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भरतपुर: जनाना अस्पताल में नवजात बच्ची की मौत, परिजनों का आरोप- समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान
Sat, 10 Oct 2026 08:45 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sat, 10 Oct 2026 08:45 PM IST
सार
राजस्थान के भरतपुर स्थित जनाना अस्पताल में नवजात बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। बच्ची के परिजनों ने चिकित्सकों पर समय पर उचित उपचार नहीं देने का आरोप लगाया और अस्पताल में हंगामा किया। परिजनों ने मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली।
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जनाना अस्पताल में बच्ची की मौत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान में भरतपुर के जनाना अस्पताल में एक नवजात बच्ची की मौत हो गई है। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया। सूचना मिलने पर मथुरा गेट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों से समझाइश की। परिजनों ने मामले में जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद वे बच्ची के शव को लेकर घर चले गए।
8 अक्टूबर को प्रसव के लिए भर्ती हुई थी महिला
देवकीनंदन की पत्नी रिंकी को 8 अक्टूबर को प्रसव के लिए जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 9 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे महिला ने ऑपरेशन के जरिए बच्ची को जन्म दिया। परिजनों के मुताबिक, जन्म के समय बच्ची स्वस्थ थी, लेकिन अगले दिन उसे बुखार की शिकायत होने लगी। इसके बाद परिजन बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे।
चिकित्सकों पर उचित जांच नहीं करने का आरोप
परिजन बच्ची को दिखाने के लिए अस्पताल के आईसीयू और वार्ड में लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि उस समय चिकित्सक ने बच्ची को उचित तरीके से नहीं देखा और दूर से ही पैरासिटामोल सहित बुखार की दवाइयां लिख दीं। उनका कहना है कि अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मचारियों ने बच्ची की तबीयत पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इसके बाद बच्ची की हालत बिगड़ती गई और उसकी मौत हो गई।
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हालांकि, इलाज में लापरवाही के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आने और उपचार से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
परिजनों ने की जिम्मेदार चिकित्सकों पर कार्रवाई की मांग
नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। बच्ची के ताऊ लक्ष्मणकांत ने आरोप लगाया कि यदि समय पर उचित उपचार मिलता, तो बच्ची की जान बच सकती थी। उन्होंने मामले की जांच कर जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई करने और परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाया
मथुरा गेट थाना पुलिस के एसआई हरेंद्र सिंह ने बताया कि रिंकी को 8 अक्टूबर को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था और 9 अक्टूबर को सुबह 11 बजे उसने बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची को बुखार आने पर परिजन उसे अस्पताल में दिखाने के लिए लेकर आए थे। उपचार के बावजूद बच्ची की मृत्यु हो गई।
पुलिस के अनुसार, परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाया। इसके बाद परिजन बच्ची के शव को लेकर घर चले गए। फिलहाल, मामले में परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच और अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
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8 अक्टूबर को प्रसव के लिए भर्ती हुई थी महिला
देवकीनंदन की पत्नी रिंकी को 8 अक्टूबर को प्रसव के लिए जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 9 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे महिला ने ऑपरेशन के जरिए बच्ची को जन्म दिया। परिजनों के मुताबिक, जन्म के समय बच्ची स्वस्थ थी, लेकिन अगले दिन उसे बुखार की शिकायत होने लगी। इसके बाद परिजन बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे।
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चिकित्सकों पर उचित जांच नहीं करने का आरोप
परिजन बच्ची को दिखाने के लिए अस्पताल के आईसीयू और वार्ड में लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि उस समय चिकित्सक ने बच्ची को उचित तरीके से नहीं देखा और दूर से ही पैरासिटामोल सहित बुखार की दवाइयां लिख दीं। उनका कहना है कि अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मचारियों ने बच्ची की तबीयत पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इसके बाद बच्ची की हालत बिगड़ती गई और उसकी मौत हो गई।
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हालांकि, इलाज में लापरवाही के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आने और उपचार से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
परिजनों ने की जिम्मेदार चिकित्सकों पर कार्रवाई की मांग
नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। बच्ची के ताऊ लक्ष्मणकांत ने आरोप लगाया कि यदि समय पर उचित उपचार मिलता, तो बच्ची की जान बच सकती थी। उन्होंने मामले की जांच कर जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई करने और परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाया
मथुरा गेट थाना पुलिस के एसआई हरेंद्र सिंह ने बताया कि रिंकी को 8 अक्टूबर को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था और 9 अक्टूबर को सुबह 11 बजे उसने बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची को बुखार आने पर परिजन उसे अस्पताल में दिखाने के लिए लेकर आए थे। उपचार के बावजूद बच्ची की मृत्यु हो गई।
पुलिस के अनुसार, परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाया। इसके बाद परिजन बच्ची के शव को लेकर घर चले गए। फिलहाल, मामले में परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच और अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।