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Chittorgarh News: गढ़बोर चारभुजा के लिए पदयात्री रवाना, परम्परागत ड्रेस कोड के 30 साल से जारी परंपरा
Sun, 09 Mar 2025 05:05 PM IST
चित्तौड़गढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़
Published by: चित्तौड़गढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 09 Mar 2025 05:05 PM IST
सार
पहले पड़ाव झांतलामाताजी तक यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं पर फूलों की वर्षा की गई और जगह-जगह स्वागत किया गया। इस पदयात्रा में 85 वर्षीय उद्धवदास रोगानी और 65 वर्षीय भगवती प्रसाद शर्मा सहित कई श्रद्धालु नियमित रूप से भाग ले रहे हैं।
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चित्तौड़गढ़ से गढ़बोर चारभुजाजी के लिए रवाना हुए पदयात्री।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चित्तौड़गढ़ सत्संग मंडल की अनवरत 30 साल से चल रही परंपरा अनुसार शहर से इस बार भी राजसमंद जिले में स्थित गढ़बोर श्री चारभुजाजी पैदल यात्रा रविवार को रवाना हुई। पदयात्रियों का स्वागत कर शहरवासियों ने रवाना किया। शहर में विभिन्न मार्गों पर पदयात्रियों का स्वागत हुआ।
जानकारी के अनुसार लगातार 30वें साल में यह पदयात्रा निकाली गई है। शहर के मध्य में स्थित गांधी चौक से यात्रा के पहले पड़ाव झांतलामाताजी तक करीब 10 किमी के रास्ते में 20 से अधिक जगह पदयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत हुआ। इस पदयात्रा की शुरुआत नंदलाल ईनाणी, उद्धव दास रोगानी और दुर्गाशंकर शर्मा दुर्ग वालों ने 1995 से बाराबंकी हार्डिया कोल जंगल के संत स्वामी रामदास महाराज की प्रेरणा से शुरू की, जो अनवरत जारी है। पदयात्री सहित अन्य श्रद्वालु गांधी चौक में एकत्रित हुए। यहां सभी ने मुरलीधर मंदिर में सामूहिक दर्शन के साथ भजन गाते हुए ठाकुरजी को रिझाया। मंदिर के बाहर संक्षिप्त समारोह में पूर्व नगर परिषद चेयरमैन महेश ईनाणी, पार्षद हरीश ईनाणी, पूर्व पार्षद कन्हैयालाल वैष्णव, विदेश जीनगर, हिन्दू संगठन से जुड़े श्रवण सोनी सहित कई लोगों ने पदयात्रियों का अभिनंदन किया।
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कैप्टन सुरेश ईनाणी ने पैदल यात्रा का संचालन करते हुए यात्रा शेड्यूल व रूट आदि की जानकारी दी। सत्संग व्यवस्थापक 85 वर्षीय उद्धवदास रोगानी व 65 वर्षीय भगवती प्रसाद शर्मा दुर्ग सहित कई श्रद्वालु लगातार 30 वें साल पदयात्रा में शामिल हुए। गांधी चौक से रवानगी के साथ ही पदयात्रा के स्वागत का सिलसिला शुरू हो गया। पदयात्री सेना से रिटायर कैप्टन व मार्बल उघमी सुरेश ईनाणी ने बताया कि पदयात्री चाहे किसी उम्र का या पेशे से जुड़ा हो सफेद कुर्ता, धोती के साथ सिर पर एक रंग की पगड़ी और गले का दुपट्टा ओढ़े रहना पूरी यात्रा में इनका यही ड्रेस कोड रहता है। यात्रा का पहला पड़ाव कपासन मार्ग स्थित झांतला माताजी तक चलता रहा। करीब 20 से अधिक जगह लोगों व विविध संगठनों ने जत्थे को रोक कर स्वागत किया। इससे बाजार में फूलों की चादर बिछ गई। पदयात्री व साथ चल रहे श्रद्वालु भजनों के साथ जयकार लगाते हुए चल रहे थे। पदयात्रा में बड़ी संख्या में परिजन व अन्य लोग झांतलामाताजी तक विदा करने गए। यहां भोजन व विश्राम के बाद यात्रा दोपहर तीन बजे आगे के लिए रवाना हुई।
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जानकारी के अनुसार लगातार 30वें साल में यह पदयात्रा निकाली गई है। शहर के मध्य में स्थित गांधी चौक से यात्रा के पहले पड़ाव झांतलामाताजी तक करीब 10 किमी के रास्ते में 20 से अधिक जगह पदयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत हुआ। इस पदयात्रा की शुरुआत नंदलाल ईनाणी, उद्धव दास रोगानी और दुर्गाशंकर शर्मा दुर्ग वालों ने 1995 से बाराबंकी हार्डिया कोल जंगल के संत स्वामी रामदास महाराज की प्रेरणा से शुरू की, जो अनवरत जारी है। पदयात्री सहित अन्य श्रद्वालु गांधी चौक में एकत्रित हुए। यहां सभी ने मुरलीधर मंदिर में सामूहिक दर्शन के साथ भजन गाते हुए ठाकुरजी को रिझाया। मंदिर के बाहर संक्षिप्त समारोह में पूर्व नगर परिषद चेयरमैन महेश ईनाणी, पार्षद हरीश ईनाणी, पूर्व पार्षद कन्हैयालाल वैष्णव, विदेश जीनगर, हिन्दू संगठन से जुड़े श्रवण सोनी सहित कई लोगों ने पदयात्रियों का अभिनंदन किया।
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कैप्टन सुरेश ईनाणी ने पैदल यात्रा का संचालन करते हुए यात्रा शेड्यूल व रूट आदि की जानकारी दी। सत्संग व्यवस्थापक 85 वर्षीय उद्धवदास रोगानी व 65 वर्षीय भगवती प्रसाद शर्मा दुर्ग सहित कई श्रद्वालु लगातार 30 वें साल पदयात्रा में शामिल हुए। गांधी चौक से रवानगी के साथ ही पदयात्रा के स्वागत का सिलसिला शुरू हो गया। पदयात्री सेना से रिटायर कैप्टन व मार्बल उघमी सुरेश ईनाणी ने बताया कि पदयात्री चाहे किसी उम्र का या पेशे से जुड़ा हो सफेद कुर्ता, धोती के साथ सिर पर एक रंग की पगड़ी और गले का दुपट्टा ओढ़े रहना पूरी यात्रा में इनका यही ड्रेस कोड रहता है। यात्रा का पहला पड़ाव कपासन मार्ग स्थित झांतला माताजी तक चलता रहा। करीब 20 से अधिक जगह लोगों व विविध संगठनों ने जत्थे को रोक कर स्वागत किया। इससे बाजार में फूलों की चादर बिछ गई। पदयात्री व साथ चल रहे श्रद्वालु भजनों के साथ जयकार लगाते हुए चल रहे थे। पदयात्रा में बड़ी संख्या में परिजन व अन्य लोग झांतलामाताजी तक विदा करने गए। यहां भोजन व विश्राम के बाद यात्रा दोपहर तीन बजे आगे के लिए रवाना हुई।