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Alwar: पांडुपोल हनुमान जी क्षेत्र में निजी वाहनों के प्रवेश पर रहेगी रोक, सुप्रीम कोर्ट गई थी मंदिर कमेटी

Sat, 14 Dec 2024 07:39 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर Published by: शबाहत हुसैन Updated Sat, 14 Dec 2024 07:39 AM IST
सार

Alwar: सिलिबेरी गेट से वाहनों के प्रवेश पर बैन लगाने का काम शुरू किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके अलावा सभी अन्य सिफारिशों को भी मानने की बात कही है, लेकिन कुछ सिफारिशों को लागू करने में थोड़ा अतिएकत समय देने की मांग भी कोर्ट से की गयी थी।
 

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Entry of private vehicles will be prohibited in Pandupol Hanuman Ji area
निजी वाहनों के प्रवेश पर रहेगी रोक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिछले काफी समय से लंबित सीईसी की सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट ने मोहर लगाते हुए राजस्थान सरकार को 1 साल के भीतर इन सभी सिफारिशों की अनुपालना करने का समय दिया है। सुनवाई  के दौरान केंद्र से ऐश्वर्या राय और राजस्थान सरकार की ओर से सहायक अधिवक्ता शिवमंगल शर्मा उपस्थित रहे। 

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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को एक समिति गठन करने के आदेश दिए जोकि सरिस्का क्षेत्र में मॉनिटरिंग करेगी। इसके साथ ही विशेष टाइगर सुरक्षा बल के गठन के आदेश भी दिए हैं। बफर जॉन क्षेत्र क्षेत्र में अब अवैध खनन को रोकने के लिए भी समिति को मॉनिटरिंग करने के लिए कहा गया है। सीईसी की 25 सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट ने मोहर लगाते हुए राजस्थान सरकार को 1 साल के भीतर इन सभी सिफारिश की अनुपालना करने का समय दिया है।
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सीईसी ने सरिस्का टहला स्टेट हाइवे के डिनोटीफिकेशन करने की बात भी कही थी। इसे 7 सितम्बर को डिनोटिफाइड किया जा चुका है। इसके अलावा स्टेट हाइवे 13 पर कुशालगढ़ तिराहे से थेंक्यू बोर्ड तक 18 किलोमीटर में कामर्शियल वाहनों के प्रवेश पर रोक सम्बन्धी आदेश भी जारी किए जा चुके है। सीईसी की सिफारिशों पर मार्च 2026 तक एक नई बाघ सरंक्षण योजना लागू करने के लिए ग्लोबल टाइगर फोरम ने भी काम करना शुरू का दिया है।
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सिलिबेरी गेट से वाहनों के प्रवेश पर बैन लगाने का काम शुरू किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके अलावा सभी अन्य सिफारिशों को भी मानने की बात कही है, लेकिन कुछ सिफारिशों को लागू करने में थोड़ा अतिएकत समय देने की मांग भी कोर्ट से की गयी थी। सीईसी ने ऊनी सिफ़ारिशो में पांडुपोल हनुमान मंदिर में सवामणी, भंडारा अथवा प्रसादी बनाने पर पाबंदी लगाने की बात कही थी, लेकिन बाहर से प्रसादी लेकर भोग लगाया जा सकता है। इस सिफारिश पर असमंजस की स्थिति थी।


मंदिर ट्रस्ट भी इसको लेकर विरोध जता रहा था और उसने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष भी रखा था, लेकिन कोर्ट ने सीईसी की सिफारिशों को मानने के लिए साफ आदेश दे दिए है। क्योंकि इलेक्ट्रिक बसे चलने से मंदिर कमेटी को भी नुकसान होगा। इन बसों के वहां रुकने अथवा आने जाने का समय निश्चित रहेगा।

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