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Ajmer News: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 814वें उर्स का औपचारिक आगाज कल, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
Tue, 16 Dec 2025 04:24 PM IST
अजमेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: अजमेर ब्यूरो
Updated Tue, 16 Dec 2025 04:24 PM IST
सार
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 814वें उर्स की औपचारिक शुरुआत कल से होने जा रही है। उर्स का झंडा चढ़ाने के बाद रजब का चांद दिखाई देने के बाद 21 या 22 दिसंबर की रात से उर्स की विधिवत शुरुआत होगी।
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814वें उर्स का औपचारिक आगाज कल से
विस्तार
अजमेर स्थित सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 814वें उर्स का औपचारिक आगाज कल 17 दिसंबर को दरगाह के बुलंद दरवाजे पर झंडा चढ़ाने के साथ होगा। इस ऐतिहासिक परंपरा के निर्वहन के लिए भीलवाड़ा का गौरी परिवार अजमेर पहुंच चुका है। झंडा चढ़ाने की रस्म में गौरी परिवार के वर्तमान मुखिया फखरूद्दीन गौरी के नेतृत्व में परिवार के सदस्य शामिल होंगे।
गौरी परिवार का यह दल असर की नमाज के बाद अजमेर पहुंचा, जहां उन्होंने दरगाह के मुतवल्ली परिवार के सैयद मारूफ चिश्ती से मुलाकात की। सैयद मारूफ चिश्ती की सदारत में ही कल 17 दिसंबर को झंडे का जुलूस निकाला जाएगा। फिलहाल गौरी परिवार के सदस्य अकबरी मस्जिद के पास ठहरे हुए हैं, जहां झंडे से संबंधित आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
हिजरी संवत के जमादिउस्सानी महीने की 25 तारीख, यानी कल 17 दिसंबर को शाम करीब साढ़े चार बजे झंडे का जुलूस दरगाह गेस्ट हाउस से रवाना होगा। माजे-बाजे और सूफियाना कलाम के बीच निकलने वाले इस जुलूस की सदारत सैयद मारूफ चिश्ती करेंगे। जुलूस रोशनी के वक्त से पहले बुलंद दरवाजे पर पहुंचेगा, जहां झंडा चढ़ाया जाएगा। इसी के साथ 814वें उर्स का औपचारिक आगाज माना जाएगा। रजब का चांद दिखाई देने पर 21 या 22 दिसंबर की रात से उर्स की विधिवत शुरुआत होगी, जिसमें देश-विदेश से जायरीन बड़ी संख्या में शिरकत करेंगे।
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ये भी पढ़ें: Railway News: बालोतरा–पचपदरा नई रेल लाइन के FLS को मंजूरी, रिफाइनरी तक पहुंचेगी रेल कनेक्टिविटी
झंडा चढ़ाने की परंपरा अजमेर दरगाह में विशेष महत्व रखती है। इसकी शुरुआत वर्ष 1928 में पेरहवर के पीर-ओ-मुर्शिद हजरत सैयद अब्दुल सतार बादशाह जान ने की थी। इसके बाद वर्ष 1944 से भीलवाड़ा के लाल मोहम्मद गौरी का परिवार इस परंपरा को निभाता आ रहा है। लाल मोहम्मद गौरी ने 1944 से 1991 तक झंडा चढ़ाया, फिर मोइनुद्दीन गौरी ने 2006 तक यह रस्म अदा की। इसके बाद से लगातार फखरूद्दीन गौरी इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं।
इस बीच बीते दिनों अजमेर दरगाह और जिला कलेक्ट्रेट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। उर्स मेले के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी, वहीं मेटल डिटेक्टर सहित अन्य उपकरणों से लगातार जांच की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि जायरीनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और उर्स के दौरान हर स्तर पर चौकसी बरती जाएगी।
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गौरी परिवार का यह दल असर की नमाज के बाद अजमेर पहुंचा, जहां उन्होंने दरगाह के मुतवल्ली परिवार के सैयद मारूफ चिश्ती से मुलाकात की। सैयद मारूफ चिश्ती की सदारत में ही कल 17 दिसंबर को झंडे का जुलूस निकाला जाएगा। फिलहाल गौरी परिवार के सदस्य अकबरी मस्जिद के पास ठहरे हुए हैं, जहां झंडे से संबंधित आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
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हिजरी संवत के जमादिउस्सानी महीने की 25 तारीख, यानी कल 17 दिसंबर को शाम करीब साढ़े चार बजे झंडे का जुलूस दरगाह गेस्ट हाउस से रवाना होगा। माजे-बाजे और सूफियाना कलाम के बीच निकलने वाले इस जुलूस की सदारत सैयद मारूफ चिश्ती करेंगे। जुलूस रोशनी के वक्त से पहले बुलंद दरवाजे पर पहुंचेगा, जहां झंडा चढ़ाया जाएगा। इसी के साथ 814वें उर्स का औपचारिक आगाज माना जाएगा। रजब का चांद दिखाई देने पर 21 या 22 दिसंबर की रात से उर्स की विधिवत शुरुआत होगी, जिसमें देश-विदेश से जायरीन बड़ी संख्या में शिरकत करेंगे।
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झंडा चढ़ाने की परंपरा अजमेर दरगाह में विशेष महत्व रखती है। इसकी शुरुआत वर्ष 1928 में पेरहवर के पीर-ओ-मुर्शिद हजरत सैयद अब्दुल सतार बादशाह जान ने की थी। इसके बाद वर्ष 1944 से भीलवाड़ा के लाल मोहम्मद गौरी का परिवार इस परंपरा को निभाता आ रहा है। लाल मोहम्मद गौरी ने 1944 से 1991 तक झंडा चढ़ाया, फिर मोइनुद्दीन गौरी ने 2006 तक यह रस्म अदा की। इसके बाद से लगातार फखरूद्दीन गौरी इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं।
इस बीच बीते दिनों अजमेर दरगाह और जिला कलेक्ट्रेट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। उर्स मेले के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी, वहीं मेटल डिटेक्टर सहित अन्य उपकरणों से लगातार जांच की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि जायरीनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और उर्स के दौरान हर स्तर पर चौकसी बरती जाएगी।