Bikaner: सेना में क्लर्क रह चुका भगोड़ा AGIF में कैप्टन बनकर करता था ठगी, 5 करोड़ की ठगी में 48 जवान बने शिकार
Bikaner: फिलहाल बीकानेर पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। हालांकि, अब तक ठगी गई रकम की बरामदगी नहीं हो सकी है। पुलिस की टीम अब आरोपी के बैंक खातों और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि पीड़ित सैनिकों की राशि की वापसी सुनिश्चित की जा सके।
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आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड (AGIF) में खुद को कैप्टन बताकर देशभर के सैनिकों को लोन पर सब्सिडी दिलवाने का झांसा देने वाले एक भगोड़े पूर्व क्लर्क ने करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। आरोपी सागर गुलेरिया ने अब तक लगभग 5 करोड़ रुपये की ठगी की है, जिसमें सेना के 48 जवान शिकार बने हैं। इनमें बीकानेर में तैनात दो जवान पंजाब निवासी मोहित कुमार और मृण्मय पांडा भी शामिल हैं, जिनसे 14-14 लाख रुपये के लोन का झांसा देकर पूरी राशि ठग ली गई।
जानकारी के अनुसार, सागर गुलेरिया पहले सेना में क्लर्क के पद पर कार्यरत था, लेकिन बाद में वह भगोड़ा घोषित हो गया। इसके बाद वह खुद को AGIF में कार्यरत कैप्टन बताकर सैनिकों से संपर्क करता था। वह 60 से 70 प्रतिशत तक की सब्सिडी का लालच देकर उनसे दस्तावेज, बैंक विवरण और OTP हासिल करता और फिर लोन की पूरी राशि अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेता था।
बीकानेर के सदर थाना क्षेत्र में इस मामले की शिकायत 17 जून को दर्ज की गई थी। मामले की जांच कर रहे सहायक उप निरीक्षक अशोक अदलान ने बताया कि जांच के दौरान आरोपी की पहचान हरियाणा के पंचकूला निवासी सागर गुलेरिया के रूप में हुई, जिसे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। आरोपी को बीकानेर लाकर दो दिन की पुलिस रिमांड पर पूछताछ की गई, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
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पूछताछ में सामने आया कि सागर गुलेरिया ने ठगी से मिली रकम शेयर बाजार में निवेश की थी, जिसमें उसे भारी नुकसान हुआ। आरोपी ने किसी भी जवान को 14 लाख रुपये से कम का लोन नहीं दिलवाया और यह पूरा प्रकरण एक पूर्व-नियोजित साजिश के तहत किया गया। सागर गुलेरिया के खिलाफ पहले से राजस्थान, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में कई मामले दर्ज हैं।
फिलहाल बीकानेर पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। हालांकि, अब तक ठगी गई रकम की बरामदगी नहीं हो सकी है। पुलिस की टीम अब आरोपी के बैंक खातों और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि पीड़ित सैनिकों की राशि की वापसी सुनिश्चित की जा सके।