{"_id":"62dd67b121d2db09970c7e8d","slug":"bjp-chief-jp-nadda-four-member-team-reached-jaipur-saint-demanded-a-cbi-inquiry","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rajasthan: भाजपा चीफ जेपी नड्डा की चार सदस्यीय टीम पहुंची राजस्थान, संतों ने की सीबीआई जांच कराने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rajasthan: भाजपा चीफ जेपी नड्डा की चार सदस्यीय टीम पहुंची राजस्थान, संतों ने की सीबीआई जांच कराने की मांग
Sun, 24 Jul 2022 09:09 PM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजस्थान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजस्थान
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Sun, 24 Jul 2022 09:09 PM IST
सार
संत विजय दास जी आत्मदाह मामले की जांच करने चार सदस्यीय टीम राजस्थान पहुंच गई है। सरकार से मिलीभगत से अवैध खनन होने का ग्रामीणों और संत समाज ने आरोप लगाए है।
विज्ञापन
संत विजय दास जी के आत्मदाह के बाद जेपी नड्डा की तरफ से गठित चार सदस्यीय टीम राजस्थान पहुंची
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अवैध खनन व संत विजय दास जी के आत्मदाह मामले में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से गठित चार सदस्यीय कमिटी रविवार को पासोपा गांव पहुंची। राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह की अगुवाई में सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद सत्यपाल सिंह और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं सांसद बृजलाल यादव ने उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी हैं।
भरतपुर जिले के पासोपा गांव में संतों और स्थानीय लोगों से कमेटी के सदस्यों ने मुलाकात की। उसके बाद आदिबद्री मंदिर पहुंचकर स्थानीय लोगों, संगठनों व संतों से चर्चा की। घटनास्थल का मौका मुआयना करते हुए कमेटी ने संतों से विस्तार पूर्वक चर्चा की। साथ ही पूरे प्रकरण को लेकर सभी तथ्य भी जुटाए। कमेटी ने खनन क्षेत्र का दौरा करते हुए आंदोलनकारियों से मुलाकात की। इस दौरान संतों एवं स्थानीय लोगों ने नेताओं और अधिकारियों पर अवैध खनन कराने का आरोप लगाया है। जिसका विरोध लंबे समय से विजय दास करते हुए आ रहे थे। इसके अलावा कमेटी ने पुलिस-प्रशासन के अफसरों से तथ्यात्मक जानकारी ली।
अरुण सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ब्रज क्षेत्र के तीर्थ स्थल व पहाड़ों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थली, आदिबद्री और कनकांचल पहाड़ों को बचाने के लिए साधु-संतों को 551 दिन आंदोलन करना पड़ा। संतों को पूरा विश्वास है कि माफियाओं का पूरा जाल फेलने के साथ-साथ प्रदेश सरकार का संरक्षण उनके ऊपर है। उन्होंने कहा कि कनकांचल और आदिबद्री पर्वत बचेगा नहीं, इसी को लेकर बाबा हरि बोल दास ने पिंडदान किया। साथ ही दूसरे संत बाबा नारायण दास टावर पर चढ़े। संतों का मानना था कि सद्बुद्धि सरकार को आ जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। क्योंकि सरकार, अफसर और मंत्री सभी मिले हुए हैं। इन सबसे परेशान होकर संत विजय दास ने आत्मदाह किया। उन्होंने का कि गहलोत सरकार एक-एक व्यक्ति को डराने और धमकाने का काम कर रही हैं।
विज्ञापन
अरुण सिंह ने कहा कि इस घटनाक्रम से केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के संत समाज में रोष व्याप्त है। वहीं, संत समाज का कहना है कि अवैध खनन से पूरा प्रकरण जुड़ा होने की वजह से राज्य सरकार जांच को प्रभावित कर सकती है। संत समाज ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की हैं। अरुण सिंह का कहना है कि आत्मदाह प्रकरण के बाद से ही राजस्थान पुलिस ग्रामीणों को धमका रही है। चुप्पी साधने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार संतों व लोगों को धमका रहे हैं। लेकिन जनता मुखर होकर न्याय के लिए आवाज उठा रही है। स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने बताया कि यदि समय रहते राजस्थान सरकार ध्यान देती तो संत विजय दास जी आज हमारे बीच होते।
विज्ञापन
भरतपुर जिले के पासोपा गांव में संतों और स्थानीय लोगों से कमेटी के सदस्यों ने मुलाकात की। उसके बाद आदिबद्री मंदिर पहुंचकर स्थानीय लोगों, संगठनों व संतों से चर्चा की। घटनास्थल का मौका मुआयना करते हुए कमेटी ने संतों से विस्तार पूर्वक चर्चा की। साथ ही पूरे प्रकरण को लेकर सभी तथ्य भी जुटाए। कमेटी ने खनन क्षेत्र का दौरा करते हुए आंदोलनकारियों से मुलाकात की। इस दौरान संतों एवं स्थानीय लोगों ने नेताओं और अधिकारियों पर अवैध खनन कराने का आरोप लगाया है। जिसका विरोध लंबे समय से विजय दास करते हुए आ रहे थे। इसके अलावा कमेटी ने पुलिस-प्रशासन के अफसरों से तथ्यात्मक जानकारी ली।
विज्ञापन
अरुण सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ब्रज क्षेत्र के तीर्थ स्थल व पहाड़ों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थली, आदिबद्री और कनकांचल पहाड़ों को बचाने के लिए साधु-संतों को 551 दिन आंदोलन करना पड़ा। संतों को पूरा विश्वास है कि माफियाओं का पूरा जाल फेलने के साथ-साथ प्रदेश सरकार का संरक्षण उनके ऊपर है। उन्होंने कहा कि कनकांचल और आदिबद्री पर्वत बचेगा नहीं, इसी को लेकर बाबा हरि बोल दास ने पिंडदान किया। साथ ही दूसरे संत बाबा नारायण दास टावर पर चढ़े। संतों का मानना था कि सद्बुद्धि सरकार को आ जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। क्योंकि सरकार, अफसर और मंत्री सभी मिले हुए हैं। इन सबसे परेशान होकर संत विजय दास ने आत्मदाह किया। उन्होंने का कि गहलोत सरकार एक-एक व्यक्ति को डराने और धमकाने का काम कर रही हैं।
विज्ञापन
अरुण सिंह ने कहा कि इस घटनाक्रम से केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के संत समाज में रोष व्याप्त है। वहीं, संत समाज का कहना है कि अवैध खनन से पूरा प्रकरण जुड़ा होने की वजह से राज्य सरकार जांच को प्रभावित कर सकती है। संत समाज ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की हैं। अरुण सिंह का कहना है कि आत्मदाह प्रकरण के बाद से ही राजस्थान पुलिस ग्रामीणों को धमका रही है। चुप्पी साधने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार संतों व लोगों को धमका रहे हैं। लेकिन जनता मुखर होकर न्याय के लिए आवाज उठा रही है। स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने बताया कि यदि समय रहते राजस्थान सरकार ध्यान देती तो संत विजय दास जी आज हमारे बीच होते।