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बीकानेर जमीन घोटाला: ईडी ने विवादित जमीन पर लगाया बोर्ड, रॉबर्ट वाड्रा की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
Updated Thu, 19 Apr 2018 02:37 PM IST
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रॉबर्ट वाड्रा
- फोटो : file photo
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बीकानेर जमीन घोटाले मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा और सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को रॉबर्ट वाड्रा की जमीन के मामले को बोर्ड के सामने रख दिया है इससे पहले उनकी जमीन एजेंसी ने जब्त कर ली थी। बता दें कि इससे पहले की कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के मालिक महेश नागर का सहयोगी था। बता दें कि स्काईलाईट हॉस्पिटैलिटी का संबंध रॉबर्ट वाड्रा से भी रहा है।
जमीन पर बोर्ड लगाए जाने के बाद खुद को जमीन का मालिक बता रहे माघराम मारोथिया ने कहा कि जब ईडी के अधिकारी वहां बोर्ड लगाने आए मैं वहां मौजूद नहीं था। उसने बताया कि वास्तव में इस जमीन का मालिक मैं हूं। उन्होंने कहा कि जयप्रकाश भार्गव जो रॉबर्ट वाड्रा के सहयोगी भी हैं उन्होंने नकली दस्तावेजों का उपयोग कर मुझसे जमीन हड़प ली थी।
ईडी ने इससे पहले जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया था उनके नाम जयप्रकाश भार्गव और अशोक कुमार था। इन दोनों पर आरोप था कि नागर ने ही राबर्ट वाड्रा की ओर से जमीन का सौदा किया था। इन दोनों व्यक्तियों को ईडी ने मनी लांड्रिंग रोधी अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया था ।
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इससे पहले एजेंसी ने बीकानेर के 275 बीघा जमीन आवंटन में धांधली को लेकर साल 2017 के अप्रैल महीने में अशोक कुमार और महेश नागर के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईडी ने साल 2015 में इस मामले में पीएमएलए के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था। जहां वाड्रा इस मामले में किसी भी गलत काम से इंकार करते रहे हैं वहीं कांग्रेस इसे सरासर राजनीतिक बदला करार देती रही है।
उल्लेखनीय है कि ईडी की पूरी जांच का संबंध स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राईवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा खरीदे गए 275 बीघा जमीन से है। ईडी ने अपने बयान में कहा कि स्काइलाईट हॉस्पिटैलिटी ने 69.55 हेक्टेयर की जमीन को 72 लाख रुपये में खरीदा और फिर तीन साल बाद उसे 5.15 करोड़ रुपये में बेच दिया। इस तरह से कंपनी को 4.43 करोड़ रुपये का भारी मुनाफा हुआ।
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जमीन पर बोर्ड लगाए जाने के बाद खुद को जमीन का मालिक बता रहे माघराम मारोथिया ने कहा कि जब ईडी के अधिकारी वहां बोर्ड लगाने आए मैं वहां मौजूद नहीं था। उसने बताया कि वास्तव में इस जमीन का मालिक मैं हूं। उन्होंने कहा कि जयप्रकाश भार्गव जो रॉबर्ट वाड्रा के सहयोगी भी हैं उन्होंने नकली दस्तावेजों का उपयोग कर मुझसे जमीन हड़प ली थी।
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ईडी ने इससे पहले जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया था उनके नाम जयप्रकाश भार्गव और अशोक कुमार था। इन दोनों पर आरोप था कि नागर ने ही राबर्ट वाड्रा की ओर से जमीन का सौदा किया था। इन दोनों व्यक्तियों को ईडी ने मनी लांड्रिंग रोधी अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया था ।
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इससे पहले एजेंसी ने बीकानेर के 275 बीघा जमीन आवंटन में धांधली को लेकर साल 2017 के अप्रैल महीने में अशोक कुमार और महेश नागर के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईडी ने साल 2015 में इस मामले में पीएमएलए के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था। जहां वाड्रा इस मामले में किसी भी गलत काम से इंकार करते रहे हैं वहीं कांग्रेस इसे सरासर राजनीतिक बदला करार देती रही है।
उल्लेखनीय है कि ईडी की पूरी जांच का संबंध स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राईवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा खरीदे गए 275 बीघा जमीन से है। ईडी ने अपने बयान में कहा कि स्काइलाईट हॉस्पिटैलिटी ने 69.55 हेक्टेयर की जमीन को 72 लाख रुपये में खरीदा और फिर तीन साल बाद उसे 5.15 करोड़ रुपये में बेच दिया। इस तरह से कंपनी को 4.43 करोड़ रुपये का भारी मुनाफा हुआ।