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Rajasthan Politics: दो नेताओं की दिल्ली दौड़ से 'भगवा बंगले' में बदलाव की सुगबुगाहट, चर्चा नए समीकरण की

Tue, 02 Aug 2022 07:42 AM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: रोमा रागिनी Updated Tue, 02 Aug 2022 07:42 AM IST
सार

राजस्थान भाजपा के दो बड़े नेताओं की दिल्ली दौड़ ने भगवा खेमे में बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। दोनों नेता प्रवास का बताकर दिल्ली आते-जाते रहे हैं।  

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BJP Organization General Secretary Chandrashekhar and Satish Poonia Delhi visit
सतीश पूनिया और चंद्रशेखर - फोटो : Social Media

विस्तार

जयपुर में सरदार पटेल मार्ग पर स्थित भाजपा दफ्तर में बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। संगठन के दो शीर्ष नेताओं की दिल्ली दौड़ ने इन अटकलों के बाजार को गरमाने में आग में पड़ते घी का काम किया है। कार्यकर्ताओं के साथ-साथ पार्टी के प्रदेश नेताओं में यह चर्चा शुरू हो गई है कि दोनों नेताओं में से किसकी दाल गलेगी, यह देखने का विषय होगा।  

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दरअसल, भाजपा के दो वरिष्ठ नेता दिल्ली के प्रवास पर है। बार-बार लग रहे चक्करों से अटकलों का बाजार गरमा गया है। एक तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया हैं और दूसरे हैं संगठन महामंत्री चंद्रशेखर। पार्टी के कार्यकर्ता कह रहे हैं कि बार-बार दिल्ली का दौरा लगने का मतलब है कि छुट्टी होने वाली है या महत्वपूर्ण जगह मिलने वाली है। राजस्थान के भगवा बंगले में दोनों 'भाई साहब' के गुपचुप लग रहे दिल्ली दौरों ने इन अटकलों को हवा दे दी है।  

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कहीं यह उत्तरप्रदेश की जुगाड़ तो नहीं

संगठन महामंत्री की बात करें तो उत्तरप्रदेश में महत्वपूर्ण पद पर बदलाव की सूचनाएं आ रही हैं। संगठन महामंत्री के दिल्ली दौरों को इन सूचनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इन दौरों को पूरी तरह से गोपनीय रखा जा रहा है। पूछने पर यही बताया जा रहा है कि राजस्थान में ही प्रवास पर हैं, पर हकीकत किसी से छिपी नहीं है। 

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राष्ट्रीय अध्यक्ष की दो टूक से तेज हुई धड़कनें

वहीं, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया की बात करें तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के उस बयान से विचलित नजर आ रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि किसी को तीन साल के लिए अध्यक्ष बनाते हैं तो वह छह साल की तैयारी में लग जाता है। पूनिया ने हाल ही में राजनीति में रिटायरमेंट की आयु तय करने की सलाह देकर आलाकमान पर भी सीधे-सीधे निशाना लगाया था। इसकी सफाई देना भी उनके दिल्ली दौरे की वजह हो सकता है। 


तीन साल में कोई बड़ा मुद्दा नहीं बना सके पूनिया

भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सतीश पूनिया की उपलब्धियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। तीन साल में पार्टी किसी भी मुद्दे को बड़ा बनाने में नाकाम रही है। प्रादेशिक स्तर पर कोई बड़ा आंदोलन भी खड़ा नहीं हुआ है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा आए थे तो बातें बड़ी-बड़ी की थी। 2,500 मोटर साइकिल आएंगी, 50 स्वागत द्वार लगेंगे और हजारों कार्यकर्ता भाग लेंगे। हकीकत से यह दावे कोसों दूर रहे। 


बदलाव के संकेत नजर आने लगे हैं 

राजस्थान भाजपा राज्य में पांच साल से सत्ता से बाहर है। 2023 को विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अगले ही साल पूरी पार्टी लोकसभा चुनावों के लिए सक्रिय हो जाएगी। 25 में से 25 सीटें दोबारा जीतना पार्टी के सामने एक बड़ी चुनौती होगी। इस वजह से ऐसे लोगों की तलाश भी शुरू हो गई है, जो पार्टी को इन दोनों ही चुनावों में जीत की ओर ले जाए।

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