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Bundi News: अनाथ शावक की जंगल में वापसी, 22 माह की तैयारी के बाद छोड़ा गया RVT-07, वन विभाग की बड़ी सफलता
Wed, 24 Jun 2026 04:26 PM IST
बूँदी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी
Published by: बूँदी ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 04:26 PM IST
सार
करीब दो माह की उम्र में अनाथ हुए बाघ शावक RVT-07 ने अब जंगल में नई जिंदगी की शुरुआत कर दी है। डेढ़ साल की रीवाइल्डिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया है।
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रामगढ़ में आजाद हुआ बाघ RVT-07
विस्तार
राजस्थान के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में पुनर्वासित नर बाघ RVT-07 को विशेष रीवाइल्डिंग एनक्लोजर से प्राकृतिक आवास में मुक्त कर दिया गया है। इसे राज्य में किसी अनाथ बाघ शावक के वैज्ञानिक पुनर्वास का पहला सफल प्रयास माना जा रहा है। वन विभाग की इस उपलब्धि को देशभर के वन्यजीव विशेषज्ञ एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रहे हैं।
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RVT-07 रणथम्भौर की बाघिन T-114 का शावक है, जो करीब दो से तीन माह की उम्र में अनाथ हो गया था। इसके बाद वन विभाग ने उसे रेस्क्यू कर कोटा के अभेड़ा जैविक उद्यान में सुरक्षित रखा। यहां लगभग 22 माह तक उसकी विशेष देखभाल की गई और जंगल में जीवित रहने के लिए जरूरी व्यवहार तथा शिकार की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। बाघ को पूरी तरह प्राकृतिक जीवन के लिए तैयार करने के उद्देश्य से 5 दिसंबर 2024 को उसे रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के जैतपुर स्थित पांच हैक्टेयर क्षेत्रफल वाले विशेष रीवाइल्डिंग एनक्लोजर में स्थानांतरित किया गया। यहां उसे चीतल, सांभर, नीलगाय और जंगली सूअर जैसे प्राकृतिक शिकार उपलब्ध कराए गए, जिससे उसके शिकार कौशल का विकास हो सके।
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पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान विशेषज्ञों की टीम ने उसके स्वास्थ्य, व्यवहार और शिकार क्षमता पर लगातार निगरानी रखी। परीक्षणों में यह पाया गया कि बाघ पूरी तरह स्वस्थ है और जंगल में स्वतंत्र जीवन जीने के लिए तैयार है। इसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की अनुशंसा और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की स्वीकृति मिलने पर 7 जून को उसे GPS-VHF रेडियो कॉलर पहनाया गया।
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वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार एनक्लोजर के द्वार खोल दिए गए हैं और बाघ को प्राकृतिक क्षेत्र में आने-जाने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। शुरुआती दिनों में उसने दो बार एनक्लोजर से बाहर निकलने का प्रयास किया और कुछ समय तक बाहर भी रहा लेकिन बाद में स्वयं वापस लौट आया। वर्तमान में भी उसके लिए द्वार खुले हुए हैं और वह अपनी प्राकृतिक प्रवृत्ति के अनुसार किसी भी समय बाहर जा सकता है।
बाघ की गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रखने के लिए रेडियो टेलीमेट्री, कैमरा ट्रैप और फील्ड मॉनिटरिंग की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके लिए समर्पित मॉनिटरिंग टीम और त्वरित प्रतिक्रिया दल भी तैनात किए गए हैं। रामगढ़ फाउंडेशन के अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह ने बताया कि RVT-07 का सफल पुनर्वास भविष्य में अनाथ बाघ शावकों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए पूरे देश में एक आदर्श मॉडल साबित हो सकता है। वन्यजीव संरक्षण की दिशा में यह उपलब्धि राजस्थान के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।