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Patiala: पंजाबी यूनिवर्सिटी में छात्र संगठनों का हंगामा, सरकार पर लगाया पीयू की सुध न लेने का आरोप
Tue, 21 Feb 2023 12:56 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 21 Feb 2023 12:56 PM IST
सार
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पूर्व की चन्नी सरकार की ओर से नोटिफिकेशन के बावजूद मौजूदा मान सरकार की ओर से अब तक न तो यूनिवर्सिटी का कर्ज टेकओवर किया गया और न ही ग्रांट में वृद्धि की गई। सांझा विद्यार्थी मोर्चा ने मांग की कि पीयू की ग्रांट में इसके कुल वित्तीय खर्चों के मुताबिक वृद्धि की जाए।
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पटियाला में पंजाबी यूनिवर्सिटी में छात्रों का प्रदर्शन।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
पंजाब सरकार के विरोध में पंजाबी यूनिवर्सिटी में विभिन्न छात्र जत्थेबंदियों ने मंगलवार को यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट बंद करके सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक जोरदार रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान किसी को भी यूनिवर्सिटी में प्रवेश नहीं करने दिया गया है। इस मौके नारेबाजी करते हुए आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार से यूनिवर्सिटी की चरमराती आर्थिक स्थिति में सुधार की मांग की।
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छात्रों ने कहा कि एक तरफ आज सरकार की तरफ से अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मातृ भाषा पंजाबी के प्रचार व प्रसार को स्थापित की गई पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। वर्तमान में यूनिवर्सिटी पर 150 करोड़ का ऋण है।
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पूर्व चन्नी सरकार के नोटिफिकेशन के बावजूद मौजूदा मान सरकार ने अब तक न यह ऋण टेकओवर किया गया और न ही यूनिवर्सिटी को मिलने वाली ग्रांट में वृद्धि की है। जिसके चलते पीयू के मुलाजिमों व अध्यापकों को दो-दो महीने देरी से तनख्वाह मिलती हैं। ऐसे में उन्हें आंदोलन के रास्ते जाना पड़ता है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। सरकार को तत्काल प्रभाव से इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
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इस मौके सांझा विद्यार्थी मोर्चा के अमनदीप सिंह, रशपिंदर जिम्मी, अमृतपाल, वरिंदर खुराना ने मांग की है कि पीयू की ग्रांट में इसके कुल वित्तीय खर्चों के मुताबिक वृद्धि की जाए। साथ ही यूनिवर्सिटी कैंपस व इसके कांस्टीच्युएंट कॉलेजों, नेबरहुड़ व रीजनल कैंपसों में प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों, सहायक प्रोफेसरों व अन्य कर्मचारियों की तुरंत पक्के तौर पर भर्ती की जाए। नए हॉस्टलों का निर्माण किया जाए। मौजूदा हॉस्टलों की हालत भी खस्ता है, इनकी भी मरम्मत कराई जाए। यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी के बजट में बढ़ोतरी की जाए और कांस्टीच्युएंट कॉलेजों की ग्रांट में वृद्धि करते हुए इनको यूनिवर्सिटी से अलग तौर पर ग्रांट दी जाए। मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।