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Ajmer Dargah Temple Case: दरगाह में मंदिर कैसे? हिंदू पक्ष ने पेश किए तीन दावे, खादिमों को एतराज, जानें विवाद

Fri, 29 Nov 2024 10:12 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Fri, 29 Nov 2024 10:12 AM IST
सार

राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर हिंदू सेना ने दावा किया है कि यह स्थान पहले शिव मंदिर था। इस याचिका का आधार पूर्व न्यायिक अधिकारी हरबिलास शारदा की 1911 की पुस्तक है। हिंदू पक्ष ने तीन मुख्य दावे पेश किए, जिनमें दरगाह के गुंबद और तहखाने में मंदिर के अवशेष होने की बात कही गई।

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Ajmer Dargah Temple Case: Hindu side presented three grounds for Ajmer Dargah being a temple
अजमेर दरगाह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर विवाद शुरू हो गया है। हिंदू सेना ने अपनी याचिका में दावा किया है कि दरगाह स्थल पर शिव मंदिर था। हिंदू पक्ष ने पूर्व जज हरबिलास शारदा की किताब को आधार बनाकर तीन आधार पेश किए हैं। इस पर अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी। उधर, दरगाह के खादिमों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि मकसद सिर्फ देश के सांप्रदायिक सद्भाव को खतरे में डालना है।

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सितंबर में दायर हुई थी याचिका
अजमेर दरगाह मामले में हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने सितंबर में याचिका दायर की, लेकिन मुकदमे की योग्यता पर प्रारंभिक सुनवाई क्षेत्राधिकार संबंधी विवाद के कारण विलंबित हो गई। इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मुकदमा मुंसिफ अदालत (पश्चिम) में स्थानांतरित कर दिया। नामित अदालत की ओर से सुनवाई में और देरी की गई, जिसमें अंग्रेजी में याचिका को हिंदी में अनूदित करने और सबूत और एक हलफनामा के साथ प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। एक वकील ने कहा, मुकदमे के 38 पन्नों में यह दिखाने के लिए कई संदर्भ बिंदु हैं कि जहां दरगाह स्थित है, वहां पहले से एक शिव मंदिर मौजूद था। ज्ञानवापी मामले की तरह, इस मुकदमे को खारिज करने के लिए पूजा स्थल अधिनियम-1991 को लागू नहीं किया जा सकता है।
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हिंदू पक्ष के तीन दावे

  • हिंदू सेना के तीन वकीलों में से एक, वकील योगेश सुरोलिया ने कहा कि कानूनी टीम ने अदालत को पूर्व न्यायिक अधिकारी और शिक्षाविद हरबिलास शारदा की 1911 की पुस्तक अजमेर: हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव की एक प्रति सौंपी, जिसमें पहले से मौजूद अवशेषों का उल्लेख है। इस स्थान पर स्थित शिव मंदिर का उपयोग दरगाह के निर्माण में किया गया था।
  • वकील राम स्वरूप बिश्नोई ने कहा, हमने अदालत को सूचित किया कि मंदिर को ढहाए जाने तक वहां लगातार धार्मिक अनुष्ठान होते रहे।
  • तीसरे वकील, विजय शर्मा के अनुसार दरगाह के गुंबद में मंदिर के टुकड़े हैं और तहखाने में एक पवित्र गर्भ गृह मौजूद है।


सज्जादा नशीन ने जताई नाराजगी, मसले को बताया "प्रचार" और "निजी स्वार्थ" 
अजमेर दरगाह को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। दरगाह में मंदिर के दावे पर सज्जादा नशीन सैयद जैनुल आबिदीन अली खान ने इसे "प्रचार" और "निजी स्वार्थ" का मामला बताया। 

याद दिलाई आरएसएस प्रमुख की बात
सज्जादा नशीन ने उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर को हुई पत्थरबाजी का हवाला दिया। देश भर में मस्जिदों पर हाल ही में किए गए दावों पर अजमेर दरगाह प्रमुख ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 2022 में क्या कहा था? 'कब तक हर मस्जिद में शिवलिंग ढूंढते रहोगे?' उन्होंने कहा कि संभल में भी यही किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि पांच बेगुनाह लोगों की जान चली गई। उन्होंने कहा कि संभल जैसी घटनाओं के कारण मासूम लोग मारे जाते हैं। पांच मृतकों में से दो परिवार के इकलौते कमाने वाले थे।

बढ़ते विवादों पर जताई चिंता
ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल के अध्यक्ष सैयद नासिरुद्दीन चिश्ती ने भी धार्मिक स्थलों पर दावों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हर दूसरे दिन मस्जिदों और दरगाहों पर दावे किए जा रहे हैं। यह हमारे समाज और देश के हित में नहीं है। आज भारत एक वैश्विक शक्ति बन रहा है। हमें मंदिर-मस्जिद विवादों से आगे बढ़ना चाहिए।

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