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Churu News: फर्जी आरोप में दो महीने जेल में रहा नेत्रहीन दिव्यांग, रिहाई के बाद गांव में हुआ भव्य स्वागत

Thu, 17 Jul 2025 03:21 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चुरू Published by: प्रिया वर्मा Updated Thu, 17 Jul 2025 03:21 PM IST
सार

सादुलपुर में तारानगर थाना क्षेत्र के झोथड़ा गांव में मारपीट और अपहरण की घटना के मामले में फर्जी रूप से आरोपी बनाकर पेश किए गए नेत्रहीन दिव्यांग की दो महीने बाद जेल से रिहाई हुई।

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Churu News: Visually-Impaired Man Jailed for Two Months on False Charges Receives Grand Welcome After Release
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिना किसी अपराध के दो महीने से जेल में बंद नेत्रहीन दिव्यांग अमीचंद जब रिहा होकर अपने गांव भीमसाना लौटे, तो गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। न्यायालय से रिहाई का आदेश जैसे ही शाम 4 बजे तारानगर जेल पहुंचा, परिवारजन और ग्रामीणों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

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जेल से बाहर आते ही अमीचंद का फूलमालाओं और डीजे साउंड के साथ जोरदार स्वागत किया गया। गांव तक पूरे रास्ते डीजे बजता रहा और लोग नाचते-गाते अमीचंद को घर लेकर पहुंचे। इस मौके पर क्षेत्रवासियों ने भी इस अन्याय के विरुद्ध अपनी एकजुटता का परिचय दिया।
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इस मामले में एडवोकेट हरदीप सुंदरिया ने अमीचंद की ओर से नि:शुल्क पैरवी कर इंसानियत की मिसाल कायम की। कोर्ट ट्रायल शुरू होने से पहले ही उन्होंने यह साबित कर दिया कि अमीचंद निर्दोष हैं। 14 मार्च को तारानगर थाना क्षेत्र के झोथड़ा गांव में मारपीट और अपहरण की एक घटना हुई थी। इस संबंध में पुलिस ने मामला दर्ज किया था, जिसमें कुल पांच आरोपी शामिल थे। वीडियो साक्ष्यों के आधार पर घटना में शामिल एक आरोपी भीमसाना निवासी पवन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था लेकिन आरोप है कि आरोपी पवन ने जांच अधिकारी धर्मेंद्र मीणा से मिलीभगत कर षड्यंत्रपूर्वक अपने ही गांव के नेत्रहीन दिव्यांग अमीचंद को फर्जी रूप से आरोपी बनाकर पेश करवा दिया। बिना उचित जांच के चार्जशीट अमीचंद के खिलाफ दाखिल कर दी गई और उन्हें जेल भेज दिया गया, जबकि असली आरोपी खुलेआम घूमता रहा।

इतना ही नहीं पवन अमीचंद के परिजनों को यह कहकर गुमराह करता रहा कि अमीचंद जम्मू ट्रांसपोर्ट ऑफिस के किसी कार्य से गया हुआ है। परिजनों को इस साजिश की भनक तक नहीं लगी। अब दिव्यांग अमीचंद की रिहाई से जहां एक ओर परिवार को राहत मिली है, वहीं यह मामला न्यायिक व्यवस्था और पुलिस जांच की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब क्षेत्र में मांग उठ रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और असली दोषियों को दंडित किया जाए।

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