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Rajasthan: BJP नेता तिवाड़ी कोर्ट से बरी, ACB ने भ्रष्टाचार केस में आरोपी बनाया तो दिया था इस्तीफा, जानें मामला

Fri, 14 Jul 2023 12:23 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा Published by: उदित दीक्षित Updated Fri, 14 Jul 2023 12:23 PM IST
सार

लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद मिली जीत पर डॉ रतन तिवाड़ी ने कहा कि मुझे राजनीतिक द्वेष के कारण फंसाने का प्रयास किया गया था। लेकिन, सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। मुझे न्यायपालिका पर भरोसा था और अंत में जीत सत्य की हुई है।

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BJP leader Dr. Ratan Tiwari acquitted by court ACB made accused in Ambosia Nursing College NOC case
भाजपा नेता और दौसा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ रतन तिवाड़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा नेता और दौसा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ रतन तिवाड़ी कोर्ट से भ्रष्टाचार के मामले में बरी हो गए हैं। एसीबी ने साल 2012 में एम्बोसिया नर्सिंग कॉलेज जगतपुरा की आरएनसी से एनओसी मामले में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का केस बनाकर गिरफ्तारी वारंट निकाला था। इसके बाद रतन तिवाड़ी को नैतिकता के आधार पर पद छोड़ना पड़ा। अब एसीबी की एफआर मंजूर होने पर वह निर्दोष साबित हो गए हैं। 

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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम संख्या- 1 जयपुर महानगर द्वितीय कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार ने एसीबी की ओर से साक्ष्यों के अभाव में पेश की गई एफआर को मंजूर करते हुए रतन तिवाड़ी के खिलाफ दोष साबित होना नहीं पाया है। क्योंकि, एसीबी और अभियोजन पक्ष पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सके। इससे नर्सिंग कॉलेज की एनओसी के मामले में रतन तिवाड़ी को बड़ी राहत मिली है। डॉ रतन तिवाड़ी ने  2020 में दौसा भाजपा जिला अध्यक्ष पद संभाला था, अगस्त 2022 में इस मामले में एसीबी का नोटिस मिलने और केस के चलते इस्तीफा देना पड़ा था।
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यह पूरा मामला वर्ष  2012 से शुरू हुआ, जब एम्ब्रोसिया कॉलेज ऑफ नर्सिंग के लिए आवेदन कर राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया था। जिसमें कॉलेज के लिए 2 वर्ष में सभी आवश्यक कार्रवाई पूरी कर इंडियन नर्सिंग कौंसिल और राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त करनी थी। 
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लेकिन, अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के 16 दिन बाद ही एसीबी ने सभी प्रक्रियाधीन कॉलेजों पर एक साथ छापा मारकर जांच शुरू कर दी। जिनमें करीब 50 कॉलेजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच में पाया गया कि सभी कॉलेजों की को 2 वर्ष का समय सरकार द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र में दिया गया था। 

जिसमें इन्हें कॉलेज शुरू करने से पहले सभी आवश्यक संबद्धता लेनी थी। लेकिन, केस दर्ज होने के कारण इन सभी ने आगे की प्रक्रिया नहीं अपनाई। मामला दर्ज होने के बाद एसीबी की जांच में सामने आया कि इन कॉलेजों में कभी कोई प्रवेश नहीं लिया गया। ना ही किसी भी प्रकार की कोई फीस ली गई और ना ही कॉलेज चालू किए गए। राज्य सरकार को किसी प्रकार की राजस्व हानि भी नहीं हुई और ना ही इनमें किसी प्रकार का भ्रष्टाचार हुआ। जिसके कारण एसीबी ने जांच करते हुए मामलों में एफआर लगा दी।


मुझे राजनीतिक द्वेषता के कारण फंसाने का प्रयास किया गया 
इस मामले की शुरुआती एफआईआर में डॉ.रतन तिवाड़ी को मुलजिम नहीं बनाया गया था। लेकिन, बाद में एसीबी ने डॉ. रतन तिवाड़ी का नाम शामिल कर जांच शुरू की। लेकिन, कोई सबूत नहीं मिलने के कारण एसीबी ने केस पर एफआर लगाकर न्यायालय में पेश किया, जिसे  मंजूर कर लिया गया। लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद मिली जीत पर डॉ रतन तिवाड़ी ने कहा कि मुझे राजनीतिक द्वेषता के कारण फंसाने का प्रयास किया गया था। लेकिन, सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। मुझे न्यायपालिका पर भरोसा था और अंत में सत्य की जीत हुई है।

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