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‘खिलाड़ियों के चुनाव में सियासत का बोलबाला’
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Wed, 31 Aug 2016 03:12 PM IST
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पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में आयोजित भाषण मुकाबले में विजेता रहे स्टूडेंट्स को सम्मानित करते प्रोफेसर हरजिंदर वालिया।
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाबी यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग में रियो ओलंपिक और हिंदुस्तान विषय पर आयोजित चर्चा में 50 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया।
इस विचार चर्चा के बाद यह बात उभर कर सामने आई कि देश को खेलों में अच्छे प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों के अभ्यास दौरान खुलकर आर्थिक मदद करनी चाहिए। मेडल जीतने के बाद पैसा देना भी ठीक है, लेकिन जीतने की तैयारी के लिए भी फंड मुहैया कराने चाहिए। ज्यादातर स्टूडेंट्स का मानना था कि ओलंपिक में मेडल जीतने की क्षमता होने के बावजूद खिलाड़ियों की चुनाव प्रक्रिया में सियासत का बोलबाला होने के कारणसही खिलाड़ियों की सिलेक्शन नहीं होती है।
विभाग के प्रमुख प्रोफेसर हरजिंदर वालिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जीतने के लिए लगातार अभ्यास की जरूरत होती है। भारतीयों को ओलंपिक जीतने के लिए 10-15 साल पहले तैयारी शुरू करनी चाहिए। राज्य सरकारों को इस तरफ विशेष ध्यान देकर गांवों में हुनर को तलाशने की जरूरत है। इस मुकाबले में सुखचैन सिंह पहले नंबर पर आया और माही आहलूवालिया व संदीप कुमार ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। अंगद और सुखवीर कौर तीसरे स्थान पर रहे। बाद में विजेताओं को सम्मानित किया गया।
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इस विचार चर्चा के बाद यह बात उभर कर सामने आई कि देश को खेलों में अच्छे प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों के अभ्यास दौरान खुलकर आर्थिक मदद करनी चाहिए। मेडल जीतने के बाद पैसा देना भी ठीक है, लेकिन जीतने की तैयारी के लिए भी फंड मुहैया कराने चाहिए। ज्यादातर स्टूडेंट्स का मानना था कि ओलंपिक में मेडल जीतने की क्षमता होने के बावजूद खिलाड़ियों की चुनाव प्रक्रिया में सियासत का बोलबाला होने के कारणसही खिलाड़ियों की सिलेक्शन नहीं होती है।
विभाग के प्रमुख प्रोफेसर हरजिंदर वालिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जीतने के लिए लगातार अभ्यास की जरूरत होती है। भारतीयों को ओलंपिक जीतने के लिए 10-15 साल पहले तैयारी शुरू करनी चाहिए। राज्य सरकारों को इस तरफ विशेष ध्यान देकर गांवों में हुनर को तलाशने की जरूरत है। इस मुकाबले में सुखचैन सिंह पहले नंबर पर आया और माही आहलूवालिया व संदीप कुमार ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। अंगद और सुखवीर कौर तीसरे स्थान पर रहे। बाद में विजेताओं को सम्मानित किया गया।
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