Bikaner News: महात्मा गांधी स्कूलों में 11,576 शिक्षकों की पोस्टिंग, एक साल की प्रोबेशन पर हुई नियुक्ति
ये नियुक्तियां उन शिक्षकों की हैं जिन्होंने अंग्रेजी माध्यम में काम करने की इच्छा जताई थी और विशेष परीक्षा में सफलता पाई थी। नियुक्त शिक्षकों में प्रिंसिपल, लेक्चरर, वरिष्ठ अध्यापक और लेवल 1 व लेवल 2 अध्यापक शामिल हैं।
विस्तार
राजस्थान के महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों और अन्य सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में लंबे समय से खाली चल रहे शिक्षकों के पद अब भर जाएंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सोमवार को प्रदेशभर के 3,737 स्कूलों में कुल 11,576 शिक्षकों की पोस्टिंग के आदेश जारी कर दिए हैं। इससे इन स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई मिल सकेगी।यह पोस्टिंग उन शिक्षकों को दी गई है, जिन्होंने अंग्रेजी माध्यम में कार्य करने की इच्छा जताई थी और 25 अगस्त 2024 को आयोजित विशेष लिखित परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी। चयनित शिक्षकों को अब केवल अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में ही तैनात किया जाएगा, जिससे हिंदी माध्यम स्कूलों में उनके ट्रांसफर नहीं होंगे।
किस पद पर कितनी नियुक्तियां हुईं
प्रिंसिपल – 380
लेक्चरर – 875
वरिष्ठ अध्यापक – 1205
अध्यापक लेवल 2 – 3978
अध्यापक लेवल 1 – 5138
एक वर्ष की प्रोबेशन अवधि
इन शिक्षकों की नियुक्ति एक वर्ष की प्रोबेशन अवधि के तहत की गई है। यदि प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया या कोई अनियमितता सामने आई, तो शिक्षक को कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। कार्यकाल को हर साल समीक्षा के बाद ही बढ़ाया जाएगा।
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गृह जिला मिलने से शिक्षकों में खुशी
ट्रांसफर नीति में सीमितता के बावजूद, महात्मा गांधी स्कूलों में चयनित कई शिक्षकों को बिना ट्रांसफर प्रक्रिया के अपने गृह जिले में पोस्टिंग मिल गई है। इससे उन शिक्षकों को राहत मिली है जो लंबे समय से दूरस्थ जिलों में कार्यरत थे। विशेष रूप से लेवल 1 और लेवल 2 के शिक्षकों को गृह जिले में पदस्थापन ज्यादा संख्या में मिला है।
नई कैडर व्यवस्था
यह नियुक्तियां राजस्थान सिविल सेवा (अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में नियुक्ति और सेवा शर्तें) नियम 2023 के तहत की गई हैं। इससे अंग्रेजी माध्यम शिक्षकों का अलग कैडर तैयार होगा और शिक्षा गुणवत्ता को स्थायित्व मिलेगा। यह कदम राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उठाया गया एक बड़ा सुधार माना जा रहा है, जिससे अंग्रेजी माध्यम सरकारी स्कूलों को स्थायित्व, गुणवत्ता और संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।