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मजदूरों-किसानों का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Wed, 29 Jun 2016 07:08 PM IST
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पटियाला के नाभा में सरकार के खिलाफ अर्थी फूंक प्रदर्शन करते जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी ग्रामीण मजदूर यूनियन के सदस्य।
- फोटो : अमर उजाला
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जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी ग्रामीण मजदूर यूनियन और कीरती किसान यूनियन की ओर से नाभा ब्लॉक के गांवों में पंजाब सरकार और प्रशासन की अर्थियां फूंककर रोष प्रदर्शन किया गया।
कमेटी के नेताओं बलवंत सिंह, सोहन सिंह, इंद्रजीत सिंह ने कहा कि पंचायती जमीन में से दलितों के हिस्से की जमीन कम रेट पर लेने और जरूरतमंद परिवारों को पांच-पांच मरले के प्लॉट दिलाने के लिए सरकार के खिलाफ लगातार संघर्ष किया जा रहा है। सरकार के कानों पर अब तक जूं नहीं रेंगी है। इसके रोष में बुधवार को नाभा के गांव बीनाहेड़ी, अचल, बोडाकलां, ककराला, मलको में सरकार के खिलाफ अर्थी फूंक प्रदर्शन किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि गांव में दलितों के साथ धक्केशाही की जा रही है और संगरूर में हक मांगकर लोगों पर झूठे पर्चे दर्ज करके जेल भेजा जा रहा है। यह प्रदेश सरकार के दलित विरोधी चेहरे को बेनकाब करता है। मांगों को लेकर 20 जुलाई को पंजाब भर के किसान-मजदूर संगरूर के प्रशासन को घेरने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं। फिर भी मांगें न मानी गई तो जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी की अगुवाई में अपने हिस्से की जमीनों पर कब्जा करने के लिए उन्हें मजबूर होना पड़ेगा।
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कमेटी के नेताओं बलवंत सिंह, सोहन सिंह, इंद्रजीत सिंह ने कहा कि पंचायती जमीन में से दलितों के हिस्से की जमीन कम रेट पर लेने और जरूरतमंद परिवारों को पांच-पांच मरले के प्लॉट दिलाने के लिए सरकार के खिलाफ लगातार संघर्ष किया जा रहा है। सरकार के कानों पर अब तक जूं नहीं रेंगी है। इसके रोष में बुधवार को नाभा के गांव बीनाहेड़ी, अचल, बोडाकलां, ककराला, मलको में सरकार के खिलाफ अर्थी फूंक प्रदर्शन किए गए हैं।
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उन्होंने कहा कि गांव में दलितों के साथ धक्केशाही की जा रही है और संगरूर में हक मांगकर लोगों पर झूठे पर्चे दर्ज करके जेल भेजा जा रहा है। यह प्रदेश सरकार के दलित विरोधी चेहरे को बेनकाब करता है। मांगों को लेकर 20 जुलाई को पंजाब भर के किसान-मजदूर संगरूर के प्रशासन को घेरने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं। फिर भी मांगें न मानी गई तो जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी की अगुवाई में अपने हिस्से की जमीनों पर कब्जा करने के लिए उन्हें मजबूर होना पड़ेगा।
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