महीना वसूलते थे डीएसपी और थानेदार, हुए गिरफ्तार
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अजमेर के डेढ़ साल पुराने मामले में एसीबी ने एक पुलिस उपाधीक्षक और आठ निलंबित थानेदारों को गिरफ्तार कर लिया। भ्रष्टाचार निरोधक मामलात की अदालत के न्यायाधीश फूलचंद झाझडिया ने आरोपितों को 23 जुलाई तक जेल भेजने के आदेश दिए हैं।
इस मामले में इससे पहले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा, दलाल रामदेव कसेरा तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल गिरफ्तार हुए थे, जो जमानत पर हैं।
दबिश देकर एसीबी ने थानों से वसूली बंधी की रकम 2,05,000 रुपए बरामद कर मीणा को गिरफ्तार किया था। अब एसीबी ने इसी मामले में निलंबित थानेदार रविंद्र यादव, प्रमोद स्वामी, सुनील बिश्नोई, बंशीलाल चनिया, खान मोहम्मद, हनुमान सिंह, जयपाल सिंह धारणिया (विश्नोई), कुशाल चौरडिया और पुलिस उपाधीक्षक गोपाललाल को गिरफ्तार किया।
दलाल से था संपर्क, पर्चियां भी बरामद
इस मामले में कुछ पर्चियां बरामद की गई थीं। विधि विज्ञान प्रयोगशाला से जांच के बाद इनकी रिपोर्ट भी अदालत में पेश की जा चुकी है। आरोपितों के दलाल रामदेव कसेरा से फोन पर निरंतर संपर्क करने के आरोप हैं। पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को अदालत में पेश किया। अदालत में चार आरोपित थानेदारों की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र भी दाखिल किया गया।
साथ ही, आरोपितों ने जेल में जानमाल को खतरा होने का प्रार्थना पत्र भी पेश किया, जिसे वारंट के साथ जेल प्रशासन को भेजा गया। मामले में आरोपित सावर के तत्कालीन थानेदार संजय शर्मा अब भी फरार है। पुलिस के अनुसार इस मामले में फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।
बहुचर्चित है मामला
मामले के तहत 2 जनवरी 2013 को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा के निवास पर दबिश देकर एसीबी ने थानों से वसूली बंधी की रकम 2,05,000 रुपए बरामद कर मीणा को गिरफ्तार किया था।
तभी से ये मामला सुर्खियों में चल रहा है। मीणा के साथ रकम लेकर गए दलाल रामदेव कसेरा को भी गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल गिरफ्तार हुए। मीणा, सोनवाल और कसेरा जमानत पर हैं।