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450 डॉक्टरों के तबादले बने 'गले की हड्डी'

Thu, 06 Jun 2013 03:07 PM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Thu, 06 Jun 2013 03:07 PM IST
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transfer of 450 doctors has become a problem
पंजाब में सेहत सुविधाओं में सुधार के लिए 100 अस्पतालों में सभी सुविधाएं दिए जाने की योजना पर अमल करते हुए एक साथ 450 डाक्टरों केतबादला आदेश सरकार और सेहत मंत्री मदन मोहन मित्तल के गले की हड्डी बन चुकेहैं।
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पीसीएमएस एसोसिएशन ने इसका विरोध करते हुए आरोप लगाया कि तबादले पंजाब सरकार द्वारा बनाए नियमों का उल्लंघन कर किए गए हैं और इसमें काफी विसंगतियां हैं।

तबादलों को लेकर 20 मई को पीसीएमएस एसोसिएशन और प्रधान सचिव सेहत विनी महाजन केबीच हुई बैठक में तय हुआ था कि डाक्टरों के तबादले नियमों के अनुरूप होंगे।

इसमें सिनियोरिटी, कपल केस, हैंडीकैप्ट और रिटायरमेंट के नजदीक पहुंच चुकेडाक्टरों का तबादला नियमों के अनुरूप होगा। महाजन ने डायरेक्टर सेहत डा. अशोक नय्यर को आदेश दिए कि एसोसिएशन के साथ एक और बैठक कर वह तबादलों का पूरा ड्राफ्ट तैयार कर लें।
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काफी समय बीत जाने के बाद भी डा. नय्यर ने बैठक नहीं बुलाई और 3 जून को अचानक 450 डाक्टरों के तबादला आदेश जारी कर दिए। इसे देखते हुए पीसीएमएस एसोसिएशन ने मोरचा खोल दिया।
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एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान डा. हरदेव सिंह ने कहा कि सौ अस्पतालों पर फोकस किए जाने की सरकार की योजना का वह स्वागत करते हैं लेकिन एसोसिएशन को विश्वास में लिए बगैर मनमाने तौर पर किए गए तबादले मंजूर नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि सूची में उन डाक्टरों के नाम भी शामिल हैं जो एसएमओ तैनात थे लेकिन उनका तबादला जिलों के अस्पताल में कर दिया गया जबकि कई केस ऐसे भी हैं कि सीनियर डाक्टरों का तबादला उन अस्पतालों में कर दिया जहां जूनियर एसएमओ तैनात हैं।

उन्होंने कहा कि एसोसिएशन की स्टेट कमेटी की बैठक 8 जून को लुधियाना में होगी और अगली रणनीति तय होगी।

तबादलों में क्या हुआ नियमों का उल्लंघन
- सिनियोरिटी लिस्ट की अनदेखी
- कपल केस, हैंडीकैप्ट रुल्स की अनदेखी
- कई अस्पतालों में जरूरत से कम डाक्टरों की तैनाती
-कई अस्पतालों में जरूरत से अधिक डाक्टरों की तैनाती
- एक साल में डाक्टरों के तीन बार तबादले
- एनआरएचएम नियमों की धज्जियां उड़ाई


पारदर्शी और नियमों के मुताबिक हुए तबादले : डा. नय्यर
डायरेक्टर हेल्थ डा. अशोक नय्यर ने कहा कि तबादलों में नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है। कई जिलों में सीनियर डाक्टर बिना पोस्ट के तैनात हैं इसलिए उनके तबादले किए गए हैं। लोगों को समूची सेहत सुविधाएं देने के लिए तबादले जरूरी थे इसलिए किए गए।


उन्हेंने कहा कि एक डिस्पेंसरी में विशेषज्ञ डाक्टर की क्या जरूरत हैं जबकि मालवा के कई जिलों मसलन फिरोजपुर, फाजिल्का, मुक्तसर आदि में एक भी गायनकोलॉजिस्ट नहीं है। सरकार को आमजन की सुविधाएं भी देखनी हैं क्योंकि जवाबदेही विभाग और सरकार की है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कई कुछ गलती हुई है तो उसमें सुधार किया जाएगा चूंकि पहली बार इतनी बड़ी संख्या में तबादले हुए हैं।
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