधर कर दिया जाता है और बाद में अंत में एफआर तक लगा दी जाती है।
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पत्र में यह भी लिखा
पानाचंद मेघवाल ने इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भेजे पत्र में लिखा कि कई बार विधानसभा में मेरे द्वारा दलित और वंचित वर्ग के लिए सवाल उठाए गए लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है। आज भी छुआछूत समाज में इस कदर हावी है कि दलित वर्ग को लगता है उसने इस समाज में पैदा होकर ही गलती कर दी है। अगर हम इतना सब देखने के बाद भी हमारे दलित और वंचित वर्ग के लिए कुछ नही कर पाते तो हमें पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है।
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