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Bikaner News : विभागीय लालफीताशाही की भेंट चढ़ी करोड़ों रुपयों की चीनी, अब भी नहीं हो पा रहा निस्तारण
Wed, 11 Sep 2024 06:58 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Wed, 11 Sep 2024 06:58 PM IST
सार
जिले में अंत्योदय परिवारों को बांटी जाने वाली करोड़ों रुपयों की चीनी गोदामों में पड़ी-पड़ी सड़ रही है। दरअसल 2017 तक बीपीएल अंत्योदय योजना के तहत बीपीएल परिवार के प्रत्येक सदस्य को आधा किलो चीनी वितरित की जाती थी लेकिन इसके बाद सरकार ने आदेश पारित कर इसे केवल अंत्योदय परिवार को दिए जाने तक सीमित कर दिया और इसके बाद स्टॉक सरकारी गोदामों में जमा होता चला गया।
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राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सरकार और विभागीय अनदेखी के चलते गरीबों को वितरित की जाने वाली करोड़ों रुपये की चीनी गोदामों में पड़ी सड़ रही है। सूबे के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के गृह जिले बीकानेर के बीकानेर, कोलायत, लूणकरणसर, नापासर, खाजूवाला, नोखा के गोदामों में पड़ी 613 क्विंटल चीनी खराब हो चुकी है। सरकारी गोदामों में निस्तारण का इंतजार करती इस चीनी की कीमत 24.52 लाख रुपये है, वहीं प्रदेश के गोदामों में पड़ी इस चीनी की कीमत 5.56 करोड़ रुपये है।
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दरअसल 2017 के बाद राजस्थान सरकार द्वारा बीपीएल अंत्योदय योजना के तहत बीपीएल परिवार को प्रति सदस्य को आधा किलो चीनी वितरित की जाती थी लेकिन वर्ष 2017 के बाद एक आदेश निकालकर यह चीनी केवल अंत्योदय परिवार को देने के आदेश जारी कर दिए गए थे। आदेश जारी होने के बाद कोविड के दो साल के बाद से सरकारी गोदामों में स्टॉक जमा होता चला गया और उचित रखरखाव और विभागीय अनदेखी के चलते गोदामों में पड़ी यह चीनी सड़ चुकी है।
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जिला क्रय-विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड के जिला रसद अधिकारी को बार-बार इस चीनी के निस्तारण के लिए पत्र लिखने के बाद जिला रसद विभाग ने इस मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग को आदेश जारी कर इस चीनी की जांच करवाने के आदेश दिए थे, जिसके बाद चीनी के सैंपल लेकर उसकी जांच करवाई गई वह सब स्टैंडर्ड निकली, यानी चीनी खाने योग्य नहीं रही। स्वास्थ्य विभाग ने जांच रिपोर्ट रसद विभाग को भेज दी है। आगे की कार्रवाई संबंधित विभाग द्वारा की जानी है।
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इस संबंध में जब जिला रसद अधिकारी से बातचीत करने की कोशिश की गई तो उन्होंने इस मामले को लेकर कुछ भी कहने से मना कर दिया। बहरहाल सरकारी गोदामों में पड़ी यह चीनी जो कि किसी गरीब की थाली में मिठास घोल सकती थी, विभागीय लालफीताशाही की भेंट चढ़कर धूल खा रही है। इतना ही नहीं सरकारी कर्मचारियों की इस लापरवाही से सरकारी कोष को भी करोड़ों रुपयों का चूना लग चुका है।