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‘सभी वर्गों के मुलाजिम रेगुलर किए जाएं’
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Sat, 11 Jun 2016 09:52 PM IST
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पटियाला में आयोजित पंजाब सबोर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन की डेलीगेट कांफ्रेंस में मौजूद लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब सबोर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन की डेलीगेट कांफ्रेंस शनिवार को मिनी सचिवालय में हुई। इसमें सरकारी व अर्द्ध सरकारी विभागों में से डेलीगेटों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर जहां पंजाब में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं पर चिंता जताई गई, वहीं किसानों की ओर से लगातार की जा रही आत्महत्याओं पर चिंता जताई गई। साथ ही सरकार से सभी वर्गों के मुलाजिम रेगुलर करने, डीए का बकाया देने समेत और कई मांगें उठाई गईं।
इस मौके पर फेडरेशन के प्रदेश चेयरमैन सजन सिंह, प्रधान दर्शन सिंह लुबाना, सचिव रणजीत सिंह राणवां आदि ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने फैसला किया था कि सरकारी व अर्द्ध सरकारी विभागों में से ठेकेदारों को बाहर निकाल कर कर्मियों को तनख्वाहों की अदायगी सीधी की जाएगी और सभी वर्ग के कर्मचारी रेगुलर किए जाएंगे। साथ ही पंजाब छठे वेतन आयोग का चेयरमैन रिटायर्ड हाईकोर्ट का जज लगाया जाएगा। इसी तरह से सीएम ने और भी कई मांगें मानी थीं, लेकिन अभी तक इन पर अमल नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि सीएम संगत दर्शनों पर करोड़ों रुपये लुटा रहे हैं, लेकिन मिनीमम वेज लागू नहीं कर रही है। मुलाजिमों व पेंशनरों का 2014 से डीए का 23 महीने का बकाया नहीं दिया जा रहा है। जनवरी 2016 की छह प्रतिशत डीए की किश्त जारी नहीं की गई। दिहाड़ीदार, ठेका आधारित, आउट सोर्सिंग, पार्ट टाइम, वर्कचार्ज कर्मचारी जो पिछले 10, 15 और 20 सालों से काम कर रहे हैं, उन्हें रेगुलर नहीं किया जा रहा है।
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इस मौके पर फेडरेशन के प्रदेश चेयरमैन सजन सिंह, प्रधान दर्शन सिंह लुबाना, सचिव रणजीत सिंह राणवां आदि ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने फैसला किया था कि सरकारी व अर्द्ध सरकारी विभागों में से ठेकेदारों को बाहर निकाल कर कर्मियों को तनख्वाहों की अदायगी सीधी की जाएगी और सभी वर्ग के कर्मचारी रेगुलर किए जाएंगे। साथ ही पंजाब छठे वेतन आयोग का चेयरमैन रिटायर्ड हाईकोर्ट का जज लगाया जाएगा। इसी तरह से सीएम ने और भी कई मांगें मानी थीं, लेकिन अभी तक इन पर अमल नहीं किया गया।
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उन्होंने कहा कि सीएम संगत दर्शनों पर करोड़ों रुपये लुटा रहे हैं, लेकिन मिनीमम वेज लागू नहीं कर रही है। मुलाजिमों व पेंशनरों का 2014 से डीए का 23 महीने का बकाया नहीं दिया जा रहा है। जनवरी 2016 की छह प्रतिशत डीए की किश्त जारी नहीं की गई। दिहाड़ीदार, ठेका आधारित, आउट सोर्सिंग, पार्ट टाइम, वर्कचार्ज कर्मचारी जो पिछले 10, 15 और 20 सालों से काम कर रहे हैं, उन्हें रेगुलर नहीं किया जा रहा है।
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