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बारां में 92 लाख की साइबर ठगी: डॉक्टर-इंजीनियर समेत चार और गिरफ्तार, नेपाल में बैठे सरगना तक पहुंचा बैंक खाता
Fri, 02 Oct 2026 01:17 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारां
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Fri, 02 Oct 2026 01:17 PM IST
सार
बारां में 92.75 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने डॉक्टर, इंजीनियर और फिजियोथेरेपिस्ट समेत चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में बैंक खातों को कमीशन के बदले साइबर ठगों को उपलब्ध कराने की बात सामने आई है।
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सांकेतिक फोटो
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
बारां जिले में 92.75 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने डॉक्टर, इंजीनियर और फिजियोथेरेपिस्ट समेत चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब तक इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कमीशन के लालच में साइबर ठगों को अपने बैंक खाते उपलब्ध करा रहे थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम में से 20 लाख रुपये होल्ड करवाए हैं, जिनमें से 10 लाख रुपये पीड़ित को वापस दिलाए जा चुके हैं।
ट्रेडिंग एप पर 54 हजार का मुनाफा दिखाकर जीता भरोसा
पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासू ने बताया कि एक महिला ने ट्रेडिंग एप पर भारी मुनाफे का झांसा देकर बारां के व्यापारी विष्णु गालव से संपर्क किया था। ठगों ने शुरुआत में एप पर 54 हजार रुपये का लाभ दिखाया, जिससे व्यापारी को भरोसा हो गया। इसके बाद विष्णु गालव और उनकी पत्नी संगीता के बैंक खातों से कुल 92.75 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। ट्रेडिंग एप पर निवेश की गई रकम लगातार डॉलर में बढ़ती हुई दिखाई देती रही। पीड़ित को लगा कि उसके निवेश पर अच्छा मुनाफा हो रहा है, लेकिन जब उसने रकम निकालने की कोशिश की तो निकासी नहीं हो सकी। इसके बाद ठगी का पता चलने पर 20 दिसंबर, 2025 को मामला दर्ज कराया गया।
नेपाल में बैठे साइबर ठगी के सरगना तक पहुंचा खाता
पुलिस ने बैंक खातों और उनके लेन-देन की कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच में सामने आया कि 24 वर्षीय आरोपी राज अतुल भाई पडसाला ने अपनी फर्म आर्य केमिकल्स का बंधन बैंक खाता 33 वर्षीय इंजीनियर अशोक भाई रमाणी को दिया था। इसके बाद रमाणी ने यह खाता 41 वर्षीय डॉक्टर जयदीप आदरेशणा और 25 वर्षीय लक्ष्मण वाघेला के जरिये नेपाल में बैठे साइबर ठगी के सरगना तक पहुंचाया था। पुलिस के अनुसार, इसी खाते से महज 10 से 15 दिन के भीतर करीब तीन से चार करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था।
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ये भी पढ़ें- ‘मुझे योजनाबद्ध तरीके से सीजे बनने से रोका’: रिटायर्ड जज संजीव शर्मा का पलटवार, मानहानि केस की मांगी अनुमति
ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच तेज
साइबर ठगी की इस वारदात में पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए पीड़ित के 20 लाख रुपये होल्ड करवाए, जिनमें से 10 लाख रुपये पीड़ित को वापस दिलवा दिए गए हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस टीम ठगी के पूरे नेटवर्क और नेपाल में बैठे कथित सरगना से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी हुई है।
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ट्रेडिंग एप पर 54 हजार का मुनाफा दिखाकर जीता भरोसा
पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासू ने बताया कि एक महिला ने ट्रेडिंग एप पर भारी मुनाफे का झांसा देकर बारां के व्यापारी विष्णु गालव से संपर्क किया था। ठगों ने शुरुआत में एप पर 54 हजार रुपये का लाभ दिखाया, जिससे व्यापारी को भरोसा हो गया। इसके बाद विष्णु गालव और उनकी पत्नी संगीता के बैंक खातों से कुल 92.75 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। ट्रेडिंग एप पर निवेश की गई रकम लगातार डॉलर में बढ़ती हुई दिखाई देती रही। पीड़ित को लगा कि उसके निवेश पर अच्छा मुनाफा हो रहा है, लेकिन जब उसने रकम निकालने की कोशिश की तो निकासी नहीं हो सकी। इसके बाद ठगी का पता चलने पर 20 दिसंबर, 2025 को मामला दर्ज कराया गया।
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नेपाल में बैठे साइबर ठगी के सरगना तक पहुंचा खाता
पुलिस ने बैंक खातों और उनके लेन-देन की कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच में सामने आया कि 24 वर्षीय आरोपी राज अतुल भाई पडसाला ने अपनी फर्म आर्य केमिकल्स का बंधन बैंक खाता 33 वर्षीय इंजीनियर अशोक भाई रमाणी को दिया था। इसके बाद रमाणी ने यह खाता 41 वर्षीय डॉक्टर जयदीप आदरेशणा और 25 वर्षीय लक्ष्मण वाघेला के जरिये नेपाल में बैठे साइबर ठगी के सरगना तक पहुंचाया था। पुलिस के अनुसार, इसी खाते से महज 10 से 15 दिन के भीतर करीब तीन से चार करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था।
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ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच तेज
साइबर ठगी की इस वारदात में पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए पीड़ित के 20 लाख रुपये होल्ड करवाए, जिनमें से 10 लाख रुपये पीड़ित को वापस दिलवा दिए गए हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस टीम ठगी के पूरे नेटवर्क और नेपाल में बैठे कथित सरगना से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी हुई है।