फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Ajmer News ›   Pushkar Fair Horses Danced to Beats of Dhol Traditional Dance Competition Captivated Domestic-Foreign Tourists

Pushkar Fair 2025: ढोल की थाप पर थिरके घोड़े, पारंपरिक नृत्य प्रतियोगिता ने मोहा देशी-विदेशी सैलानियों का मन

Sat, 01 Nov 2025 07:19 PM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर/पुष्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर/पुष्कर Published by: अजमेर ब्यूरो Updated Sat, 01 Nov 2025 07:19 PM IST
सार

Pushkar Fair Horse Dance: पुष्कर मेले में आयोजित अश्व नृत्य प्रतियोगिता ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देशभर से आए अश्वपालकों ने अपने प्रशिक्षित घोड़ों के साथ पारंपरिक संगीत पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। इस आयोजन ने राजस्थान की अश्व संस्कृति और लोक परंपरा को जीवंत कर दिया।
 

विज्ञापन
Pushkar Fair Horses Danced to Beats of Dhol Traditional Dance Competition Captivated Domestic-Foreign Tourists
ढोल की थापों पर थिरके घोड़े - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अजमेर के विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले में शनिवार को आयोजित अश्व नृत्य प्रतियोगिता ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मेला मैदान में देश के विभिन्न हिस्सों से आए अश्वपालकों और उनके प्रशिक्षित घोड़ों ने पारंपरिक संगीत की थाप पर शानदार नृत्य प्रदर्शन किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच घोड़ों ने अपने मालिकों के इशारों पर अनोखे करतब दिखाकर सबका दिल जीत लिया।
विज्ञापन


ढोल की थाप पर थिरके अश्व
विज्ञापन

 
घोड़ों की थिरकन पर झूमे सैलानी, मैदान में छाया उत्साह
मेला मैदान में जब पारंपरिक संगीत की लय बजी, तो घोड़े और घोड़ियां अपनी ताल पर झूम उठे। किसी ने दो पैरों पर खड़े होकर नृत्य किया, तो किसी ने चारपाई पर चढ़कर संतुलन का अद्भुत प्रदर्शन किया। दर्शकों में मौजूद देशी और विदेशी सैलानियों ने इस दृश्य का भरपूर आनंद लिया। हर प्रदर्शन के बाद तालियों की गूंज ने मैदान को जीवंत बना दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें- Ajmer: पुष्कर मेले में देसी जोश का जलवा, स्थानीय टीम ने विदेशी सैलानियों को रोमांचक कबड्डी मुकाबले में दी मात
 
राजकोट से आए आरिफ की ‘मैडम’ ने किया मनमोहक प्रदर्शन
प्रतियोगिता में शामिल कई अश्वपालकों ने बताया कि उन्होंने अपने अश्वों को महीनों की मेहनत और प्रशिक्षण से तैयार किया है। राजकोट, गुजरात के अश्वपालक आरिफ ने बताया कि वे विशेष रूप से इस प्रतियोगिता में भाग लेने आए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी घोड़ी ‘मैडम’ को दो महीने तक विशेष प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वह मंच पर बेहतरीन प्रदर्शन कर सके। आरिफ ने गर्व से कहा कि दर्शकों की प्रशंसा और तालियों से उन्हें वर्षों की मेहनत का फल मिल गया।

ढोल की थाप पर थिरके अश्व
 
राजस्थान की अश्व संस्कृति को जीवंत बनाए रखने की कोशिश
आयोजकों ने बताया कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य राजस्थान की पारंपरिक अश्व संस्कृति और लोक विरासत को जीवंत बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल पशुपालकों में उत्साह भरते हैं, बल्कि पुष्कर मेले की अंतरराष्ट्रीय पहचान और लोकप्रियता को भी नई ऊंचाई देते हैं। पारंपरिक संगीत, लोक लय और अश्वों की थिरकन ने आज का दिन पुष्कर मेले के इतिहास में एक यादगार अध्याय बना दिया।

यह भी पढ़ें- 'चाय-बिस्किट खिला दो, तबीयत ठीक...': जनाना अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला और नवजात की मौत, परिजनों का हंगामा

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed