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डूंगरपुर: सभापति पद को लेकर भाजपा में खींचतान, सुशीला को सिंबल मिलने के बाद भी प्रभु पंड्या मैदान में

Thu, 17 Sep 2026 07:32 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डूंगरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डूंगरपुर Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो Updated Thu, 17 Sep 2026 07:32 PM IST
सार

डूंगरपुर नगर परिषद में भाजपा के 24 पार्षद होने के बावजूद सभापति पद को लेकर पार्टी में खींचतान है। भाजपा ने सुशीला गुप्ता को सिंबल दिया है, जबकि पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या निर्दलीय मैदान में हैं। कुछ पार्षदों के समर्थन से मुकाबला रोचक हो गया है।

 

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Crisis deepens within Dungarpur BJP; former president remains in the fray as an independent candidate.
डूंगरपुर नगर परिषद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डूंगरपुर नगर परिषद में भारतीय जनता पार्टी को जनता ने बहुमत दिया है, लेकिन सभापति पद को लेकर पार्टी के सामने संकट खड़ा हो गया है। सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित सभापति पद के लिए भाजपा से सुशीला गुप्ता और पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या ने नामांकन दाखिल किया था। पार्टी की ओर से सुशीला गुप्ता को सिंबल दिए जाने के बाद प्रभु पंड्या निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में डटे हुए हैं। भाजपा के कुछ पार्षदों के पंड्या के समर्थन में होने से पार्टी में खींचतान सामने आ गई है।

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डूंगरपुर नगर परिषद में भाजपा ने 40 में से 24 वार्डों में जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया है। इसके बाद सभापति पद के लिए पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या और पूर्व सभापति केके गुप्ता की पत्नी सुशीला गुप्ता प्रमुख दावेदार थे। एक नाम पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में बुधवार को दोनों ने रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष अपना-अपना नामांकन दाखिल किया।

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गुप्ता को मिला पार्टी का सिंबल
गुरुवार को नामांकन पत्रों की जांच से पहले भाजपा की ओर से सुशीला गुप्ता को पार्टी का सिंबल दे दिया गया। इसके बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल रहा। वहीं, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या चुनाव मैदान में डटे रहे। नामांकन पत्रों की जांच में सुशीला गुप्ता और प्रभु पंड्या के अलावा कांग्रेस प्रत्याशी भरत नागदा के नामांकन पत्र भी सही पाए गए। रिटर्निंग अधिकारी की ओर से जारी पत्र में प्रभु पंड्या को निर्दलीय प्रत्याशी बताया गया है।

सहमति बनाने की कोशिश
शुक्रवार को नाम वापसी का अंतिम दिन है। ऐसे में प्रभु पंड्या के निर्दलीय चुनाव मैदान में डटे रहने के बाद पार्टी के दोनों धड़ों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। भाजपा के 24 पार्षदों में से कुछ सुशीला गुप्ता के पक्ष में हैं, जबकि 5 से 6 पार्षदों के प्रभु पंड्या के समर्थन में होने की बात सामने आ रही है। यदि पार्टी स्तर पर सहमति नहीं बनती है और प्रभु पंड्या निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में डटे रहते हैं तो 21 सितंबर को मतदान के दिन क्रॉस वोटिंग की संभावना भी बन सकती है।

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