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Alwar News: वन विभाग की बढ़ी मुश्किल, अलवर का पैंथर तो हाथ आया नहीं, अब बहरोड़ में लेपर्ड ने मचाई दहशत
Sun, 08 Dec 2024 06:09 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Sun, 08 Dec 2024 06:09 PM IST
सार
वन विभाग ने रेस्क्यू के लिए नया प्लान बनाया है। सरिस्का टाइगर रिजर्व से जुड़े इन जानवरों का बाहर निकलना जंगल में टाइगरों की बढ़ती संख्या के कारण हो रहा है। ड्रोन से निगरानी और पिंजरे लगाने जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।
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सरिस्का के सीसीएफ संग्राम सिंह RR कॉलेज में पेंथर की लोकेशन देखते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अलवर के पॉश इलाके राजऋषि कॉलेज में पैंथर अभी वन विभाग के हाथ भी नहीं आ पाया है कि बहरोड़ में भी रविवार को एक लेपर्ड दिखाई दिया। ये जंगली जानवर सरिस्का में टाइगरों की संख्या बढ़ने से पेरिफेरी रेंज से बाहर आबादी में आ रहे हैं, जिससे लोगों में दहशत फैल रही है।
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बहरोड़ में लेपर्ड सबसे पहले स्कूल नंबर-3 के पास दिखाई दिया, जिससे लोगों में हड़कंप मच गया। लोगों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। तब तक लेपर्ड सबलपुरा-जैतपुरा मोहल्ले के खेतों की ओर भाग गया। अब जैतपुरा मोहल्ले की एक पुरानी खंडहर हवेली में छिपा हुआ है। लेपर्ड को रेस्क्यू करने के प्रयास जारी है।
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इधर, छठे दिन तक लगातार कोशिश के बाद भी राजऋषि काले में आए लेपर्ड पकड़ में नहीं आया तो सरिस्का CCF ने मौके पर पहुंचकर नए प्लान की तैयारी की है। CCF संग्राम सिंह ने बताया लेपर्ट पकड़ में इसलिए नहीं आ पा रहा क्योंकि वह एक जगह में अपने आप को कम्फर्ट करने के लिए काफी समय लगाता है। यहां आस-पास आवासीय क्षेत्र है। इसलिए लेपर्ड थोड़ा डरा और सहमा हुआ है। अभी वह लगातार हमारे लगाए हुए दो पिंजरों के पास तक आया जरूर, लेकिन वापस चला गया। वह अभी अपने आप को कंफर्ट कर रहा है। जैसे ही कंफर्ट हो जाएगा उसके बाद वह पिंजरे में रखे हुए जीव-जंतुओं का शिकार करने का प्रयास करेगा।
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लेपर्ड को पकड़ने के लिए हमारी टीम ने एक नया प्लान बनाया है। उसके तहत अब अन्य और लोकेशन पर पिंजरे लगाए जाएंगे, क्योंकि लेपर्ड इस जंगल में ही रह रहा है। सबसे अच्छी और सुरक्षित बात ये है कि वह आसपास कॉलोनियों में नहीं जा पा रहा है। वहां नहीं जाने से आसपास के लोग सुरक्षित हैं। अगर आसपास क्षेत्र में शांति रहे तो लेपर्ड वापस सरिस्का में भी जा सकता है।
ड्रोन से निगरानी में है समस्या
ड्रोन कैमरे से निगरानी तो रखी जा सकती है, लेकिन यह बड़ा और घना जंगल है। नीचे बैठा हुआ वन्य प्राणी आसानी से नहीं दिख पाता। अगर बात करें लेपर्ड की तो यह छुपने में बड़ा माहिर जानवर है। आज पूरी टीम के साथ रिवर्क करने के बाद यह तय किया जाएगा कि कहां-कहां अलग से पिंजरा लगाया जाए। ट्रेंक्यूलाइज करने वाली टीम काफी सक्षम है, जिसने मौके पर जाकर लेपर्ड के मूवमेंट और उसके आने जाने के पगमार्क को देखा है। लेपर्ड को जल्द ही पकड़ कर सरिस्का में छोड़ा जाएगा।