डूंगरपुर पंचायत चुनाव: सांसद के काका और पूर्व सांसद की रिश्तेदार हारीं, विधायक परिवार का दबदबा बरकरार
डूंगरपुर जिले की सात पंचायत समितियों की 232 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच चुनाव के नतीजों में कई राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा दांव पर रही। भारतीय आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत के काका खड़वार खुनिया पंचायत से चुनाव हार गए।
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डूंगरपुर जिले की सात पंचायत समितियों झोथरी, सीमलवाड़ा, भंडारी, चिखली, गलियाकोट, सागवाड़ा और पाडवा की 232 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच चुनाव के नतीजे सामने आने के साथ ही गांवों की नई सरकार चुन ली गई है। पहले चरण में 82.39 प्रतिशत मतदान के बाद आए परिणामों ने जिले के राजनीतिक समीकरणों की तस्वीर साफ कर दी। चुनाव में कहीं राजनीतिक परिवारों का वर्चस्व कायम रहा, तो कहीं बड़े राजनीतिक चेहरों से जुड़े प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। सबसे चर्चित मुकाबलों में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के सांसद राजकुमार रोत के काका की हार और विधायक शंकरलाल डेचा के परिवार की लगातार सातवीं जीत शामिल है। वहीं, दो ग्राम पंचायतों में सरपंच पद का फैसला महज एक-एक वोट से हुआ।
सांसद राजकुमार रोत के काका चुनाव हारे
भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के सांसद राजकुमार रोत के काका सोहनलाल अपनी ही स्थानीय पंचायत खरवर खुनिया में सरपंच का चुनाव नहीं जीत सके। यहां भगवतीलाल खराड़ी ने उन्हें 15 मतों से पराजित कर जीत दर्ज की। यह मुकाबला जिले के चर्चित चुनावी नतीजों में शामिल रहा।
पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा की रिश्तेदार को भी मिली हार
सीमलवाड़ा पंचायत समिति की पूर्व प्रधान और पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा की भतीजे की बहू निमिषा भगोरा को भी सरपंच चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। कलावती ने उन्हें 600 मतों के बड़े अंतर से शिकस्त दी। वहीं, झोथरी पंचायत समिति की पूर्व प्रधान अनिता रोत भी करावाड़ा पंचायत से चुनाव हार गईं। इन नतीजों ने दिखाया कि स्थानीय चुनावों में राजनीतिक पहचान और परिवार का प्रभाव जीत की गारंटी नहीं है।
विधायक शंकरलाल डेचा के परिवार का दबदबा बरकरार
सागवाड़ा पंचायत समिति की डेचा पंचायत में विधायक शंकरलाल डेचा के परिवार का करीब तीन दशक पुराना राजनीतिक वर्चस्व कायम रहा। विधायक के बेटे राहुल डामोर ने अपने प्रतिद्वंद्वी राकेश को 340 मतों से हराकर सरपंच पद पर जीत दर्ज की। इस जीत के साथ डेचा परिवार ने सरपंच पद पर लगातार सातवीं बार जीत हासिल की। पंचायत में परिवार का लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक दबदबा एक बार फिर बरकरार रहा।
दो पंचायतों में महज एक-एक वोट से हुआ फैसला
जिले की दो ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के चुनाव का नतीजा बेहद करीबी रहा। पाडवा पंचायत समिति की माविता पंचायत में मंजुला रोत ने केवल एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
इसी तरह, चिखली पंचायत समिति की कोचरी पंचायत में मानसिंह पारगी ने अपनी प्रतिद्वंद्वी को महज एक वोट से हराकर सरपंच पद पर कब्जा जमाया। इन दोनों नतीजों ने साबित किया कि ग्रामीण चुनावों में एक-एक वोट कितना निर्णायक साबित हो सकता है।