Ajmer: छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के विरोध में छात्रों का प्रदर्शन, कुलपति के खिलाफ हुई नारेबाजी
Ajmer: एबीवीपी ने ये भी आरोप लगाया है कि कुछ समय में हुई आत्महत्या की घटनाओं को भी प्रशासन ने दबाने का प्रयास किया है। छात्र लोकपाल द्वारा दी गई रिपोर्ट को आज तक गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर होती है।
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राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय (CURAJ) में छात्रों के खिलाफ कथित तानाशाही रवैये और अनुशासनात्मक कार्रवाई के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की अजमेर महानगर इकाई ने शुक्रवार को जोरदार प्रदर्शन किया। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कुलपति का पुतला दहन किया और शिक्षा मंत्री, भारत सरकार के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व एबीवीपी के प्रदेश मंत्री जितेंद्र लोधा ने किया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन का आरोप लगाया। लोधा ने कहा कि प्रशासन ने 300 मीटर के विरोध-प्रतिबंध का आदेश जारी कर छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को कुचलने का प्रयास किया है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) और 19(1)(ख) का खुला उल्लंघन है।
ज्ञापन के माध्यम से एबीवीपी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े छात्रों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार करते हुए उन्हें छात्रावास से निष्कासित कर दिया, जबकि कुछ अन्य छात्र जो भ्रष्टाचार या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए गए, उन्हें मामूली सजा दी गई। विशेष रूप से, एबीवीपी कार्यकर्ताओं को जहां आजीवन छात्रावास निष्कासन और 30 दिन का परिसर प्रतिबंध दिया गया, वहीं सुन्नी स्टूडेंट फेडरेशन के छात्रों को, जिन्होंने प्रतिबंधित बीबीसी डॉक्युमेंट्री का प्रदर्शन किया, मात्र 14 दिनों का निलंबन झेलना पड़ा।
एबीवीपी नेताओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन न केवल छात्रहितों की उपेक्षा कर रहा है, बल्कि कैंपस में व्याप्त कई गंभीर समस्याओं की अनदेखी भी कर रहा है। इनमें मैस का अस्वास्थ्यकर भोजन, प्रदूषित पेयजल, चौबीस घंटे चिकित्सा सुविधा का अभाव, अतिथि गृह शुल्क में वृद्धि, फिजियोथेरेपी केंद्र में लिफ्ट की अनुपलब्धता, छात्राओं के हॉस्टल में असभ्य व्यवहार और ठेका प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे शामिल हैं।
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विगत कुछ समय में हुई आत्महत्या की घटनाओं को भी प्रशासन ने दबाने का प्रयास किया है। छात्र लोकपाल द्वारा दी गई रिपोर्ट को आज तक गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर होती है। अजमेर महानगर मंत्री राजेन्द्र कालस ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली न केवल गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि पूरी तरह छात्रविरोधी भी है। उन्होंने मांग की कि छात्र कार्यकर्ताओं पर की गई कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और एक निष्पक्ष तथ्यान्वेषी समिति गठित की जाए, जो स्वतंत्र रूप से मामले की जांच कर सके।
जितेंद्र लोधा ने कहा कि एबीवीपी अनुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों की पक्षधर है, लेकिन जब प्रशासन स्वयं अन्याय और दमन पर उतर आए तो उसके खिलाफ शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक रूप से आवाज़ उठाना हमारा कर्तव्य बन जाता है।