Kekri: एक हजार से अधिक बच्चों को पिलाई गई नि:शुल्क आयुर्वेदिक दवा, गौशाला संस्थान द्वारा लगाया गया था शिविर
Kekri: सोना पहनने को हर व्यक्ति लालायित रहता है और यही सोना यदि शरीर को स्वस्थ व शक्तिवान बनाने वाली औषधि के रूप में गटकने को मिले, वह भी नि:शुल्क तो व्यक्ति का प्रफ्फुलित होना स्वाभाविक है। सोने जैसी अति मूल्यवान धातु के मुख्य अनुयोग से बच्चों के लिए अत्यंत फायदेमंद माना जाने वाला एक असाधारण आयुर्वेदिक नुस्खा गत आठ महीनों से केकड़ी में एक सामाजिक संगठन द्वारा बच्चों को निःशुल्क पिलाया जा रहा है।
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बच्चों में बल, बुद्धि व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए केकड़ी के बढ़ते कदम गौशाला संस्थान ने गुरुवार को आठवां नि:शुल्क स्वर्णप्राशन शिविर लगाया, जिसमें 6 माह से 16 वर्ष आयुवर्ग के 1011 बच्चों को पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण धातु व जड़ी बूटियों के मिश्रण से बना स्वर्णप्राशन कल्प पिलाया गया। यह शिविर आयुर्वेद विभाग के संयोजन में बढ़ते कदम गौशाला संस्थान केकड़ी एवं डाबर इंडिया लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में यहां अजमेरी गेट के समीप कटारिया विश्रामशाला में संचालित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के प्रांगण में लगाया गया।
शिविर का उद्घाटन राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय केकड़ी के उपप्राचार्य डॉ डीसी नापित, डॉ राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, बढ़ते कदम गौशाला संस्थान के अध्यक्ष अशोक पारीक, सहस्त्र विशाल पाराशर व आनंद सोमानी द्वारा धन्वंतरी भगवान के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। शिविर को लेकर अभिभावकों में खासा उत्साह देखा गया। सुबह से ही यहां उनका तांता सा लग गया। लोगों ने बड़े चाव से अपने बच्चों को इस असाधारण दवा की निर्धारित खुराक गटकाई। अधिकांश बच्चे ऐसे थे जो प्रति माह आयोजित इस शिविर में लगातार आ रहे हैं।
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञों के अनुसार स्वर्णप्राशन एक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसे शास्त्रोक्त विधि से पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण धातु सहित कई कीमती जड़ी बूटियों को घोटकर तैयार किया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक इस दवा को बनाते समय आसमान में पुष्य नक्षत्र का उदित रहना अनिवार्य माना गया है। इसलिए वैदिक पंचागों के अनुसार महीने के जिस दिन पुष्य नक्षत्र उदित होता है, उसी दिन यह शिविर लगाया जा रहा है। यह दवा बच्चों को नियमित प्रति माह एक बार पिलाई जाती है। स्वर्णप्राशन कल्प न केवल बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त करता है, बल्कि स्मरण शक्ति एवं बुद्धि को भी बढ़ाता है। यह उनमें सामान्य एवं जटिल रोगों को होने की आशंका को कम करता है, साथ ही यह औषधि शरीर से अनेक प्रकार के विषैले पदार्थों की सफाई भी करती है।
बढ़ते कदम गौशाला संस्थान के मीडिया प्रभारी महेन्द्र प्रधान ने बताया की आठ माह से प्रत्येक पुष्य नक्षत्र को स्वर्णप्राशन शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें स्वर्णप्राशन कल्प की अब तक करीब 8000 से अधिक खुराक बच्चों को पिलाई जा चुकी है। उन्होनें बताया कि पुष्य नक्षत्र में बच्चों को उम्र के अनुसार स्वर्ण प्राशन की तीन व छह बूंदें पिलाई जाती हैं। इसमें दवा के सेवन के आधा घंटा बाद तक उन्हें कोई आहार नहीं लेना होता है। संक्रमण की आशंका और मौसमी बीमारियों को देखते हुए यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हितकर है। उन्होनें बताया कि स्वर्ण प्राशन औषधि स्वर्ण धातु को शहद, घी व अन्य द्रव्यों के साथ घोटकर बनाई जाती है। इसमें स्वर्ण को घोटकर अत्यंत बारीक किया जाता है।
गुरुवार को इस शिविर में आयुर्वेद विभाग द्वारा आरोग्य सप्ताह के अंतर्गत सभी उम्र के 478 लोगों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक काढ़ा भी पिलाया गया। आयुर्वेद चिकित्सालय के चिकित्सकों के अनुसार यह काढ़ा मौसमी बीमारियों सहित बुखार, डेंगू, श्वास, खांसी आदि में बहुत लाभप्रद व असरकारी होता है। शिविर में बढ़ते कदम गौशाला संस्थान के सदस्यों सहित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के चिकित्सकों व आयुर्वेद महाविद्यालय में अध्यनरत छात्र-छात्राओं ने बच्चों के वजन व लंबाई के अनुसार उनका रजिस्ट्रेशन कर दवा पिलाने के कार्य में योगदान किया। शिविर का राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय केकड़ी के प्राचार्य शिवकांत शर्मा ने भी निरीक्षण किया।