फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Bikaner News ›   A unique procession of the groom in the form of Vishnu was taken out on Dhulandi in Bikaner

Bikaner: धुलंडी पर निकली विष्णुरूपी दूल्हे की अनूठी बरात, बिना फेरे...बिना दुल्हन; फिर भी शादी जैसा माहौल

Sat, 15 Mar 2025 12:57 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर Published by: शबाहत हुसैन Updated Sat, 15 Mar 2025 12:57 PM IST
सार

Bikaner: यह अनोखी परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक प्रेम, सद्भाव और एकता का प्रतीक भी है। इस बरात में हर जाति और समाज के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

विज्ञापन
A unique procession of the groom in the form of Vishnu was taken out on Dhulandi in Bikaner
ऐसे निकलती है बरात - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

होली की धुलंडी पर जब पूरा देश रंगों में सराबोर होता है, तब बीकानेर में एक अनोखी बरात निकलती है, जिसमें दूल्हा तो होता है, लेकिन दुल्हन नहीं! यह परंपरा पिछले तीन सौ वर्षों से चली आ रही है, जिसमें हर्ष जाति का एक अविवाहित युवक भगवान विष्णु का स्वरूप धारण कर बरात निकालता है।
विज्ञापन


इस साल कैसे निकली बरात?
इस वर्ष ऋषि हर्ष विष्णुरूपी दूल्हे के रूप में सजे और मोहता चौक से भव्य बरात निकली। बैंड-बाजे, शंखध्वनि और झालर की झंकार के बीच यह बरात शहर के 13 प्रमुख मकानों तक पहुंची। जिस भी मकान के आगे दूल्हा पहुंचा, वहां की महिलाओं ने पारंपरिक 'पोखने' की रस्म निभाई और मांगलिक गीत गाए।
विज्ञापन


बिना फेरे, बिना दुल्हन, फिर भी शादी जैसा माहौल
इतिहासविद् मुकेश हर्ष बताते हैं कि यह परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है। जिस मार्ग से यह बरात गुजरती है, वहां का माहौल पूरी तरह विवाह जैसा नजर आता है। दुल्हन और फेरों के बिना लौटने वाली इस बरात में भी शादी जैसा उल्लास और उमंग देखने को मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: खाकी पर चढ़ा होली का रंग, जमकर उड़ी गुलाल...डीजे की धुन पर खूब थिरके पुलिसकर्मी


सामाजिक समरसता और परंपरा का प्रतीक
यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक प्रेम, सद्भाव और एकता का प्रतीक भी है। इस बारात में हर जाति और समाज के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। यह बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत का एक अनूठा उदाहरण है, जो वर्षों से अपनी पहचान बनाए हुए है।

हर साल दूल्हा लौटता है अकेला, फिर भी खुशियां रहती हैं पूरी
इस बार भी धुलंडी पर बिना दुल्हन के लौटी यह बरात उल्लास और उत्साह से भरी रही। बीकानेर की यह परंपरा हर साल और आकर्षक होती जा रही है और लोक संस्कृति की समृद्ध धरोहर बनी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed