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बांसवाड़ा: बारिश बनी अंतिम संस्कार की मुश्किल, श्मशान घाट नहीं होने से खुले में जलानी पड़ी चिता
Sat, 12 Sep 2026 09:59 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 09:59 PM IST
सार
बांसवाड़ा में बारिश से लोगों और किसानों को राहत मिली, लेकिन श्मशान घाट के अभाव की गंभीर समस्या भी सामने आई। जानामेड़ी और चित्रा डूंगरी में बारिश के बीच खुले स्थान पर अंतिम संस्कार करना पड़ा। स्थानीय लोग स्थायी श्मशान घाट की मांग कर रहे हैं।
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बारिश के बीच खुले में हो रहा अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिले में विकास के दावों के बीच आज भी ऐसी बुनियादी समस्याएं हैं, जो लोगों की संवेदनाओं और गरिमा से सीधे जुड़ी हैं। इनमें श्मशान घाट जैसी आवश्यक सुविधा का अभाव भी शामिल है। जिले के कई ग्रामीण और आबादी वाले क्षेत्रों में समुचित श्मशान स्थल नहीं होने के कारण लोगों को अपने प्रियजनों की अंतिम विदाई खुले आसमान के नीचे करने की विवशता झेलनी पड़ रही है।
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बारिश के बीच खुले में करना पड़ा अंतिम संस्कार
ऐसी ही स्थिति से उदयपुर मार्ग स्थित गांव जानामेड़ी और चित्रा डूंगरी के लोगों को शनिवार शाम अंतिम संस्कार के दौरान रूबरू होना पड़ा। बरसात के बीच अंतिम यात्रा निकाली गई और खुले स्थान पर अंतिम संस्कार किया गया। चिता पर कुछ लोग प्लास्टिक लगाकर खड़े रहे। यह क्षेत्र पहले ग्राम पंचायत के अंतर्गत था और निकाय चुनाव से पहले हुए परिसीमन में नगर परिषद क्षेत्र में शामिल हुआ है। इसके बावजूद यहां श्मशान घाट की समुचित व्यवस्था का अभाव लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
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यादव बस्ती में भी यही हाल
इसी तरह कूपड़ा के चित्राडूंगरी क्षेत्र स्थित यादव बस्ती में भी श्मशान घाट नहीं होने के कारण लोगों को अंतिम संस्कार के लिए खुले परिसर का सहारा लेना पड़ा। बरसात के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि प्रशासन इस समस्या को केवल सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और सम्मानजनक अंतिम संस्कार से जुड़े विषय के रूप में देखे।
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बारिश से मिली राहत, लेकिन बढ़ी यह परेशानी
लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले के लोगों को शनिवार को राहत मिली। बांसवाड़ा में मध्यरात्रि के दौरान करीब 20 मिनट तक तेज बारिश हुई, जिसके बाद सुबह से रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही। डूंगरपुर में भी शाम करीब 4 बजे के बाद मौसम बदला और करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई। इससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली।
मक्का-सोयाबीन को बारिश से जीवनदान
बारिश को मक्का और सोयाबीन की फसलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई खेतों में फसलें मुरझाने लगी थीं। बारिश से खेतों में नमी पहुंची और किसानों को राहत मिली। हालांकि, किसानों का कहना है कि फसल बचाने के लिए आगे भी अच्छी बारिश जरूरी है।
मौसम विभाग का येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने रविवार को बांसवाड़ा और डूंगरपुर दोनों जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश की संभावना बनी हुई है। बारिश जहां किसानों और आम लोगों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं श्मशान घाट जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव ने अंतिम संस्कार को लेकर स्थानीय लोगों की मुश्किल भी सामने ला दी है।