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राजस्थान: भरतपुर में BJP को किसका डर? वोटिंग से पहले पार्टी करने जा रही है ऐसा बड़ा खेल, जानकर चौंक जाएंगे...

Thu, 17 Sep 2026 04:38 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Thu, 17 Sep 2026 04:38 PM IST
सार

भरतपुर में निर्दलीयों के खेमे में सेंध के बाद BJP का पलड़ा भारी हुआ, लेकिन क्रॉस वोटिंग का डर बरकरार है। वोटिंग से पहले पार्टी क्या बड़ा पैंतरा चलने जा रही है? जानिए खबर में...

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Bharatpur: Why Is BJP Worried About Cross-Voting? What Big Move Is the Party Planning Before the Mayoral Poll?
भरतपुर मेयर चुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार


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भरतपुर नगर निगम में मेयर की कुर्सी के लिए चल रहा सियासी खेल अब नया मोड़ ले चुका है। शुरुआत में कांग्रेस के समर्थन से निर्दलीयों ने वार्ड 17 की पार्षद विचित्रा सिंह को मेयर पद का उम्मीदवार बनाकर भाजपा के सामने चुनौती खड़ी की थी। लेकिन भाजपा ने निर्दलीयों के खेमे में सेंधमारी करते हुए ज्यादातर पार्षदों को अपने पाले में कर लिया है। इसके बाद भाजपा का बहुमत का गणित मजबूत हो चुका है और अब मेयर पद पर उसकी दावेदारी सबसे मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है।

भरतपुर निगम में कुल 65 वार्ड हैं। इनमें भाजपा के 20, कांग्रेस के 7, निर्दलीय 36, बसपा का एक और आरएलपी का एक पार्षद है। ऐसे में 33 पार्षदों का समर्थन मेयर बनाने के लिए जरूरी है। 36 निर्दलीय पार्षदों के कारण मेयर चुनाव का पूरा गणित इन्हीं के समर्थन पर काफी हद तक टिका हुआ है।

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यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ बनाए रखने में जुटी हैं। भाजपा की चिंता केवल निर्दलीयों तक सीमित नहीं है। पार्टी के भीतर मेयर पद की दावेदारी करने वाले लेकिन टिकट से वंचित रहे पार्षद भी अब उसके लिए चुनौती माने जा रहे हैं।

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हालांकि, भाजपा के सूत्र बता रहे हैं कि मेयर के लिए बीजेपी ने जरूरी नंबर जुटा लिए हैं। लेकिन पार्टी को अब अपने साथ आए निर्दलीय पार्षदों में क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। यही वजह है कि मतदान से पहले पार्टी हर वोट को सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम कर रही है।

सूत्र बता रहे हैं कि बीजेपी ने ऐसे पार्षदों को चिन्हित कर लिया है जो क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इनकी संख्या करीब 15 के आस-पास बताई जा रही है। ऐसे में बीजेपी इन पार्षदों को वोटिंग से ही बाहर रखने का दांव भी चल सकती है।

पहले कांग्रेस के साथ था निर्दलीयों का खेमा

भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में भाजपा ने 20 सीटें जीती हैं। कांग्रेस के खाते में सात सीटें आईं, जबकि निर्दलीयों ने 36 वार्डों में जीत दर्ज की। बसपा और आरएलपी को एक-एक सीट मिली है। मेयर चुनाव में बहुमत के लिए 33 पार्षदों के समर्थन की जरूरत है।
नतीजे आने के बाद 36 निर्दलीय पार्षदों का समूह निर्णायक स्थिति में था। इसी समूह ने कांग्रेस के समर्थन से विचित्रा सिंह को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया। विचित्रा सिंह ने वार्ड 17 से निर्दलीय चुनाव जीता है और वह पूर्व मेयर शिव सिंह भोंट की पत्नी हैं।
इस समीकरण से शुरुआती तौर पर भाजपा के सामने चुनौती खड़ी होती दिखी, क्योंकि 20 पार्षदों वाली भाजपा को बहुमत तक पहुंचने के लिए कम से कम 13 अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी।

भाजपा ने निर्दलीयों के खेमे में लगा दी सेंध

मेयर चुनाव से पहले भाजपा ने निर्दलीय पार्षदों से संपर्क बढ़ाया। अब ज्यादातर निर्दलीय पार्षदों के भाजपा के साथ आने का दावा किया जा रहा है। इस सेंधमारी ने मेयर चुनाव का पूरा गणित बदल दिया है। यानी जिस निर्दलीय खेमे ने शुरुआत में कांग्रेस के समर्थन से भाजपा को चुनौती देने की कोशिश की थी, उसका बड़ा हिस्सा अब भाजपा के साथ दिखाई दे रहा है। इससे भाजपा प्रत्याशी अनुराधा सिंह की स्थिति मजबूत हुई है।


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मुकाबला अब भाजपा बनाम विचित्रा सिंह

भाजपा ने वार्ड 61 से पार्षद अनुराधा सिंह को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर निर्दलीयों की ओर से विचित्रा सिंह मैदान में हैं। विचित्रा सिंह कांग्रेस के समर्थन का दावा कर चुकी हैं। ऐसे में भरतपुर में अब सवाल यह नहीं है कि भाजपा बहुमत के आंकड़े तक पहुंच पाएगी या नहीं। निर्दलीयों के बड़े हिस्से के समर्थन के बाद भाजपा का गणित काफी मजबूत हो गया है। अब असली सवाल यह है कि क्या भाजपा अपने साथ आए पार्षदों के वोट को मतदान के दिन तक एकजुट रख पाएगी? मेयर चुनाव में यही आखिरी पेंच भरतपुर के सियासी खेल का रुख तय करेगा।

 

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