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Holi festival: पुष्कर में अंतरराष्ट्रीय होली फेस्टिवल, ढोल की थाप पर झूमे देसी-विदेशी सैलानी

Fri, 14 Mar 2025 12:43 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Fri, 14 Mar 2025 12:43 PM IST
सार

वराह चौक पर "ला बेला होली यूथ मंडल" के आयोजन में हजारों देसी-विदेशी पर्यटक एकत्र हुए और रंगों की बौछार के बीच नाच-गाने का आनंद लिया। वहीं, मेला मैदान में डीजे की धुन पर भी जमकर होली खेली गई। अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, इटली, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आए पर्यटकों ने पुष्कर की होली को अविस्मरणीय अनुभव बताया।

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Holi festival: Indian and foreign tourists enjoyed the International Holi Festival in Pushkar
पुष्कर में अंतरराष्ट्रीय होली फेस्टिवल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के अजमेर जिले की धार्मिक नगरी पुष्कर में हर साल होली का त्योहार बेहद खास अंदाज में मनाया जाता है। इस बार भी पुष्कर की होली को देखने और खेलने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक पहुंचे। गुलाल, संगीत और ढोल की थाप पर झूमते सैलानियों ने इस ऐतिहासिक पर्व को उत्साह के साथ मनाया। पुष्कर की होली अपनी रंगीन और जीवंत परंपराओं के कारण दुनियाभर में मशहूर हो चुकी है और यही कारण है कि विदेशी सैलानी भी इसे देखने और अनुभव करने के लिए यहां विशेष रूप से आते हैं।

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वराह चौक पर रंगों की धूम
हर साल की तरह इस बार भी पुष्कर के वराह चौक पर "ला बेला होली यूथ मंडल" द्वारा भव्य आयोजन किया गया। चौक पर हजारों की संख्या में एकत्रित देसी-विदेशी पर्यटकों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली खेली। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज और रंगों की बौछार के बीच सभी ने मिलकर नाच-गाने का भरपूर आनंद उठाया। सफेद कपड़ों में रंगों से सराबोर विदेशी सैलानियों का उत्साह देखते ही बनता था। अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, इटली, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से आए पर्यटकों ने बताया कि वे विशेष रूप से पुष्कर की होली का अनुभव करने के लिए भारत आए हैं। उनका कहना था कि उन्होंने विभिन्न देशों में होली के बारे में सुना था, लेकिन भारतीय संस्कृति और खासतौर पर पुष्कर की होली का अनुभव अद्भुत और अविस्मरणीय है।
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मेला मैदान में डीजे की धुन पर पानी की बरसात
वराह चौक के अलावा, पुष्कर के मेला मैदान में भी भव्य होली उत्सव का आयोजन किया गया। यहां डीजे की धुनों पर हजारों लोगों ने झूमकर होली खेली। स्थानीय लोगों के साथ विदेशी सैलानी भी होली के रंगों में सराबोर होकर नाचते-गाते नजर आए। पुष्कर की सड़कों पर चारों ओर पानी, रंगों की बौछार, गुलाल से भरी हुई हवाएं और ढोल-नगाड़ों की थाप हर किसी को मंत्रमुग्ध कर रही थी। इस आयोजन में राजस्थान सरकार के जल संसाधन मंत्री भी शामिल हुए। उन्होंने लोगों के साथ होली खेली और सभी को शुभकामनाएं दीं। मंत्री ने कहा कि पुष्कर की होली न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश और दुनिया में प्रसिद्ध हो चुकी है। इसे देखने के लिए हर साल हजारों पर्यटक आते हैं, जिससे स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।
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विदेशी सैलानियों का उत्साह
विदेशी सैलानियों ने इस रंगीन और पारंपरिक उत्सव का भरपूर आनंद उठाया। कई विदेशी पर्यटकों ने कहा कि वे पहले भी भारत आ चुके हैं, लेकिन पुष्कर की होली का अनुभव अनूठा है। यहां की ऊर्जा, संगीत और रंगों की बौछार उन्हें दुनिया के किसी भी अन्य उत्सव से अलग लगती है। ब्रिटेन से आई एक पर्यटक लूसी ने बताया कि भारत में होली का अनुभव करना उनके जीवन की सबसे यादगार घटनाओं में से एक है। उन्होंने कहा, "हमने सुना था कि पुष्कर की होली सबसे खास होती है, और आज यहां आकर यह सच साबित हुआ। यहां के लोग बहुत मिलनसार हैं और हमें पूरी तरह से अपनापन महसूस हुआ।" इसी तरह ऑस्ट्रेलिया से आए जैक ने कहा कि उन्होंने पहली बार भारतीय ढोल की धुन पर डांस किया और यह अनुभव उनके लिए बेहद रोमांचक रहा। उन्होंने बताया, "हम यहां केवल होली खेलने के लिए आए थे, लेकिन हमें यहां की संस्कृति, भोजन और लोगों की गर्मजोशी ने और भी ज्यादा प्रभावित किया।"


पुष्कर की होली की अनूठी पहचान
पुष्कर की होली सिर्फ रंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी है। यहां हर साल होली के अवसर पर विभिन्न आयोजन होते हैं, जिनमें भजन संध्या, लोक संगीत, राधा-कृष्ण झांकी, और पारंपरिक नृत्य शामिल होते हैं। यहां की होली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई भेदभाव नहीं होता। देसी-विदेशी, अमीर-गरीब, सभी एक साथ मिलकर इस त्यौहार को मनाते हैं। यह एक ऐसा अवसर होता है जब सभी जाति, धर्म और राष्ट्रीयता से ऊपर उठकर सिर्फ खुशी और प्रेम के रंग में रंग जाते हैं।

स्थानीय व्यापारियों को भी मिला फायदा
पुष्कर की होली के कारण न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिला बल्कि स्थानीय व्यापारियों को भी अच्छा लाभ हुआ। होटल, गेस्ट हाउस, कैफे और स्थानीय बाजारों में भारी भीड़ देखी गई। विदेशी पर्यटकों ने यहां की पारंपरिक चीजें जैसे राजस्थानी पगड़ी, कुर्ते, जूतियां और हस्तशिल्प की खरीदारी भी की। पुष्कर की होली केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि एक अनुभव है, जो हर किसी के दिल में बस जाता है। यहां आने वाले देसी-विदेशी सैलानियों ने रंगों, संगीत और उमंग से भरे इस त्यौहार का आनंद उठाया और इसे अपने जीवन की सबसे खास यादों में शामिल किया। यही वजह है कि हर साल हजारों पर्यटक यहां खिंचे चले आते हैं और पुष्कर की होली की चमक पूरी दुनिया में फैलती जा रही है।

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