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पाक जेल में आईएसआई का खेल: सुरजीत

Fri, 03 May 2013 01:16 AM IST
अनिल कुमार/फिरोजपुर
अनिल कुमार/फिरोजपुर Updated Fri, 03 May 2013 01:16 AM IST
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sarabjit singh death

पाकिस्तान की जेलों में वहां का खुफिया संगठन मानवाधिकारों को ताक पर रख कर काम करता है और किसी की भी हत्या करवा सकता है।

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सरबजीत की मौत के बाद वीरवार को गांव फिड्डे निवासी सुरजीत सिंह ने यह बात अपने अनुभव से कही। उन्होंने लाहौर की कोट लखपत जेल में 31 साल गुजारे हैं।

उन्हें पिछले साल नवंबर में ही पाकिस्तान की जेल से तब रिहाई मिली थी जब मीडिया में यह खबर उड़ी थी कि सरबजीत को रिहा किया जा रहा है।
 
उन्होंने कहा कि सरबजीत पर जिस तरह से कोट लखपत जेल में जानलेवा हमला किया गया वह अचानक हुई वारदात नहीं है। वह सोची समझी साजिश थी और आईएसआई का यही तरीका है।
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सुरजीत सिंह ने कैद में सरबजीत सिंह के साथ लंबा वक्त गुजारा है। उनके अनुसार जहां सरबजीत को रखा गया है, वहां कोई भी व्यक्ति जेल सुपरिंटेंडेंट की इजाजत के बिना नहीं जा सकता।
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जहां सरबजीत बंद था उस बैरक का एक ही दरवाजा था। जहां तक सवाल कैदियों के हमले का है तो कैदी चाहे किसी देश के हों आपस में दुश्मनी नहीं रखते।

कृपाल सिंह भी निशाने पर
सुरजीत सिंह ने कहा कि कोट लखपत जेल में पिछले 17 साल से गुरदासपुर निवासी कृपाल सिंह भी बंद है। उसे भी मारने की साजिश रची जा रही है। 26 जनवरी को जेल में कृपाल सिंह पर हमला भी किया गया था। भारतीय कैदियों को जेल में कई-कई दिन सोने नहीं दिया जाता।

जेल में पड़ी हैं 28 भारतीयों की अस्थियां
सुरजीत सिंह के अनुसार पाकिस्तानी जेलों में तकरीबन 128 भारतीय कैदी बंद हैं। कोट लखपत जेल में 43 कैदी बंद हैं और इनमें से छह को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी हैं।

इनमें से कुछ मछुआरे भी हैं। कई ऐसे भारतीय कैदी हैं जो पागल हो चुके हैं। इन्हें पर्याप्त इलाज भी मुहैया नहीं है। 28 कैदी मर चुके हैं, इनकी अस्थियों के कलश जेल में ही पड़े हैं।


सक्रिय है एक सोसाइटी
पाकिस्तान की जेलों में बंद कैदियों छुड़वाने के लिए  विश्व भाई मरदाना यादगारी कीर्तन दरबार सोसाइटी भी सक्रिय है। इनकी जानकारी में पंजाब और हरियाणा के ऐसे 17 मामले हैं जिनके घर का कोई सदस्य पाकिस्तानी जेल में हैं।

इन सभी के पत्र सोसाइटी की ओर से भारत और पाकिस्तान सरकार को भेजे गए हैं। सोसोइटी के प्रधान हरपाल सिंह भुल्लर के अनुसार इन सभी कैदियों की पहचान और रिहाई के अनुरोध के साथ सभी दस्तावेज दोनों सरकारों को भेजे हैं। अब हम दोनों सरकारों की ओर से कोई सकारात्मक कदम उठाए जाने का इंतजार कर रहे हैं।

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