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बारां में एसडीएम पर एसीबी का शिकंजा: पांच लाख से शुरू होकर 45 हजार पर तय हुआ सौदा, रिश्वत मांगने पर केस दर्ज
Fri, 18 Sep 2026 09:53 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारां
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Fri, 18 Sep 2026 09:53 PM IST
सार
बारां के अंता एसडीएम हवाई सिंह यादव के खिलाफ एसीबी ने रिश्वत मांगने के आरोप में केस दर्ज किया है। शिकायत पर हुई गोपनीय जांच में एक जमीन के एग्रीमेंट पर लगे स्थगन आदेश को हटाने के बदले रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई।
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45 हजार रुपये की रिश्वत मांगने की पुष्टि
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
बारां के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने अंता के उपखंड अधिकारी हवाई सिंह यादव के खिलाफ रिश्वत मांगने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है। ब्यूरो ने जांच के दौरान अधिकारी द्वारा 45 हजार रुपये की रिश्वत मांगने की पुष्टि की है।
एक शिकायतकर्ता ने कोटा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इकाई में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी एक प्लानिंग वाली जमीन पर पूर्व उपखंड अधिकारी ने आपत्ति लगाई थी। इस आपत्ति को हटाने के एवज में वर्तमान उपखंड अधिकारी हवाई सिंह यादव पांच लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे थे। इसके साथ ही, एक अन्य प्लानिंग वाली जमीन के एग्रीमेंट पर लगे स्थगन आदेश को हटाने के बदले 50 हजार रुपये की अलग से मांग किए जाने का भी आरोप था।
गोपनीय जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि
शिकायत मिलने के बाद कोटा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इकाई के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय स्वर्णकार ने मामले की गोपनीय जांच कराई। जांच के दौरान एग्रीमेंट पर लगे स्थगन आदेश को हटाने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई। शिकायतकर्ता के अनुरोध पर उपखंड अधिकारी 45 हजार रुपये लेने पर राजी हो गए। उन्होंने यह राशि अपने कथित दलाल को देने का निर्देश दिया था।
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ट्रैप की भनक से टला रिश्वत का लेन-देन
ब्यूरो की टीम ने अधिकारी को पकड़ने के लिए ट्रैप कार्रवाई की तैयारी की थी। हालांकि, ट्रैप कार्रवाई की जानकारी मिलने से रिश्वत का लेन-देन नहीं हो पाया। रिश्वत मांगने की बात प्रमाणित होने पर ब्यूरो ने हवाई सिंह यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। अब इस मामले की जांच ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक करेंगे।
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एक शिकायतकर्ता ने कोटा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इकाई में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी एक प्लानिंग वाली जमीन पर पूर्व उपखंड अधिकारी ने आपत्ति लगाई थी। इस आपत्ति को हटाने के एवज में वर्तमान उपखंड अधिकारी हवाई सिंह यादव पांच लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे थे। इसके साथ ही, एक अन्य प्लानिंग वाली जमीन के एग्रीमेंट पर लगे स्थगन आदेश को हटाने के बदले 50 हजार रुपये की अलग से मांग किए जाने का भी आरोप था।
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गोपनीय जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि
शिकायत मिलने के बाद कोटा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इकाई के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय स्वर्णकार ने मामले की गोपनीय जांच कराई। जांच के दौरान एग्रीमेंट पर लगे स्थगन आदेश को हटाने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई। शिकायतकर्ता के अनुरोध पर उपखंड अधिकारी 45 हजार रुपये लेने पर राजी हो गए। उन्होंने यह राशि अपने कथित दलाल को देने का निर्देश दिया था।
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ट्रैप की भनक से टला रिश्वत का लेन-देन
ब्यूरो की टीम ने अधिकारी को पकड़ने के लिए ट्रैप कार्रवाई की तैयारी की थी। हालांकि, ट्रैप कार्रवाई की जानकारी मिलने से रिश्वत का लेन-देन नहीं हो पाया। रिश्वत मांगने की बात प्रमाणित होने पर ब्यूरो ने हवाई सिंह यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। अब इस मामले की जांच ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक करेंगे।