केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद उद्यान प्रशासन अलर्ट मोड पर है। प्रशासन की ओर से उद्यान में अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा पीपीई किट पहनकर मॉनिटरिंग की जा रही है। पर्यटकों को भी झील के अंदर पानी में उतरने की मना किया गया है। हालांकि फिलहाल प्रशासन पक्षियों के जांच सैंपलों की रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है ताकि आगे की रूपरेखा बनाई जा सके और पर्यटक बिना झिझक घूमने आ सकें।
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केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि एक मृत पेंटेड स्टार्क पक्षी के बच्चे में बर्ड फ्लू वायरस मिला है। उस समय से उद्यान प्रशासन ने सावधानी बरतना शुरू कर दिया है। पर्यटकों को पक्षियों के ज्यादा नजदीक नहीं जाने दिया जा रहा है और अधिकारी एवं कर्मचारियों की मॉनिटरिंग के लिए ड्यूटी लगा दी है, जो पीपी किट पहनकर दिन में चार बार उद्यान और बाहर के क्षेत्र में जाकर मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
अच्छी खबर यह है कि घना के बाहर किसी भी पक्षी में यह लक्षण नहीं मिले हैं और जहां पक्षियों में इन्फेक्शन के ज्यादा चांस रहते हैं वहां भी कोई ऐसा पक्षी नहीं मिला है, जिसमें इस वायरस के लक्षण नजर आ रहे हों। उन्होंने जनता के लिए सूचना जारी की है कि यदि घना के बाहर कोई भी इंफेक्टेड पक्षी मिलता है तो उसकी उद्यान प्रशासन को दें।
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मृत पक्षी में बर्ड फ्लू का जो वायरस मिला है वह एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है और जंगली पक्षियों में यह वायरस ज्यादा देखने मिलता है। यह वायरस अन्य जानवरों में भी फैल सकता है, यह फ्लूइड के माध्यम से ही हो सकता है। जितना अधिक तापमान होता है, उसमें यह वायरस कमजोर हो जाता है। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में यह वायरस सिर्फ पेंटेड स्टार्क के बच्चे में मिला है, अन्य किसी पक्षी में नहीं।
डीएफओ का कहना है कि अभी यह वायरस कम ही जगह पर फैला है लेकिन अभी जो रिपोर्ट जांच के लिए भोपाल गई है, उसके परिणाम के बाद ही सही जानकारी दी जा सकेगी, फिलहाल कोई चिंता की बात नहीं है। गौरतलब है कि पक्षी विहार के करीब 1200 हैक्टेयर में इन दिनों देश-विदेश से पक्षी विचरण करने आए हैं।
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डीएफओ मानस सिंह ने बताया- कुछ दिन पहले हमनें दो पेंटेड स्टार्क पक्षी के बच्चों की डेडबॉडी बरामद की थी. हमें उन पक्षियों में बर्ड फ्लू वायरस के कुछ लक्षण लग रहे थे, इसलिए उनके सैंपल लेबोरेटरी में भेजे गए थे. उसमें से 1 सैंपल पॉजिटिव आया और 1 सैंपल नेगेटिव आया है, जिसके बाद 100 से अधिक पक्षियों के सैंपल जांच के लिए भोपाल भेजे गए हैं।
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जो भी पर्यटक यहां आ रहे हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है। वे बिना भय के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान आ सकते हैं क्योंकि वन विभाग पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना काम कर रहा है लेकिन फिर भी पर्यटकों के लिए गाइड लाइन जारी की गई है कि किसी भी मृत पक्षी को हाथ नहीं लगाएं।