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निजी स्कूलों पर नजर रखने को रेगुलेटरी अथारिटी का गठन जल्द : डीपीआई
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Sun, 08 May 2016 03:05 PM IST
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स्कूल
- फोटो : डेमो फोटो
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निजी स्कूलों की ओर से बिना किसी मंजूरी के फीसों में की जा रही बढ़ोतरी और अन्य मनमानियों पर नजर रखने के लिए पंजाब सरकार की ओर से जल्द ही रेगुलेटरी अथारिटी का गठन किया जा रहा है। यह बात डीपीआई स्कूल बलबीर सिंह ढोल ने पटियाला जिले के सरकारी स्कूलों की विशेष चेकिंग के बाद स्थानीय मल्टीपपर्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पत्रकारों से कही।
डीपीआई ने बताया कि बच्चों के अभिभावकों की ओर से निजी स्कूलों द्वारा हरेक साल फीसों में की जा रही बेतहाशा वृद्धि और स्कूलों में किताबों की जबरन बिक्री जैसे मामले सामने लाने के कारण राज्य सरकार की ओर से यह कदम उठाए गए हैं। पिछली मंत्रिमंडल की मीटिंग में निजी स्कूलों पर नजर रखने के लिए रेगुलेटरी अथारिटी स्थापित करने को सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है और जल्द ही इसको कैबिनेट की अगली बैठक में भेजा जाएगा।
उन्होंने बताया कि सीएम प्रकाश सिंह बादल और शिक्षा मंत्री दलजीत सिंह चीमा की ओर से स्कूलों में अध्यापकों की समय पर हाजिरी को यकीनी बनाने के लिए विशेष चेकिंग के आदेश दिए गए हैं। इस कड़ी के तहत राज्यस्तरीय 12 टीमों की ओर से जिले के 91 स्कूलों की पड़ताल दौरान 14 अध्यापकों के स्कूलों में देरी से पहुंचने और चार के गैरहाजिर होने के मामले सामने आए हैं। इस चेकिंग दौरान स्कूलों में बुनियादी ढांचे की जरूरतों व स्टाफ की कमी जैसी फीड बैक भी इकट्ठा की गई है।
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डीपीआई ने बताया कि राज्य के सरकारी स्कूलों के शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है। इस कड़ी के तहत शिक्षा विभाग की ओर से कदम उठाते हुए जल्द ही मास्टर केडर में से 2500 को तरक्की देकर लेक्चरर बनाया जा रहा है और 650 लेक्चररों की सीधी भरती भी की गई है। इसके अलावा जेबीटी के 4500 पद भरने के साथ-साथ 7000 मास्टरों की भरती के लिए अदालत में लंबित केस का जल्द निपटारा होने की संभावना है।
डीपीआई ने बताया कि शिक्षा विभाग की ओर से एक ऐसा साफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिससे स्कूलों में रोजाना देरी से पहुंचने वाले अध्यापकों का डाटा तैयार किया जाएगा और ऐसे अध्यापकों के खिलाफ बनती कार्रवाई की जाएगी। आज जिले के सभी सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों के साथ बैठक करके शिक्षा क्षेत्र में और सुधारों के बारे में भी चर्चा की गई है। जहां खराब कार्यप्रणाली वाले प्रिंसिपलों व अध्यापकों को काम में सुधार के लिए कहा गया है, वहीं अच्छा प्रदर्शन करने वालों को शाबासी भी दी गई है।
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डीपीआई ने बताया कि बच्चों के अभिभावकों की ओर से निजी स्कूलों द्वारा हरेक साल फीसों में की जा रही बेतहाशा वृद्धि और स्कूलों में किताबों की जबरन बिक्री जैसे मामले सामने लाने के कारण राज्य सरकार की ओर से यह कदम उठाए गए हैं। पिछली मंत्रिमंडल की मीटिंग में निजी स्कूलों पर नजर रखने के लिए रेगुलेटरी अथारिटी स्थापित करने को सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है और जल्द ही इसको कैबिनेट की अगली बैठक में भेजा जाएगा।
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उन्होंने बताया कि सीएम प्रकाश सिंह बादल और शिक्षा मंत्री दलजीत सिंह चीमा की ओर से स्कूलों में अध्यापकों की समय पर हाजिरी को यकीनी बनाने के लिए विशेष चेकिंग के आदेश दिए गए हैं। इस कड़ी के तहत राज्यस्तरीय 12 टीमों की ओर से जिले के 91 स्कूलों की पड़ताल दौरान 14 अध्यापकों के स्कूलों में देरी से पहुंचने और चार के गैरहाजिर होने के मामले सामने आए हैं। इस चेकिंग दौरान स्कूलों में बुनियादी ढांचे की जरूरतों व स्टाफ की कमी जैसी फीड बैक भी इकट्ठा की गई है।
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डीपीआई ने बताया कि राज्य के सरकारी स्कूलों के शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है। इस कड़ी के तहत शिक्षा विभाग की ओर से कदम उठाते हुए जल्द ही मास्टर केडर में से 2500 को तरक्की देकर लेक्चरर बनाया जा रहा है और 650 लेक्चररों की सीधी भरती भी की गई है। इसके अलावा जेबीटी के 4500 पद भरने के साथ-साथ 7000 मास्टरों की भरती के लिए अदालत में लंबित केस का जल्द निपटारा होने की संभावना है।
डीपीआई ने बताया कि शिक्षा विभाग की ओर से एक ऐसा साफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिससे स्कूलों में रोजाना देरी से पहुंचने वाले अध्यापकों का डाटा तैयार किया जाएगा और ऐसे अध्यापकों के खिलाफ बनती कार्रवाई की जाएगी। आज जिले के सभी सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों के साथ बैठक करके शिक्षा क्षेत्र में और सुधारों के बारे में भी चर्चा की गई है। जहां खराब कार्यप्रणाली वाले प्रिंसिपलों व अध्यापकों को काम में सुधार के लिए कहा गया है, वहीं अच्छा प्रदर्शन करने वालों को शाबासी भी दी गई है।